भारत में बन सकती हैं कई अरबों डॉलर मूल्य वाली वित्तीय प्रौद्योगिकी कंपनियां : रेजरपे सीईओ

भारत में बन सकती हैं कई अरबों डॉलर मूल्य वाली वित्तीय प्रौद्योगिकी कंपनियां : रेजरपे सीईओ

भारत में बन सकती हैं कई अरबों डॉलर मूल्य वाली वित्तीय प्रौद्योगिकी कंपनियां : रेजरपे सीईओ
Modified Date: September 9, 2026 / 03:28 pm IST
Published Date: September 9, 2026 3:28 pm IST

नयी दिल्ली, नौ सितंबर (भाषा) रेजरपे के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) हर्षिल माथुर ने बुधवार को कहा कि तत्काल भुगतान के क्षेत्र में भारत का नेतृत्व ऐसी कई अरब डॉलर की वित्तीय प्रौद्योगिकी कंपनियों के उभरने का रास्ता खोल सकता है, जो वैश्विक बाजारों में सेवाएं दे सकेंगी।

‘ग्लोबल फिनटेक फेस्ट 2026’ में एक सत्र के दौरान माथुर ने कहा कि इंटरनेट के क्षेत्र में अमेरिका के नेतृत्व के कारण वहां गूगल, अमेजन जैसी बड़ी प्रौद्योगिकी कंपनियां उभरीं। इसी तरह भारत के वित्तीय प्रौद्योगिकी (फिनटेक) परिवेश का लाभ स्थानीय कंपनियां उठा सकती हैं और वैश्विक स्तर पर बड़ी कंपनियों के रूप में उभर सकती हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘हमें गर्व है कि दुनिया में होने वाले सभी तत्काल भुगतान में से 49 प्रतिशत भारत के जरिये हो रहे हैं और यह अच्छी बात है। लेकिन मैं उम्मीद करता हूं कि दुनिया के दूसरे हिस्से भी इस वृद्धि का बड़ा लाभ उठाएं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘तत्काल भुगतान भारतीय कंपनियों के लिए दूसरे देशों में जाकर अपनी वृद्धि दर्ज करने का बड़ा अवसर पैदा करने वाला है। मेरा मानना है कि भारत से कई बड़ी, अरबों डॉलर की कंपनियां उभर सकती हैं क्योंकि वे दुनिया के दूसरे हिस्सों में अपनी वृद्धि का लाभ उठा सकेंगी।’’

माथुर ने कहा कि भारत के पास एक अनूठा अवसर है, जहां नीति-निर्माताओं और नियामकों ने बुनियादी ढांचा तैयार किया तथा निजी कंपनियों ने यूपीआई (यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस) जैसी प्रणालियों के आधार पर समाधान विकसित किए।

उन्होंने कहा कि किसी अन्य देश में इस तरह की व्यवस्था नहीं है।

माथुर ने कहा, ‘‘कार्ड की पहुंच अभी उतनी व्यापक नहीं है, जिससे भारत के सामने मौजूद एक बड़ी समस्या या स्थिति पैदा होती है। इसी स्थिति ने यूपीआई को आगे बढ़ाने और उसके विकास में मदद की। मेरा मानना है कि इन बाजारों में भी ऐसे ही कई तत्व मौजूद हैं।’’

व्यापार में कृत्रिम मेधा (एआई) का लाभ उठाने के बारे में पूछे जाने पर माथुर ने कहा कि हर नई प्रौद्योगिकी अपने साथ अवसर और जोखिम लेकर आती है।

माथुर ने कहा कि इंटरनेट ने भी अपनी तरह की कई चुनौतियां पैदा की थीं, लेकिन प्रौद्योगिकी के जरिये उनका समाधान किया गया।

उन्होंने कहा, ‘‘इसी तरह, जब कोई नई प्रौद्योगिकी जोखिम पैदा करती है तो उसका बेहतर समाधान भी प्रौद्योगिकी के जरिये ही किया जा सकता है। इसका मतलब यह नहीं है कि हम इसकी गति धीमी कर दें बल्कि हमें बचाव के लिए प्रौद्योगिकी विकसित करने के प्रयास भी तेज करने चाहिए।’’

भाषा निहारिका अजय

अजय


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