कोल इंडिया 2029-30 तक शोध एवं विकास पर 1,900 करोड़ रुपये खर्च करेगी

कोल इंडिया 2029-30 तक शोध एवं विकास पर 1,900 करोड़ रुपये खर्च करेगी

कोल इंडिया 2029-30 तक शोध एवं विकास पर 1,900 करोड़ रुपये खर्च करेगी
Modified Date: June 30, 2026 / 02:58 pm IST
Published Date: June 30, 2026 2:58 pm IST

नयी दिल्ली, 30 जून (भाषा) सार्वजनिक क्षेत्र की कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) खदानों की उत्पादकता बढ़ाने और उत्सर्जन घटाने के उद्देश्य से वित्त वर्ष 2029-30 तक शोध एवं विकास (आरएंडडी) गतिविधियों पर करीब 1,900 करोड़ रुपये का निवेश करेगी।

कंपनी ने मंगलवार को कहा कि इस पहल के तहत वह स्वच्छ कोयला प्रौद्योगिकियों का व्यावसायीकरण करने और बदलते ऊर्जा परिदृश्य के अनुरूप वैकल्पिक ऊर्जा क्षेत्रों की भी तलाश करेगी।

बीएसई को दी सूचना के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 में राष्ट्रीय कोयला एवं ऊर्जा अनुसंधान केंद्र की स्थापना के साथ उसकी आरएंडडी गतिविधियों को गति मिली। है।

इसके बाद कंपनी केवल अवधारणा-प्रमाण तक सीमित न रहकर अब ‘टेक्नोलॉजी रेडिनेस लेवल’ (टीआरएल)-4 और उससे ऊपर के स्तर के प्रोटोटाइप विकसित करने पर ध्यान केंद्रित कर रही है।

वित्त वर्ष 2024-25 में कंपनी का शोध एवं विकास पर खर्च बढ़कर 245 करोड़ रुपये हो गया, जो वर्ष 2023-24 में 61 करोड़ रुपये था।

कंपनी ने एर्गो एक्सर्जी (कनाडा) के साथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ईसीएल) में भूमिगत कोयला गैसीकरण परियोजना, एरिक्सन (स्वीडन) के साथ झांझरा भूमिगत खदान में 5जी प्रौद्योगिकी लागू करने तथा सीएसआईआरओ (ऑस्ट्रेलिया) के साथ संयुक्त अनुसंधान को आगे बढ़ाने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग भी किया है।

देश के कुल कोयला उत्पादन में कोल इंडिया की हिस्सेदारी 80 प्रतिशत से अधिक है।

भाषा निहारिका अजय

अजय


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