नयी दिल्ली, 18 फरवरी (भाषा) जलवायु परिवर्तन के कारण बढ़ते तापमान और अनियमित मौसम का दुनिया के प्रमुख कॉफी उत्पादक क्षेत्रों पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। ऊंचे तापमान और सूखे की स्थिति से कॉफी की उपज घट रही है, जिससे इस लोकप्रिय पेय की कीमतें बढ़ रही हैं। एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है।
कॉफी दुनिया में सबसे ज्यादा पसंद की जाने वाली गैर-अल्कोहल पेय में से एक है। हर दिन लगभग 2.2 अरब कप कॉफी पी जाती है। अकेले अमेरिका में ही कम-से- कम दो-तिहाई वयस्क रोज कॉफी पीते हैं।
वैज्ञानिकों एवं जलवायु शोधकर्ताओं के ‘गैर-लाभकारी समूह’ क्लाइमेट सेंट्रल के एक विश्लेषण के मुताबिक, दुनिया की कॉफी आपूर्ति पर दबाव बढ़ रहा है और जलवायु परिवर्तन इसमें अहम भूमिका निभा रहा है।
क्लाइमेट सेंट्रल ने वर्ष 2021 से वर्ष 2025 तक के तापमान का विश्लेषण कर कार्बन प्रदूषण से रहित एक काल्पनिक दुनिया से उनकी तुलना की। विश्लेषण में हर साल उन अतिरिक्त दिनों की गिनती की गई, जब जलवायु परिवर्तन से बड़े कॉफी उत्पादक देशों में तापमान 30 डिग्री सेल्सियस से ऊपर चला गया।
इस रिपोर्ट में बताया गया है कि कम फसल और बढ़ी कीमतों का सबसे ज़्यादा असर छोटे कॉफी उत्पादकों पर पड़ता है।
दुनिया के शीर्ष पांच कॉफी उत्पादक देशों- ब्राजील, वियतनाम, कोलंबिया, इथियोपिया एवं इंडोनेशिया पर जलवायु परिवर्तन का दबाव बढ़ता जा रहा है। इन देशों की वैश्विक कॉफी आपूर्ति में करीब 75 प्रतिशत हिस्सेदारी है लेकिन अब औसतन वर्ष में 144 दिनों से अधिक समय तक ऐसी गर्मी झेल रहे हैं जो कॉफी की फसल के लिए नुकसानदेह है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि यदि जलवायु परिवर्तन का प्रभाव न होता तो ऐसे अत्यधिक गर्म दिनों की संख्या हर वर्ष लगभग 57 दिन कम होती। बढ़ता तापमान कॉफी पौधों की वृद्धि, फूल आने की प्रक्रिया और फल विकास को प्रभावित करता है।
इसके अलावा, बारिश के रुझान में बदलाव भी कॉफी की फसल के लिए अतिरिक्त जोखिम पैदा कर रहा है। सूखे की स्थिति में उत्पादन घट सकता है और किसानों की आय पर सीधा असर पड़ता है।
भाषा राजेश राजेश प्रेम
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