सीसीआई ने केरलम सरकार की ‘प्रियदर्शिनी’ योजना के खिलाफ शिकायत खारिज की

सीसीआई ने केरलम सरकार की ‘प्रियदर्शिनी’ योजना के खिलाफ शिकायत खारिज की

सीसीआई ने केरलम सरकार की ‘प्रियदर्शिनी’ योजना के खिलाफ शिकायत खारिज की
Modified Date: September 9, 2026 / 04:19 pm IST
Published Date: September 9, 2026 4:19 pm IST

नयी दिल्ली, नौ सितंबर (भाषा) भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) ने केरलम सरकार और बस परिचालक केएसआरटीसी के खिलाफ ‘प्रियदर्शिनी योजना’ को लेकर दायर शिकायत खारिज कर दी है।

इस योजना के तहत राज्य में महिलाओं और ‘ट्रांसजेंडर’ को केएसआरटीसी की बसों में मुफ्त यात्रा की सुविधा दी जाती है। यह योजना जून से लागू हुई थी।

आयोग ने कहा कि जनकल्याणकारी योजना आम तौर पर प्रतिस्पर्धा कानून के तहत जांच के दायरे में नहीं आती।

दो निजी बस परिचालकों ने आरोप लगाया था कि यह योजना केवल केरल राज्य सड़क परिवहन निगम (केएसआरटीसी) की बसों तक सीमित है। योजना के कारण महिला यात्रियों का एक बड़ा हिस्सा निजी बसों से यात्रा नहीं कर रहा जिससे यात्रियों की संख्या और राजस्व में उल्लेखनीय कमी आई है।

दबदबे की स्थिति के कथित दुरुपयोग की शिकायत केरलम सरकार और केएसआरटीसी के खिलाफ दर्ज की गई थी।

भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) ने आठ सितंबर के छह पृष्ठ के आदेश में कहा, ‘‘किराया देने वाले यात्रियों के कथित नुकसान या राजस्व में कमी को अधिक से अधिक कल्याणकारी योजना के क्रियान्वयन से पैदा हुई व्यावसायिक प्रतिकूलता के रूप में देखा जा सकता है।’’

मामले के तथ्यों और आरोपों पर विचार करने के बाद हालांकि सीसीआई ने पाया कि सरकार द्वारा जनकल्याण के उद्देश्य से किसी कल्याणकारी योजना को तैयार करने और लागू करने पर आम तौर पर प्रतिस्पर्धा अधिनियम के तहत जांच नहीं की जाएगी।

सीसीआई बाजार में अनुचित कारोबारी गतिविधियों पर नजर रखता है और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने के लिए भी प्रयास करता है।

आयोग ने कहा, ‘‘यह तथ्य कि योजना यात्रियों की पसंद को प्रभावित कर सकती है, अपने आप में यह साबित नहीं करता कि प्रतिवादी ने निजी परिचालकों या उनके यात्रियों पर कोई अनुचित या भेदभावपूर्ण शर्त लगाई है।’’

सीसीआई ने पाया कि प्रतिस्पर्धा कानून के उल्लंघन का प्रथम दृष्टया कोई मामला नहीं बनता है और शिकायत खारिज कर दी।

भाषा निहारिका अजय

अजय


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