‘ट्रांसफर प्राइसिंग’ विवादों से विकासशील देशों पर बोझ, मिलकर काम करें ब्रिक्स देश: सीतारमण

'ट्रांसफर प्राइसिंग' विवादों से विकासशील देशों पर बोझ, मिलकर काम करें ब्रिक्स देश: सीतारमण

‘ट्रांसफर प्राइसिंग’ विवादों से विकासशील देशों पर बोझ, मिलकर काम करें ब्रिक्स देश: सीतारमण
Modified Date: September 23, 2026 / 05:06 pm IST
Published Date: September 23, 2026 5:06 pm IST

नयी दिल्ली, 23 सितंबर (भाषा) वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बुधवार को ब्रिक्स देशों से अंतरराष्ट्रीय कराधान में संधि की व्याख्या और बहुपक्षीय वार्ताओं से जुड़े अपने अनुभव साझा करने का आग्रह करते हुए कहा कि ‘ट्रांसफर प्राइसिंग’ से जुड़े वैश्विक विवादों का विकासशील देशों पर असमान रूप से अधिक बोझ पड़ता है।

सीतारमण ने ब्रिक्स देशों के कर प्राधिकरणों के प्रमुखों की बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि भारत ने अंतरराष्ट्रीय कराधान एवं ट्रांसफर प्राइसिंग तथा राजस्व आंकड़ों पर दो नए कार्यसमूह बनाने का प्रस्ताव रखा है।

‘ट्रांसफर प्राइसिंग’ संबंधित कंपनियों के बीच वस्तुओं एवं सेवाओं के लेनदेन की कीमत तय करने से जुड़ी व्यवस्था है। बहुराष्ट्रीय कंपनियों के मामले में अलग-अलग देश यह सुनिश्चित करने का प्रयास करते हैं कि उनके अधिकार क्षेत्र में होने वाले मुनाफे के उचित हिस्से पर कर लगाया जाए।

इस वजह से कर-योग्य आय के बंटवारे को लेकर करदाताओं एवं कर अधिकारियों तथा विभिन्न देशों के कर अधिकारियों के बीच विवाद हो सकते हैं।

सीतारमण ने कहा कि ब्रिक्स अर्थव्यवस्थाएं बड़ी विकासशील अर्थव्यवस्थाएं हैं और अंतरराष्ट्रीय कर नियमों पर चल रही बातचीत में उनका दृष्टिकोण महत्वपूर्ण है।

उन्होंने कहा, ‘‘ट्रांसफर प्राइसिंग से जुड़े विवाद विकासशील देशों के कर प्रशासन पर असमान रूप से अधिक लागत डालते हैं।’’

वित्त मंत्री ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कर नियमों पर फिर से बातचीत चल रही है। इनमें ‘अंतरराष्ट्रीय कर सहयोग पर संयुक्त राष्ट्र प्रारूप सम्मेलन’ (यूएनएफसीआईटीसी) सहित कई बहुपक्षीय कर मुद्दों पर बातचीत सक्रिय रूप से जारी है। अगले कुछ वर्षों में इन प्रक्रियाओं में लिए जाने वाले फैसले आने वाली पीढ़ी के लिए सीमा-पार कराधान की व्यवस्था को प्रभावित करेंगे।

उन्होंने कहा कि प्रस्तावित कार्यसमूह ब्रिक्स देशों के साझा अनुभव के आधार पर काम करेंगे। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कर नियमों पर चल रही बातचीत और ब्रिक्स अर्थव्यवस्थाओं के लिए कराधान में निष्पक्षता के संदर्भ में इन कार्यसमूहों का महत्व अधिक है।

इसके साथ ही सीतारमण ने कहा कि दुनिया के कर प्रशासन कागज आधारित और व्यक्तिगत संपर्क पर निर्भर प्रक्रियाओं से अब डेटा आधारित और डिजिटल प्रणालियों की ओर बढ़ रहे हैं।

इस अवसर पर राजस्व सचिव अरविंद श्रीवास्तव ने कहा कि ब्रिक्स देशों के कर विशेषज्ञों ने दो दिन तक प्रस्तावित कार्यसमूहों के काम के दायरे की समीक्षा की है।

उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कराधान एवं ट्रांसफर प्राइसिंग कार्यसमूह संधि की व्याख्या, ट्रांसफर प्राइसिंग ऑडिट, अग्रिम मूल्य निर्धारण समझौते (एपीए) और आपसी सहमति प्रक्रिया (एमएपी) जैसे विषयों पर अनुभव साझा करने के लिए स्थायी ब्रिक्स मंच उपलब्ध कराएगा।

श्रीवास्तव ने कहा कि राजस्व आंकड़ों से जुड़ा कार्यसमूह ऐसा ढांचा तैयार करेगा जो ब्रिक्स देशों की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए राजकोषीय प्रदर्शन को मापने में मदद करेगा।

भाषा प्रेम

प्रेम अजय

अजय


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