बेंगलुरु, 29 मार्च (भाषा) कृत्रिम मेधा (एआई) से बड़े पैमाने पर नौकरियां खत्म होने की आशंकाओं को खारिज करते हुए डेलॉयट के दक्षिण एशिया के मुख्य परिचालन अधिकारी (सीओओ) नितिन केनी ने कहा है कि कंपनी भारत में 50,000 लोगों की भर्ती की योजना पर काम कर रही है और इसमें कर्मचारियों को नई प्रौद्योगिकी के अनुरूप कौशल बढ़ाने पर खास जोर दिया जा रहा है।
‘पीटीआई-भाषा’ को दिए साक्षात्कार में केनी ने बताया कि डेलॉयट देश में तेजी से विस्तार और निवेश की योजना पर काम कर रही है और जल्द ही ‘क्वांटम उत्कृष्टता केंद्र’ शुरू करने की तैयारी है।
उन्होंने कहा कि एआई के कारण नियुक्तियों पर असर पड़ने की चिंता सही नहीं है। डेलॉयट एआई को नौकरियां कम करने वाला साधन नहीं मानती, बल्कि काम को ज्यादा आसान और प्रभावी बनाने का जरिया मानती है।
केनी ने कहा, ‘‘नौकरियों में कटौती करना कोई समाधान नहीं है। जरूरी है कि लोगों के कौशल को बढ़ाया जाए, ताकि वे नई प्रौद्योगिकी के साथ मिलकर अधिक मूल्य वाले और जटिल काम कर सकें।’’
उन्होंने बताया कि कंपनी अब तक करीब 30,000 कर्मचारियों को एआई का प्रशिक्षण दे चुकी है, जबकि लगभग 20,000 कर्मचारी कंपनी के अपने मंच पर काम करने के लिए तैयार किए जा रहे हैं।
उन्होंने बताया कि डेलॉयट के कुल वैश्विक कर्मचारियों में से लगभग एक-तिहाई भारत में काम करते हैं, जिससे भारत कंपनी के लिए एक अहम बाजार है।
केनी ने कहा कि कंपनी अपनी आय का करीब नै प्रतिशत हिस्सा कौशल विकास, क्षमता बढ़ाने और नए प्रयोगों पर खर्च करती है।
भाषा योगेश अजय
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