अरुणाचल भारत के स्वच्छ ऊर्जा बदलाव में दे सकता है योगदान: उपमुख्यमंत्री मीन

अरुणाचल भारत के स्वच्छ ऊर्जा बदलाव में दे सकता है योगदान: उपमुख्यमंत्री मीन

अरुणाचल भारत के स्वच्छ ऊर्जा बदलाव में दे सकता है योगदान: उपमुख्यमंत्री मीन
Modified Date: September 19, 2026 / 07:42 pm IST
Published Date: September 19, 2026 7:42 pm IST

ईटानगर, 19 सितंबर (भाषा) अरुणाचल प्रदेश के उपमुख्यमंत्री चोवना मीन ने शनिवार को कहा कि राज्य में जलविद्युत संसाधनों के दोहन की बड़ी क्षमता भारत के स्वच्छ ऊर्जा की ओर बढ़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है और देश की ऊर्जा सुरक्षा में योगदान दे सकती है।

राष्ट्रीय राजधानी में ‘विकसित भारत की यात्रा के लिए वित्तपोषण’ विषय पर आयोजित सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि जलविद्युत स्थिर और भरोसेमंद नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत है तथा यह सौर और पवन ऊर्जा जैसे मौसम पर निर्भर स्रोतों का पूरक है।

बिजली और जलविद्युत विभाग का भी प्रभार संभाल रहे मीन ने कहा कि अरुणाचल प्रदेश के जलविद्युत संसाधनों का टिकाऊ विकास केवल राज्य की प्राथमिकता के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि इसे देश के लिए रणनीतिक अवसर के रूप में भी देखा जाना चाहिए।

उन्होंने कहा, ‘‘अरुणाचल प्रदेश में जलविद्युत की अनुमानित क्षमता करीब 58,000 मेगावाट है, जो देश की कुल जलविद्युत क्षमता का करीब 40 प्रतिशत है। राज्य ने 2047 तक 40,000 मेगावाट जलविद्युत क्षमता का दोहन करने का लक्ष्य रखा है।’’

क्षेत्र में हुई प्रगति का उल्लेख करते हुए मीन ने कहा कि राज्य की स्थापित जलविद्युत क्षमता 2016 में 405 मेगावाट थी, जो बढ़कर करीब 1,200 मेगावाट हो गई है।

अरुणाचल प्रदेश ने ‘जलविद्युत का दशक 2025-35’ दृष्टिकोण के तहत 19,000 मेगावाट नई जलविद्युत क्षमता वाली परियोजनाएं चालू करने की योजना बनाई है। इसके लिए करीब 1.9 लाख करोड़ रुपये के निवेश की संभावना है।

भाषा योगेश पाण्डेय

पाण्डेय


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