नयी दिल्ली, 28 जुलाई (भाषा) पोर्टफोलियो प्रबंधन सेवा (पीएमएस) उद्योग की प्रबंधन अधीन परिसंपत्तियां जून 2026 में मासिक आधार पर 1.8 प्रतिशत बढ़कर 43.3 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गईं। यह वृद्धि निवेशकों के बीच उनकी जरूरत के अनुरूप और पेशेवर ढंग से प्रबंधित निवेश समाधानों की बढ़ती मांग को बताती है।
‘एसोसिएशन ऑफ पोर्टफोलियो मैनेजर्स इन इंडिया’ (एपीएमआई) की मंगलवार को जारी रिपोर्ट के मुताबिक, इस वृद्धि में विवेकाधीन श्रेणी का सबसे बड़ा योगदान रहा। उद्योग का ग्राहक आधार भी करीब चार प्रतिशत बढ़कर लगभग 2.20 लाख खातों तक पहुंच गया, जो वित्त वर्ष 2026-27 में निवेशकों की बढ़ती भागीदारी का संकेत है।
पोर्टफोलियो प्रबंधन सेवा में विवेकाधीन श्रेणी के तहत पोर्टफोलियो प्रबंधक के पास व्यक्तिगत कारोबार के लिए ग्राहक के निवेश राशि को उसकी मंजूरी की आवश्यकता के बगैर लगाने और प्रबंधित करने का पूरा अधिकार होता है।
कुल प्रबंधन-अधीन परिसंपत्तियों (एयूएम) में विवेकाधीन श्रेणी का योगदान 36.72 लाख करोड़ रुपये रहा, जबकि गैर-विवेकाधीन श्रेणी के तहत 3.42 लाख करोड़ रुपये और सलाहकार श्रेणी के तहत 3.06 लाख करोड़ रुपये की परिसंपत्तियों का प्रबंधन किया गया।
कुल निवेश प्रवाह जून में बढ़कर 3.55 लाख करोड़ रुपये हो गया। इसमें विवेकाधीन श्रेणी में निवेश प्रवाह में तेज वृद्धि का प्रमुख योगदान रहा।
परिसंपत्ति वर्गों में इक्विटी निवेश 1.4 प्रतिशत, सामान्य बॉन्ड निवेश 1.2 प्रतिशत बढ़ा, जबकि म्यूचुअल फंड में निवेश में 14.6 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि हुई।
कुल निवेश में घरेलू निवेशकों का दबदबा बरकरार रहा। कुल ग्राहक आधार में उनकी हिस्सेदारी 91 प्रतिशत और उद्योग के कुल एयूएम में 95 प्रतिशत रही। घरेलू एयूएम में मासिक आधार पर 1.9 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि विदेशी एयूएम में 0.2 प्रतिशत की मामूली गिरावट दर्ज की गई।
रिपोर्ट के मुताबिक, भविष्य निधि (पीएफ) और कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) घरेलू परिसंपत्तियों का प्रमुख आधार बने रहे और घरेलू एयूएम में इनकी हिस्सेदारी करीब 79 प्रतिशत रही। साथ ही, वितरकों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी से देशभर में पीएमएस को अपनाने में भी तेजी आई है।
म्यूचुअल फंड और वैकल्पिक निवेश कोष (एआईएफ) के विपरीत, पीएमएस निवेशकों की जरूरतों के अनुरूप निवेश पोर्टफोलियो उपलब्ध कराता है। इसमें निवेशक निश्चित शुल्क या प्रदर्शन-आधारित शुल्क जैसे विभिन्न शुल्क ढांचों का भी चयन कर सकते हैं।
भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के कड़े खुलासे और अनुपालन मानकों ने भी इस क्षेत्र में पारदर्शिता और निवेशकों का भरोसा बढ़ाया है।
एपीएमआई के वाइस चेयरमैन सुशांत भंसाली ने कहा कि भारत का संपत्ति प्रबंधन परिदृश्य संरचनात्मक बदलाव के दौर से गुजर रहा है, जहां निवेशक अपने दीर्घकालिक वित्तीय लक्ष्यों के अनुरूप और पेशेवर ढंग से प्रबंधित निवेश समाधानों को प्राथमिकता दे रहे हैं।
उन्होंने कहा कि परिसंपत्तियों और निवेशकों की संख्या में लगातार वृद्धि पीएमएस व्यवस्था में बढ़ते भरोसे को बताती है। बेहतर कामकाज, पारदर्शिता और निवेशक-केंद्रित कार्यप्रणालियों पर निरंतर ध्यान उद्योग के टिकाऊ विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
भाषा रमण प्रेम
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