चीनी प्रौद्योगिकी व निवेश का स्वागत, व्यापार खोलने में सावधानी जरूरी: सीआईआई अध्यक्ष

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चीनी प्रौद्योगिकी व निवेश का स्वागत, व्यापार खोलने में सावधानी जरूरी: सीआईआई अध्यक्ष

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  • Publish Date - June 23, 2026 / 03:04 PM IST,
    Updated On - June 23, 2026 / 03:04 PM IST

नयी दिल्ली, 23 जून (भाषा) भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के नवनियुक्त अध्यक्ष आर. मुकुंदन ने कहा है कि भारत में चीन के निवेश एवं प्रौद्योगिकी का स्वागत है, लेकिन उसके साथ व्यापार खोलने के मामले में देश को सतर्क और संतुलित दृष्टिकोण अपनाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि भारतीय उद्योग को चीन पर आयात निर्भरता कम करने और देश में ही विनिर्माण बढ़ाने के उपाय खोजने चाहिए।

आर. मुकुंदन ने पीटीआई-भाषा के साथ साक्षात्कार में कहा, ‘‘इस विषय पर विभिन्न पक्षों की मिली-जुली राय रही है, लेकिन मैं यह कहूंगा कि चीन से निवेश तथा प्रौद्योगिकी का स्वागत है। हालांकि, खुले व्यापार के मामले में हमें बहुत सावधानी और संतुलन के साथ आगे बढ़ना चाहिए।’’

भारत के चीन के साथ मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) पर विचार करने से जुड़े सवाल पर उन्होंने यह बात कही।

चीन वित्त वर्ष 2025-26 में अमेरिका को पीछे छोड़कर भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बन गया। इस दौरान द्विपक्षीय व्यापार 151.1 अरब डॉलर रहा।

गत वित्त वर्ष में चीन को भारत का निर्यात 36.66 प्रतिशत बढ़कर 19.47 अरब डॉलर हो गया, जबकि आयात 16 प्रतिशत बढ़कर 131.63 अरब डॉलर रहा। इस तरह व्यापार घाटा 2024-25 के 99.2 अरब डॉलर से बढ़कर 2025-26 में रिकॉर्ड 112.6 अरब डॉलर हो गया।

भारत पहले 16 सदस्यीय क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक साझेदारी (आरसीईपी) समूह का हिस्सा था, लेकिन नवंबर, 2019 में इससे बाहर हो गया। आरसीईपी में 10 आसियान देश और चीन शामिल हैं।

मुकुंदन ने कहा कि जिन क्षेत्रों में भारतीय कंपनियां चीन के साथ सहयोग बढ़ा सकती हैं उनमें बैटरी भंडारण, वाहन बैटरियों, सेमीकंडक्टर में उपयोग होने वाले विशेष रसायन तथा अन्य उन्नत प्रौद्योगिकी क्षेत्र शामिल हैं।

अमेरिका के साथ व्यापार समझौते पर उन्होंने कहा कि अमेरिका, भारतीय निर्यातकों के लिए सबसे बड़ा बाजार है और यह समझौता इसे और मजबूत करेगा।

भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते (बीटीए) पर बातचीत जारी है। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमीसन ग्रीर इस संबंध में वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के साथ अंतरिम व्यापार समझौते पर बातचीत करने के लिए भारत आए हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘ जब तक हमारी शुल्क दरें प्रतिस्पर्धी देशों के बराबर या उनसे बेहतर हैं, तब तक हम ठीक रहेंगे। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि हमें अन्य देशों के समान या थोड़ा बेहतर लाभ मिले और हम किसी भी तरह से नुकसान में न रहें।’’

सीआईआई अध्यक्ष की ये टिप्पणियां इसलिए महत्वपूर्ण मानी जाती हैं क्योंकि भारत अमेरिका के साथ व्यापार समझौते में आसियान, श्रीलंका और बांग्लादेश जैसे प्रतिस्पर्धी निर्यातक देशों के मुकाबले शुल्क में बढ़त हासिल करने की कोशिश कर रहा है।

प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) को आकर्षित करने के लिए उन्होंने सुझाव दिया कि सरकार को क्षेत्र-विशेष रणनीति अपनानी चाहिए, जिससे सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रिक वाहन और कृत्रिम मेधा (एआई) जैसे उच्च-विकास क्षेत्रों में प्रौद्योगिकी-आधारित निवेश को बढ़ावा मिले।

भाषा निहारिका अजय

अजय