नकली सामान और तस्करी से विनिर्माण लक्ष्य, उपभोक्ताओं का भरोसा होता है प्रभावित: कोविंद

नकली सामान और तस्करी से विनिर्माण लक्ष्य, उपभोक्ताओं का भरोसा होता है प्रभावित: कोविंद

नकली सामान और तस्करी से विनिर्माण लक्ष्य, उपभोक्ताओं का भरोसा होता है प्रभावित: कोविंद
Modified Date: September 17, 2026 / 05:09 pm IST
Published Date: September 17, 2026 5:09 pm IST

नयी दिल्ली, 17 सितंबर (भाषा) पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने बृहस्पतिवार को कहा कि नकली सामान और तस्करी भारत की विनिर्माण क्षेत्र की महत्वाकांक्षाओं को कमजोर करते हैं, ईमानदार कारोबारियों और किसानों को नुकसान पहुंचाते हैं तथा उपभोक्ताओं के विश्वास को कम करते हैं। उन्होंने अवैध व्यापार से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और विभिन्न एजेंसियों के बीच अधिक सहयोग का आह्वान किया।

कोविंद ने यहां उद्योग मंडल फिक्की के ‘मैस्क्रेड’ (तस्करी और नकली व्यापार के खिलाफ मुहिम) के 12वें संस्करण के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि कीटनाशकों समेत कृंषि से संबंधित नकली कच्चे माल से फसल उत्पादकता और किसानों की आजीविका प्रभावित हो सकती है।

कोविंद ने कहा, ‘‘नकली उत्पाद वैश्विक बाजारों में भारतीय उत्पादों और उद्यमों की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा सकते हैं। तस्करी ईमानदार कारोबारियों को नुकसान की स्थिति में डाल सकती है। वहीं, उपभोक्ताओं के लिए इसके परिणाम व्यक्तिगत स्तर पर गंभीर हो सकते हैं।’’

भारत की 1960 के दशक में खाद्य आयात पर निर्भरता से लेकर खाद्यान्न के मामले में आत्मनिर्भरता हासिल करने तक की यात्रा का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र में नकली उत्पाद खाद्य और पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करने में हासिल उपलब्धियों के लिए खतरा हैं, खासकर तब जब भारत की कृषि उत्पादकता अभी भी वैश्विक मानकों से कम है।

उन्होंने कहा, ‘‘कीटनाशकों समेत कृषि से संबंधित नकली कच्चे माल के दूरगामी परिणाम होते हैं। इनसे फसल उत्पादकता पर प्रतिकूल असर पड़ता है, किसानों की आजीविका प्रभावित होती है और अंततः खाद्य तथा पोषण सुरक्षा की बुनियाद को मजबूत करने के हमारे प्रयास कमजोर पड़ते हैं।’’

कोविंद ने कहा कि अवैध व्यापार तेजी से अंतरराष्ट्रीय स्वरूप और उन्नत प्रौद्योगिकी वाला होता जा रहा है तथा आपराधिक नेटवर्क वैश्विक लॉजिस्टिक, डिजिटल बाजारों, सोशल मीडिया और जटिल वित्तीय माध्यमों का फायदा उठा रहे हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘सीमाएं अलग हो सकती हैं, अधिकार क्षेत्र अलग हो सकते हैं और इसमें शामिल एजेंसियां अलग हो सकती हैं। लेकिन आपराधिक नेटवर्क एक जुड़े हुए तंत्र के रूप में काम करता है।’’

उन्होंने कहा कि इसलिए इससे निपटने के लिए भी एकजुट और सामूहिक प्रतिक्रिया की जरूरत है।

कोविंद ने कहा कि आंकड़ों का विश्लेषण और कृत्रिम मेधा एजेंसियों को असामान्य गतिविधियों की पहचान करने तथा जोखिमों का आकलन करने में मदद कर सकते हैं, लेकिन केवल प्रौद्योगिकी पर्याप्त नहीं होगी।

उन्होंने कहा, ‘‘हमें प्रौद्योगिकी की जरूरत है, लेकिन खुफिया जानकारी साझा करने के लिए विभिन्न एजेंसियों और देशों के बीच सहयोग भी जरूरी है। एक एजेंसी को जो जानकारी महत्वहीन लग सकती है, वही किसी दूसरी एजेंसी के लिए किसी बड़ी जांच में गायब महत्वपूर्ण कड़ी हो सकती है।’’

कोविंद ने कहा कि आपराधिक नेटवर्क अलग-अलग हिस्सों में बंटकर काम नहीं करते और इसलिए प्रवर्तन एजेंसियां भी ऐसा करने का जोखिम नहीं उठा सकतीं।

उन्होंने कहा कि नकली सामान और तस्करी भारत के लिए देश की सभ्यतागत परंपरा, उद्यम, विनिर्माण और नवाचार का वैश्विक केंद्र बनने की आकांक्षा तथा सशक्त उपभोक्ता के हित जैसी तीन महत्वपूर्ण चीजों के लिए खतरा हैं, जिसे उत्पाद खरीदते समय उन पर विश्वास करने का अधिकार होना चाहिए।

कोविंद ने सम्मेलन के विषय ‘‘एक दुनिया, एक लड़ाई : सामूहिक कार्रवाई के जरिये नकली सामान और तस्करी का उन्मूलन’’ को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘‘एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य’’ के विचार से जोड़ा।

उन्होंने कहा कि अवैध व्यापार के खिलाफ लड़ाई केवल सीमा शुल्क अधिकारियों, नियामकों, उद्योग या उपभोक्ताओं तक सीमित नहीं रह सकती और इसे व्यापक राष्ट्रीय प्रयास बनाने की जरूरत है।

कोविंद ने कहा, ‘‘यह केवल तस्करी और नकली सामान के खिलाफ लड़ाई नहीं है। यह विश्वास कायम रखने और हमारे आर्थिक भविष्य को सुरक्षित करने की लड़ाई है।’’

भाषा योगेश रमण

रमण


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