भारत के युवा अगले कुछ वर्षों में यहीं से क्वालकॉम, इंटेल जैसी कंपनियां खड़ी करेंगे: वैष्णव
भारत के युवा अगले कुछ वर्षों में यहीं से क्वालकॉम, इंटेल जैसी कंपनियां खड़ी करेंगे: वैष्णव
नयी दिल्ली, 19 सितंबर (भाषा) सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने शनिवार को कहा कि वाणिज्यिक स्तर पर पांच सेमीकंडक्टर इकाइयों में उत्पादन शुरू होने और वैश्विक कंपनियों के नए निवेश के लिए आगे आने के साथ भारत की चिप रणनीति को लेकर शुरुआती सवाल अब बढ़ते भरोसे में बदल गए हैं।
उन्होंने पूरा भरोसा जताया कि भारत में युवाओं के नेतृत्व वाले स्टार्टअप देश में ही क्वालकॉम और इंटेल जैसी कंपनियां खड़ी करेंगे।
पीटीआई-भाषा को दिए साक्षात्कार में वैष्णव ने कहा कि कई देश भारत को एक भरोसेमंद साझेदार के रूप में देखते हैं। हालांकि, उन्होंने आगाह किया कि सेमीकंडक्टर उद्योग और गहन प्रौद्योगिकी स्टार्टअप को संभावित साइबर हमलों, खतरों और उन लोगों से पैदा होने वाली बाधाओं के प्रति सतर्क रहना होगा, जो वैश्विक सेमीकंडक्टर मूल्य शृंखला में भारत के उभरने में अड़चन डालना चाहते हैं।
वैष्णव ने कहा कि पिछले चार-पांच वर्षों में भारत की विनिर्माण क्षमताओं को लेकर वैश्विक धारणा में बुनियादी बदलाव आया है।
उन्होंने कहा कि शुरुआत में उठाए गए सवाल अब खत्म हो गए हैं और परियोजनाओं के निर्माण से लेकर प्रायोगिक उत्पादन और अब बड़े पैमाने पर वाणिज्यिक उत्पादन तक पहुंचने के साथ भारत को लेकर भरोसा बढ़ा है।
सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री ने कहा कि वैश्विक कंपनियों के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) अब भारत में निवेश की तैयारी कर रहे हैं और कई कंपनियां स्थानीय साझेदारियों तथा संयंत्रों के स्थान को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया में हैं।
वैष्णव ने बताया कि एक कंपनी के सीईओ ने उनसे बातचीत के दौरान कहा कि उस कंपनी के निदेशक मंडल ने भारत में सेमीकंडक्टर योजनाओं के लिए उतनी पूंजी लगाने की मंजूरी दी है, जितनी उनकी टीम वास्तव में खर्च कर सकती है।
वैष्णव ने कहा, ‘‘इस तरह की प्रतिक्रिया हमारे प्रयासों को मान्यता देती है, लेकिन मैं अब भी कहता हूं कि यह सिर्फ पहला कदम है… यह आधार है। अभी बहुत कुछ किया जाना बाकी है, क्योंकि सेमीकंडक्टर जैसा मुश्किल और जटिल उद्योग खड़ा करने के लिए दृढ़ता, धैर्य और हर स्तर पर बारीकी से काम करना बहुत जरूरी है।’’
उन्होंने कहा कि सेमीकंडक्टर क्षेत्र में भारत की दीर्घकालिक सफलता केवल मौजूदा बाजार के उत्पादों पर ध्यान देने से नहीं मिलेगी, बल्कि अलग पहचान वाले उत्पाद विकसित करने पर निर्भर करेगी।
उन्होंने युवा नवोन्मेषकों से अपनी डिजाइन क्षमताएं दिखाने का आग्रह किया, ताकि विनिर्माता भारतीय आपूर्ति श्रृंखला को अपनाने के लिए प्रेरित हों।
मंत्री ने विश्वास जताया कि युवाओं के नेतृत्व वाले प्रयास आने वाले वर्षों में भारत से अगली क्वालकॉम और इंटेल जैसी कंपनियां खड़ी करेंगे।
वैष्णव ने कहा, ‘‘मुझे विश्वास है कि आने वाले वर्षों में भारत से क्वालकॉम और इंटेल जैसी कंपनियां सामने आएंगी, क्योंकि युवा पीढ़ी अच्छे उत्पाद बनाने की जिम्मेदारी संभालेगी।’’
मंत्री की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब भारत एक मजबूत सेमीकंडक्टर परिवेश विकसित करने के व्यापक प्रयास कर रहा है। इसमें केवल चिप विनिर्माण तक सीमित रहने के बजाय उपकरण, सामग्री, पैकेजिंग, डिजाइन और आपूर्ति श्रृंखला की अन्य महत्वपूर्ण कड़ियों पर भी ध्यान दिया जा रहा है।
