देश में शीर्ष पदों पर वित्त वर्ष 2025-26 में औसत वेतन 10.5 करोड़ रुपये रहा : डेलॉयट रिपोर्ट
देश में शीर्ष पदों पर वित्त वर्ष 2025-26 में औसत वेतन 10.5 करोड़ रुपये रहा : डेलॉयट रिपोर्ट
नयी दिल्ली, 27 मार्च (भाषा) वित्त वर्ष 2025-26 में गैर-प्रर्वतकों या पेशेवर मुख्य कार्यपालक अधिकारियों (सीईओ) का औसत वेतन सालाना आधार पर पांच प्रतिशत बढ़कर 10.5 करोड़ रुपये हो गया है। डेलॉयट की एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई।
रिपोर्ट में कहा गया कि 10.5 करोड़ रुपये का औसत वेतन कोविड-19 वैश्विक महामारी के बाद सबसे धीमी वृद्धि को दर्शाता है। साथ ही इसमें प्रोत्साहन, शेयर से जुड़े भुगतान एवं मुख्य डिजिटल अधिकारी जैसे नए महत्वपूर्ण पदों की बढ़ती भूमिका भी शामिल है।
डेलॉयट इंडिया के साझेदार आनंदोरुप घोष ने कहा, ‘‘ भारत में सीएक्सओ (मुख्य कार्यकारी एवं शीर्ष प्रबंधन अधिकारी) पद से जुड़े निर्णयों में काफी परिपक्वता देखने को मिली है। पिछले 12–18 महीने में भारतीय शेयर बाजार के लगातार कमजोर प्रदर्शन को देखते हुए यह स्वाभाविक है कि पिछले वर्ष वेतन वृद्धि कम रही।’’
उन्होंने कहा, ‘‘ मौजूदा भू-राजनीतिक जोखिमों के कारण हाल के समय में बाजार की अस्थिरता एवं गिरावट के जोखिम और बढ़ गए हैं। हमें निदेशक मंडल और पारिश्रमिक समितियों से किसी त्वरित या भावनात्मक प्रतिक्रिया की उम्मीद नहीं है। वे घरेलू तथा वैश्विक घटनाक्रम किस तरह आगे बढ़ते हैं, उसके आधार पर अपनी रणनीति में बदलाव कर सकते हैं।’’
रिपोर्ट में बताया गया कि शीर्ष पदों में सबसे अधिक वेतन वृद्धि मुख्य वित्तीय अधिकारियों (सीएफओ) की हुई क्योंकि उनकी भूमिकाएं अधिक महत्वपूर्ण हैं और उनके प्रदर्शन का सीधा असर शेयरधारकों पर पड़ता है।
इसमें साथ ही कहा गया कि भारत में वेतन और ‘बोनस’ देने के तरीके बदल रहे हैं। पहले सभी कर्मचारियों के लिए एक ही योजना होती थी हालांकि अब कंपनियां अलग-अलग कर्मचारियों के लिए अलग लंबी अवधि की प्रोत्साहन योजनाएं लागू कर रही हैं।
भाषा योगेश निहारिका
निहारिका

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