नोएल टाटा की शर्तों के कारण चंद्रशेखरन को अगला कार्यकाल देने पर फैसला टलाः सूत्र
नोएल टाटा की शर्तों के कारण चंद्रशेखरन को अगला कार्यकाल देने पर फैसला टलाः सूत्र
मुंबई, 24 फरवरी (भाषा) टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी टाटा संस के निदेशक मंडल में शीर्ष स्तर पर कुछ मतभेद होने की वजह से मंगलवार को चेयरमैन एन चंद्रशेखरन को तीसरे कार्यकाल के लिए नियुक्त करने का फैसला टाल दिया गया। सूत्रों ने यह जानकारी दी।
सूत्रों के मुताबिक, टाटा संस के निदेशक मंडल की बैठक में चंद्रशेखरन के मौजूदा कार्यकाल को बढ़ाने पर कोई फैसला नहीं लिया गया। इसके पीछे टाटा ट्रस्ट के चेयरमैन नोएल टाटा की तरफ से रखी गई कुछ शर्तों की अहम भूमिका रही।
सूत्रों के मुताबिक, चंद्रशेखरन का टाटा संस चेयरमैन के तौर पर मौजूदा कार्यकाल फरवरी, 2027 में खत्म होने वाला है जिसे आगे बढ़ाने पर निदेशक मंडल में चर्चा हो रही थी। इसी दौरान टाटा संस में 66 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाले टाटा ट्रस्ट के चेयरमैन नोएल टाटा ने पुनर्नियुक्ति को लेकर कुछ शर्तें रख दीं।
इसके अलावा नोएल टाटा ने समूह की कुछ कंपनियों में हो रहे नुकसान और टाटा संस द्वारा संभावित कर्ज वृद्धि पर चिंता जताई। उनका मानना था कि कर्ज बढ़ने की स्थिति में कंपनी को शेयर बाजार में सूचीबद्ध होना पड़ सकता है।
सूत्रों के मुताबिक, नोएल टाटा आने वाले समय में टाटा संस को शेयर बाजार में सूचीबद्ध किए जाने के भी पक्ष में नहीं हैं और इस संबंध में वह लिखित प्रतिबद्धता चाहते हैं।
यह बैठक समूह मुख्यालय ‘बॉम्बे हाउस’ में लंबी चली और पुनर्नियुक्ति के एजेंडा पर विस्तार से चर्चा हुई। अन्य निदेशकों- वेणु श्रीनिवासन, हरीश मनवानी, अनीता जॉर्ज और सौरभ अग्रवाल को इस प्रस्ताव पर कोई आपत्ति नहीं थी।
चंद्रशेखरन ने कथित तौर पर कहा कि बाजार सूचीबद्ध न होने का पक्का वचन देना नियामकीय परिस्थितियों को देखते हुए मुश्किल है। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के नियमों के तहत टाटा संस समेत 15 कंपनियों को 30 सितंबर, 2025 तक सूचीबद्ध होने का समय दिया गया था।
टाटा समूह ने इस अनिवार्यता से बचने के लिए ‘प्रमुख निवेश कंपनी’ का अपना पंजीकरण वापस लेने का आवेदन किया है, जिस पर अभी अंतिम निर्णय लंबित है। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा है कि पंजीकरण रद्द नहीं होने तक संस्था अपना काम जारी रख सकती है।
सूत्रों के मुताबिक, कुछ निदेशकों ने पुनर्नियुक्ति प्रस्ताव को मतदान के लिए रखने का सुझाव दिया, लेकिन चंद्रशेखरन ने इसे टालने का अनुरोध किया।
बैठक के बाद पत्रकारों से संक्षिप्त बातचीत में उन्होंने कहा, “मैंने इसे स्थगित करने की सिफारिश की क्योंकि एक निदेशक का यही अनुरोध था। टाटा संस के लिए कुछ भी नहीं बदला है।”
इस बात को लेकर स्पष्टता नहीं है कि अगली बोर्ड बैठक कब होगी। हालांकि, सूत्रों ने कुछ समाधान निकलने पर बैठक होने के संकेत दिए।
चंद्रशेखरन वर्ष 1987 में टाटा समूह से जुड़े थे और वह बाद में समूह की आईटी कंपनी टीसीएस के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) बने। फरवरी, 2017 में उन्हें टाटा संस का चेयरमैन नियुक्त किया गया था।
उनके कार्यकाल में समूह की 15 प्रमुख सूचीबद्ध कंपनियों का राजस्व और मुनाफा लगभग दोगुना हुआ है।
उनके नेतृत्व में समूह ने भारत की पहली स्वदेशी सेमीकंडक्टर विनिर्माण इकाई की योजना को आगे बढ़ाया, घाटे में चल रही एयर इंडिया का अधिग्रहण किया और कृत्रिम मेधा (एआई) से उपजे व्यवधानों के बीच टीसीएस के संचालन को दिशा दी।
वर्ष 1868 में जमशेदजी नुसेरवानजी टाटा द्वारा स्थापित यह समूह लंबे समय तक टाटा परिवार के नेतृत्व में रहा। रतन टाटा के 2012 में चेयरमैन पद से हटने के बाद शापूरजी पलोनजी समूह के साइरस मिस्त्री को कमान सौंपी गई थी। लेकिन वर्ष 2016 में निदेशक मंडल में मतभेद गहराने के बाद मिस्त्री को पद से हटा दिया गया था।
टाटा ट्रस्ट के पास 66 प्रतिशत हिस्सेदारी होने के कारण समूह के रणनीतिक और कामकाज संबंधी निर्णयों पर उसका निर्णायक प्रभाव रहता है।
टाटा संस उपभोक्ता वस्तुओं, वाहन, सूचना प्रौद्योगिकी और विमानन सहित करीब 30 परिचालन कंपनियों की होल्डिंग कंपनी है।
भाषा प्रेम
प्रेम अजय
अजय

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