नयी दिल्ली, 28 सितंबर (भाषा) राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से संबद्ध भारतीय किसान संघ (बीकेएस) 30 सितंबर को यहां अपना पहला महिला सम्मेलन आयोजित करेगा। इसका मकसद कृषि नीति-निर्माण में महिला किसानों की ज्यादा भागीदारी सुनिश्चित करना तथा खेती, पशुपालन और मछली पालन में उनके योगदान को सामने लाना है।
बीकेएस के राष्ट्रीय महासचिव मोहिनी मोहन मिश्रा ने एक संवाददाता सम्मेलन में बताया कि ‘अखिल भारतीय महिला किसान-मजदूर सम्मेलन’ इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम में आयोजित किया जाएगा। इसमें देश भर से लगभग 7,000 महिला किसान और पदाधिकारी शामिल होंगे।
मिश्रा ने कहा, ‘‘खेती, पशुपालन और मछली पालन में महिलाओं की बड़ी भागीदारी है, लेकिन जब नीतिगत फैसले लिए जाते हैं, तो उनकी भागीदारी दिखाई नहीं देती।’’
मिश्रा ने बताया कि बीकेएस के लगभग 50 लाख सदस्य हैं, जिनमें करीब सात लाख महिलाएं शामिल हैं। उन्होंने कहा कि 30 सितंबर का कार्यक्रम कृषि में महिलाओं के योगदान, नीति-निर्माण में उनकी भागीदारी, प्राकृतिक और जैविक खेती, बीज संरक्षण, पशुपालन, रोजगार सृजन और खाद्य प्रसंस्करण पर केंद्रित होगा।
मिश्रा ने महिलाओं को कृषि की ‘रीढ़’ बताते हुए कहा, ‘‘महिलाएं बुवाई, रोपाई, कटाई, खरपतवार नियंत्रण और पशुपालन जैसे कृषि कार्यों का 60 से 80 प्रतिशत हिस्सा संभालती हैं।’’
बीकेएस की अखिल भारतीय महिला समन्वयक मंजू दीक्षित ने कहा कि इस कार्यक्रम का मकसद महिला किसानों में आत्मविश्वास जगाना और उन्हें कृषि से जुड़े नीतिगत फैसलों में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करना है।
मिश्रा ने कहा कि संगठन महिला किसानों की सरकारी योजनाओं तक पहुंच और कृषि नीति बनाने वाले संस्थानों में उनकी भागीदारी से जुड़े मुद्दों को भी उठाएगा।
यह कार्यक्रम संयुक्त राष्ट्र द्वारा वर्ष 2026 को ‘महिला किसान के अंतरराष्ट्रीय वर्ष’ घोषित किए जाने के संदर्भ में आयोजित किया जा रहा है।
दीक्षित ने कहा कि इस कार्यक्रम का मकसद महिलाओं की किसान के तौर पर पहचान और सम्मान स्थापित करना है, साथ ही खेती के काम में उन्हें आने वाली चुनौतियों को सामने लाना है।
भाषा राजेश राजेश अजय
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