उपभोक्ता संगठन की दवाओं, जरूरी वस्तुओं के एमआरपी में पारदर्शिता की मांग
उपभोक्ता संगठन की दवाओं, जरूरी वस्तुओं के एमआरपी में पारदर्शिता की मांग
नयी दिल्ली, 12 जून (भाषा) उपभोक्ता अधिकार संगठन अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत (एबीजीपी) ने दवाएं और आवश्यक जरूरी वस्तुओं सहित एमआरपी प्रणाली में अधिक नियमन और पारदर्शिता की शुक्रवार को मांग की।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से संबद्ध इस संगठन ने जंतर-मंतर पर धरना दिया एवं जन-जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया। इसने अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) तय करने की पारदर्शी प्रणाली, आवश्यक वस्तुओं व दवाओं पर लाभ की सीमा तय करने तथा उत्पादन लागत, वितरण लागत और लाभ ‘मार्जिन’ को उपभोक्ताओं के लिए सार्वजनिक करने की मांग की।
संगठन ने कहा कि वह सरकार को एक ज्ञापन सौंपेगा, जिसमें उपभोक्ताओं को अत्यधिक कीमतों से बचाने के उपाय करने की मांग की जाएगी।
अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत (एबीजीपी) ने समान रसायन वाली दवाओं की कीमतों में बड़े अंतर को नियंत्रित करने के लिए नीति बनाने और एक डिजिटल मूल्य-निगरानी प्रणाली विकसित करने की भी मांग की है।
एबीजीपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नारायणभाई शाह ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि वर्तमान एमआरपी प्रणाली में सुधार की आवश्यकता है ताकि उपभोक्ताओं को नुकसान न हो।
उन्होंने कहा, ‘‘ एमआरपी प्रणाली का मूल उद्देश्य उपभोक्ताओं को मनमानी कीमतों से बचाना था। उपभोक्ताओं को यह जानने का अधिकार है कि किसी उत्पाद की वास्तविक उत्पादन लागत क्या है और बाजार तक पहुंचने से पहले उस पर कितना लाभ जोड़ा गया है।’’
इस विरोध कार्यक्रम में देशभर से उपभोक्ता अधिकार कार्यकर्ता, सामाजिक संगठन और एबीजीपी के पदाधिकारी शामिल हुए।
एबीजीपी के राष्ट्रीय महासचिव जयंतभाई कथीरिया ने कहा कि पारदर्शिता की कमी विशेष रूप से दवा क्षेत्र में अधिक दिखाई देती है।
उन्होंने कहा, ‘‘ एक ही रासायनिक घटक वाली दवाएं अलग-अलग ब्रांड नामों के तहत बहुत अलग कीमतों पर बेची जाती हैं, जिससे मरीजों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ पड़ता है।’’
कथीरिया ने सरकार से दवा और आवश्यक वस्तुओं की मूल्य निर्धारण प्रणाली को अधिक पारदर्शी एवं जवाबदेह बनाने की अपील की।
संगठन ने मूल्य निर्धारण और उपभोक्ता संरक्षण से जुड़े मामलों में उपभोक्ता संगठनों को भी परामर्शदाता की भूमिका देने की मांग की।
एबीजीपी ने कहा कि पारदर्शी मूल्य प्रणाली उपभोक्ताओं को राहत देगी और बाजार में निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा, जवाबदेही और भरोसा बढ़ाएगी।
भाषा निहारिका रमण
रमण

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