उर्वरक क्षेत्र में बड़ा कदम: 6.7 लाख टन ‘ग्रीन अमोनिया’ की आपूर्ति के लिए हुए समझौते

उर्वरक क्षेत्र में बड़ा कदम: 6.7 लाख टन 'ग्रीन अमोनिया' की आपूर्ति के लिए हुए समझौते

उर्वरक क्षेत्र में बड़ा कदम: 6.7 लाख टन ‘ग्रीन अमोनिया’ की आपूर्ति के लिए हुए समझौते
Modified Date: March 30, 2026 / 10:21 pm IST
Published Date: March 30, 2026 10:21 pm IST

नयी दिल्ली, 30 मार्च (भाषा) एक्मे क्लीनटेक और एनटीपीसी रिन्यूएबल एनर्जी सहित पांच प्रमुख कंपनियों ने सोमवार को इफको और कोरोमंडल जैसी उर्वरक इकाइयों के साथ सालाना 6.7 लाख टन ‘ग्रीन अमोनिया’ (पर्यावरण अनुकूल अमोनिया) की आपूर्ति के लिए 10 साल का पक्का समझौता किया है।

पश्चिम एशिया संकट के कारण ऊर्जा आयात में आ रही बाधाओं के बीच, भारत का यह कदम ऊर्जा सुरक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। परंपरागत ‘ग्रे अमोनिया’ (जो प्राकृतिक गैस से बनता है) के विपरीत, ‘ग्रीन अमोनिया’ अक्षय ऊर्जा से तैयार होता है और इसमें कार्बन उत्सर्जन शून्य होता है।

यह समझौता पश्चिम एशिया संकट के बीच ऊर्जा आयात में आ रही बाधाओं को देखते हुए भारत की ऊर्जा सुरक्षा की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

इस निविदा प्रक्रिया के दौरान ग्रीन अमोनिया की न्यूनतम कीमत 49.75 रुपये प्रति किलोग्राम रखी गई है, जबकि अधिकतम दर 64.74 रुपये प्रति किलोग्राम रही। यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रचलित करीब 110 रुपये प्रति किलोग्राम की दरों के मुकाबले काफी कम और प्रतिस्पर्धी है।

भारतीय सौर ऊर्जा निगम (एसईसीआई) ने इस आपूर्ति के लिए देश भर की 13 उर्वरक इकाइयों को चिन्हित किया है।

नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रल्हाद जोशी ने इस अवसर पर कहा कि गैर-यूरिया उर्वरक इकाइयों में आयातित ‘ग्रे अमोनिया’ की जगह इस हरित विकल्प के उपयोग से अगले एक दशक में भारत को लगभग 2.5 अरब डॉलर की विदेशी मुद्रा की बचत होगी।

मंत्री ने जोर देकर कहा कि दुनिया की वर्तमान स्थिति को देखते हुए हमें ऊर्जा सुरक्षा और आत्मनिर्भर आपूर्ति श्रृंखला की ओर बढ़ना होगा। ग्रीन हाइड्रोजन और ग्रीन अमोनिया ‘आत्मनिर्भर भारत’ के लक्ष्य को पूरा करने और प्राकृतिक गैस पर हमारी निर्भरता कम करने में केंद्रीय भूमिका निभाएंगे।

भाषा सुमित अजय

अजय


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