अनुपम रसायन ने ब्लिस जीवीएस फार्मा में 48.2 प्रतिशत हिस्सेदारी 1,750 करोड़ रुपये में खरीदी

अनुपम रसायन ने ब्लिस जीवीएस फार्मा में 48.2 प्रतिशत हिस्सेदारी 1,750 करोड़ रुपये में खरीदी

अनुपम रसायन ने ब्लिस जीवीएस फार्मा में 48.2 प्रतिशत हिस्सेदारी 1,750 करोड़ रुपये में खरीदी
Modified Date: September 29, 2026 / 12:42 pm IST
Published Date: September 29, 2026 12:42 pm IST

नयी दिल्ली, 29 सितंबर (भाषा) विशेष रसायन बनाने वाली कंपनी अनुपम रसायन इंडिया ने ब्लिस जीवीएस फार्मा में 48.2 प्रतिशत नियंत्रक हिस्सेदारी 1,750 करोड़ रुपये में खरीद ली है। इसके साथ ही कंपनी तैयार दवा उत्पादों के कारोबार में प्रवेश की दिशा में आगे बढ़ी है।

यह अनुपम रसायन का तीसरा रणनीतिक अधिग्रहण है। इससे पहले कंपनी ने टैनफैक इंडस्ट्रीज और जयहॉक फाइन केमिकल्स का अधिग्रहण किया था।

कंपनी ने मंगलवार को बताया कि नियंत्रक हिस्सेदारी प्रवर्तक/शेयर खरीद समझौते (एसपीए) के तहत 299 रुपये प्रति शेयर की दर से खरीदी गई। इसके अलावा खुली पेशकश और बाजार से कुछ अतिरिक्त शेयर खरीदने के जरिये भी हिस्सेदारी बढ़ाई गई।

अनुपम रसायन ने 23 मई, 2026 को ब्लिस जीवीएस में प्रवर्तक की हिस्सेदारी खरीदने के लिए एसपीए किया था। इसके तहत 5,09,84,595 शेयर (ब्लिस की 47.95 प्रतिशत हिस्सेदारी) की वास्तविक खरीद 28 सितंबर 2026 को हुई।

कंपनी ने 723.28 रुपये प्रति शेयर की दर से 22,50,000 अतिरिक्त शेयर भी खरीदे, जिनकी कुल कीमत 162.74 करोड़ रुपये रही। इसके अलावा 299 रुपये प्रति शेयर की दर से 1,669 शेयर के खुले प्रस्ताव के तहत खाते में शेयर जमा करने की प्रक्रिया पूरी की गई, जिनकी कीमत 4.99 लाख रुपये थी।

बयान में कहा गया कि अधिग्रहण की कुल लागत करीब 1,750 करोड़ रुपये रही, जिसमें अधिग्रहण से संबंधित 50 करोड़ रुपये का खर्च भी शामिल है।

कंपनी के अनुसार, इस सौदे के लिए 300 करोड़ रुपये के सावधि ऋण और बैन कैपिटल के नेतृत्व में निवेशकों से गैर-नियंत्रक, गैर-मतदान वाले साधनों के जरिये जुटाए गए करीब 1,450 करोड़ रुपये का इस्तेमाल किया गया। इन निवेशकों में ट्रस्ट ग्रुप और इन्वेस्टेक भी शामिल हैं।

कंपनी ने यह अधिग्रहण अपनी पूर्ण स्वामित्व वाली अनुषंगी कंपनी मेट्स वीजा कंसल्टेंसी के जरिये किया।

अनुपम रसायन के प्रबंध निदेशक आनंद देसाई ने कहा, ‘‘यह लेनदेन एक विविधीकृत, एकीकृत और नवोन्मेष आधारित वैश्विक दवा मंच बनाने की हमारी दीर्घकालिक रणनीति में एक महत्वपूर्ण पड़ाव है।’’

भाषा निहारिका

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