नयी दिल्ली, 22 जुलाई (भाषा) सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) को पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की कीमतें लागत से कम रखने की वजह से वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में 3,962.13 करोड़ रुपये का शुद्ध घाटा हुआ है।
भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) ने बुधवार को शेयर बाजार को अप्रैल-जून तिमाही के नतीजों की सूचना दी। एक साल पहले की समान तिमाही में कंपनी को 3,333.97 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ हुआ था।
बीपीसीएल और अन्य सरकारी पेट्रोलियम विपणन कंपनियों ने कच्चे तेल की कीमतों में 50 प्रतिशत से अधिक उछाल के बावजूद करीब ढाई महीने तक पेट्रोल और डीजल की कीमतें स्थिर रखी थीं। यह उछाल 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर हमले और उसके बाद तेहरान की जवाबी कार्रवाई के बाद आया था।
हालांकि, मई के दूसरे पखवाड़े में कंपनियों ने पेट्रोल-डीजल की कीमतों में 7.50 रुपये प्रति लीटर से अधिक की बढ़ोतरी की, लेकिन यह लागत की पूरी भरपाई नहीं कर पाई। इस दौरान घरेलू रसोई गैस सिलेंडर की कीमत भी 89 रुपये बढ़ाई गई।
बीपीसीएल ने कहा, ‘‘पेट्रोलियम उत्पादों पर दबावग्रस्त विपणन मार्जिन के कारण घाटा हुआ, जिसे आंशिक रूप से बेहतर रिफाइनिंग मार्जिन से संतुलित किया गया।’’
एलपीजी पर कंपनी को जून तिमाही में 3,485.22 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। इसके अलावा मार्च, 2026 तक 12,318.52 करोड़ रुपये की एलपीजी सब्सिडी भी बकाया है।
अप्रैल-जून तिमाही में कंपनी की परिचालन आय बढ़कर 1.59 लाख करोड़ रुपये हो गई, जो एक साल पहले इसी अवधि में 1.35 लाख करोड़ रुपये थी।
तिमाही के दौरान कंपनी की पेट्रोलियम उत्पादों की बिक्री 1.36 करोड़ टन रही, जो पिछले साल की समान अवधि में 1.38 करोड़ टन थी। वहीं रिफाइनरियों ने 1.01 करोड़ टन कच्चे तेल का प्रसंस्करण किया, जो एक साल पहले 1.04 करोड़ टन था।
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प्रेम अजय
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