प्रतिस्पर्धा आयोग ने फ्रांस की शराब कंपनी पर्नोड रिकर्ड, सात अन्य के खिलाफ जांचच का आदेश दिया

प्रतिस्पर्धा आयोग ने फ्रांस की शराब कंपनी पर्नोड रिकर्ड, सात अन्य के खिलाफ जांचच का आदेश दिया

प्रतिस्पर्धा आयोग ने फ्रांस की शराब कंपनी पर्नोड रिकर्ड, सात अन्य के खिलाफ जांचच का आदेश दिया
Modified Date: May 10, 2026 / 03:44 pm IST
Published Date: May 10, 2026 3:44 pm IST

नयी दिल्ली, 10 मई (भाषा) भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) ने फ्रांस की प्रमुख शराब कंपनी पर्नोड रिकर्ड और सात अन्य इकाइयों के खिलाफ भारतीय निर्मित विदेशी शराब (आईएमएफएल) बाजार में कथित गठजोड़ बनाने और प्रतिस्पर्धा-रोधी गतिविधियों के आरोपों की विस्तृत जांच के आदेश दिए हैं।

जांच के दायरे में आई अन्य इकाइयों में इंडो स्पिरिट्स, पैथवे एचआर सॉल्यूशंस, यूनिवर्सल डिस्ट्रिब्यूटर्स, खाओ गली, बबली बेवरेजेज, शिव एसोसिएट्स और ऑगर्नोमिक्स इकोसिस्टम्स शामिल हैं।

आयोग ने पांच मई के अपने 26 पृष्ठ के आदेश में कहा कि प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि पर्नोड रिकर्ड ने दिल्ली के आईएमएफएल बाजार में अधिक हिस्सेदारी हासिल करने और अपने ब्रांड को बढ़ावा देने के लिए खुदरा तथा थोक विक्रेताओं के साथ प्रतिबंधात्मक समझौते किए।

सीसीआई के अनुसार, इस तरह का आचरण प्रतिस्पर्धा अधिनियम के तहत ‘विशिष्ट सौदे के लिए करार’ की श्रेणी में आता है और कानून का उल्लंघन हो सकता है।

मामले की शिकायत वर्ष 2024 में आयोग के समक्ष दायर की गई थी। अब आयोग के महानिदेशक (डीजी) मामले की विस्तृत जांच करेंगे। जांच में उन अधिकारियों और व्यक्तियों की भूमिका भी देखी जाएगी, जिनकी कथित गतिविधियों में सहमति या मिलीभगत रही हो।

आयोग ने कहा कि खुदरा विक्रेताओं को कथित रूप से कॉरपोरेट गारंटी देकर पर्नोड रिकर्ड के उत्पादों की बिक्री बढ़ाने का प्रयास प्रतिस्पर्धा पर प्रतिकूल असर डाल सकता है।

आदेश में कहा गया कि प्रतिस्पर्धी कंपनियों के उत्पादों की बिक्री सीमित करने वाले ऐसे समझौते खुदरा मांग को कृत्रिम रूप से पर्नोड रिकर्ड की ओर मोड़ सकते हैं, जिससे अन्य कंपनियों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

सीसीआई ने कहा कि इस प्रकार की व्यवस्था उपभोक्ताओं की पसंद सीमित कर सकती है। आयोग के अनुसार, कुछ खुदरा विक्रेताओं के साथ कथित समझौते आपूर्ति व्यवस्था को भी प्रभावित कर सकते हैं, जिसका असर अंततः मांग पर पड़ सकता है।

पर्नोड रिकर्ड के पास एब्सोल्यूट, शिवास रीगल और ग्लेनलिवेट जैसे ब्रांड हैं।

मामले में दो प्रमुख आरोप लगाए गए थे। पहला, दिल्ली आबकारी विभाग की निविदाओं में कथित बोली में हेरफेर और दूसरा, आबकारी नीति 2021-22 के संदर्भ में शराब निर्माताओं, थोक विक्रेताओं तथा खुदरा विक्रेताओं के बीच कथित गठजोड़ बनाना।

हालांकि, आयोग ने निविदाओं में कथित बोली में हेरफेर के संबंध में प्रथम दृष्टया पर्याप्त साक्ष्य नहीं पाए।

यह शिकायत कुल 41 इकाइयों के खिलाफ दायर की गई थी। जांच के बाद आयोग ने 34 इकाइयों के खिलाफ आरोपों को प्रथम दृष्टया उचित नहीं माना, जबकि सात इकाइयों के खिलाफ जांच जारी रखने का आदेश दिया।

भाषा अजय अजय पाण्डेय

पाण्डेय


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