भारतपे ने यूपीआई एमडीआर का किया समर्थन, अशनीर ग्रोवर की टिप्पणियों से खुद को किया अलग

भारतपे ने यूपीआई एमडीआर का किया समर्थन, अशनीर ग्रोवर की टिप्पणियों से खुद को किया अलग

भारतपे ने यूपीआई एमडीआर का किया समर्थन, अशनीर ग्रोवर की टिप्पणियों से खुद को किया अलग
Modified Date: September 17, 2026 / 05:16 pm IST
Published Date: September 17, 2026 5:16 pm IST

नयी दिल्ली, 17 सितंबर (भाषा) वित्तीय प्रौद्योगिकी कंपनी भारतपे ने बृहस्पतिवार को यूपीआई के जरिये कारोबारियों के लेनदेन पर नए ‘मर्चेंट डिस्काउंट रेट’ (एमडीआर) रूपरेखा का समर्थन किया। साथ ही कंपनी ने अपने पूर्व सह-संस्थापक और मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) अशनीर ग्रोवर के बयानों से खुद को अलग कर लिया।

‘भारतपे’ ने स्पष्ट किया कि ग्रोवर की टिप्पणियां कंपनी का रुख नहीं दर्शाती हैं और उन्होंने ये विचार पूरी तरह व्यक्तिगत हैसियत से व्यक्त किए हैं।

कंपनी के एक प्रवक्ता ने कहा, ‘‘ग्रोवर का 2024 से भारतपे से कोई संबंध नहीं है और वह न तो कंपनी के शेयरधारक हैं और न ही किसी भी हैसियत से कंपनी से जुड़े हैं।’’

उन्होंने मीडिया से उनके बयानों को कंपनी के साथ जोड़कर पेश नहीं करने का आग्रह किया।

यह स्पष्टीकरण सोशल मीडिया और उद्योग से जुड़े कार्यक्रमों में ग्रोवर द्वारा यूपीआई में एमडीआर में बदलाव की आलोचना किए जाने के बाद आया है।

ग्रोवर ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा था, ‘‘यूपीआई पर कोई भी एमडीआर भारत में उस एक चीज को खत्म कर देगा जो बिना किसी रुकावट के काम कर रही है, यानी मोबाइल भुगतान। यह सरकार का एक प्रतिगामी कदम है और उसे इस पर पुनर्विचार करना चाहिए।’’

करीब छह साल तक पूरी तरह नि:शुल्क रहे यूपीआई भुगतान की व्यवस्था को बदलने का सरकार ने मंगलवार को फैसला लिया। नए नियमों के तहत 15 अक्टूबर से व्यापारियों को किए जाने वाले 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई भुगतान पर 0.4 प्रतिशत शुल्क लगाने की घोषणा की गई। यह शुल्क व्यापारियों को देना होगा। हालांकि, रोजमर्रा के व्यक्ति-से-व्यक्ति (पी2पी) लेनदेन और छोटे भुगतान को इस शुल्क से बाहर रखा गया है।

ग्रोवर के रुख से अलग भारतपे ने कहा कि नयी व्यवस्था डिजिटल भुगतान के आर्थिक आधार को मजबूत करेगा और साथ ही उपभोक्ताओं तथा छोटे कारोबारियों के हितों की रक्षा जारी रखेगा।

भारतपे के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) नलिन नेगी ने कहा, ‘‘नया एमडीआर ढांचा यह साबित करता है कि टिकाऊ, मजबूत और सुदृढ़ भुगतान तंत्र तैयार करते हुए भी उपभोक्ताओं के लिए यूपीआई नि:शुल्क बना रहेगा। उपभोक्ताओं को यूपीआई के लिए कोई शुल्क नहीं देना होगा, जबकि पी2पीएम (व्यक्ति से कारोबारी) ढांचे के तहत सूक्ष्म और छोटे कारोबारी शून्य एमडीआर के दायरे में सुरक्षित रहेंगे।’’

उन्होंने कहा कि यह ढांचा खासकर छोटे शहरों और अभी कम सेवा वाले बाजारों में कारोबारी भुगतान स्वीकार्यता, बुनियादी ढांचे और डिजिटल भुगतान को अपनाने के विस्तार के लिए संसाधन उपलब्ध कराएगा।

भाषा योगेश रमण

रमण


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