‘सेमीकॉन 2.0’ नीति के तहत भारत चिप डिजाइन से लेकर चिप विनिर्माण, परीक्षण और प्रतिभा विकास तक पूरी सेमीकंडक्टर मूल्य शृंखला तैयार करने के लिए बड़े पूंजीगत प्रोत्साहन, इंजीनियरिंग क्षमताओं और बड़े उपभोक्ता बाजार का लाभ उठा रहा है।
सरकार के अनुसार, ‘सेमीकॉन 2.0’ के तहत सेमीकंडक्टर क्षेत्र में करीब 11-12 अरब डॉलर के निवेश में रुचि सामने आई है। इन परियोजनाओं के अगले दो-तीन वर्षों में आकार लेने की उम्मीद है।
इस रुचि की झलक ‘सेमीकॉन इंडिया’ कार्यक्रम में भी देखने को मिली। इसमें भारत की चिप विनिर्माण क्षमता को प्रदर्शित किया गया और कई बड़े निवेश प्रस्तावों की घोषणा हुई।
वैष्णव ने कहा कि ‘सेमीकॉन 2.0’ के प्रमुख लक्ष्यों में कम से कम तीन बड़ी वैश्विक उपकरण विनिर्माता कंपनियों और तीन प्रमुख सामग्री आपूर्तिकर्ताओं को भारत में अपनी इकाइयां स्थापित करने के लिए तैयार करना तथा स्थानीय सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों (एमएसएमई) को सटीक विनिर्माण से जोड़ना शामिल है।
उन्होंने कहा कि देश में डिजाइन और मानव संसाधन क्षमता बढ़ाने के लिए सरकार का लक्ष्य 200 चिप-डिजाइन स्टार्टअप को उद्यम पूंजी हासिल करने में मदद करना, एक लाख कुशल तकनीशियनों को प्रशिक्षित करना, चिप डिजाइन से लेकर पूरी प्रणाली के डिजाइन तक विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रमों को उन्नत करना और अंततः एक लाख से अधिक रोजगार पैदा करना है।
वैष्णव ने ‘सेमीकॉन इंडिया’ में वैश्विक भागीदारी को रेखांकित करते हुए कहा कि तीन दिन के इस कार्यक्रम में सेमीकंडक्टर मूल्य शृंखला से जुड़ी करीब 600 कंपनियों ने हिस्सा लिया। दक्षिण कोरिया, जापान और सिंगापुर की सरकारें अपनी कंपनियों को भारत में डिजाइन और विनिर्माण इकाइयां स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित कर रही हैं।
उन्होंने कहा कि भारत में उत्पादन कर रही पांच सेमीकंडक्टर इकाइयां वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी हैं और जापान, यूरोप तथा अमेरिका समेत प्रमुख बाजारों को निर्यात कर रही हैं।
मंत्री ने कहा कि इससे साबित होता है कि भारत अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप लागत और गुणवत्ता वाले चिप का विनिर्माण कर सकता है।
मंत्री ने कहा, ‘‘यह सुनिश्चित करना बहुत महत्वपूर्ण है कि लागत प्रतिस्पर्धी हो और गुणवत्ता ऐसी हो कि उत्पाद वैश्विक बाजार में टिक सके।’’
वैष्णव ने भारत के वैश्विक सेमीकंडक्टर क्षेत्र में एक प्रतिस्पर्धी देश के रूप में उभरने के बीच उद्योग और गहन प्रौद्योगिकी स्टार्टअप को संभावित भू-राजनीतिक बाधाओं और साइबर खतरों के प्रति सतर्क रहने की भी चेतावनी दी।
उन्होंने कहा, ‘‘हमें अन्य पक्षों से आने वाले जोखिमों और चुनौतियों के प्रति सजग रहना चाहिए। इसलिए मैंने पूरे उद्योग से स्पष्ट रूप से कहा है कि साइबर हमलों के लिए तैयार रहें, किसी भी अन्य तरह के खतरे के लिए तैयार रहें और उन देशों की ओर से पैदा की जाने वाली किसी भी तरह की बाधा के लिए तैयार रहें, जो नहीं चाहते कि भारत सेमीकंडक्टर मूल्य श्रृंखला में आगे बढ़े।’’
उन्होंने कहा, ‘‘हमने उनसे (उद्योग से) स्पष्ट रूप से बात की है, इसलिए वे इन जोखिमों से अवगत हैं और निश्चित रूप से उचित कदम उठाएंगे।’’
भाषा योगेश पाण्डेय
पाण्डेय

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