उपभोक्ता अदालत ने फसल खराब होने के मामले में उर्वरक कंपनी को दोषमुक्त किया

उपभोक्ता अदालत ने फसल खराब होने के मामले में उर्वरक कंपनी को दोषमुक्त किया

उपभोक्ता अदालत ने फसल खराब होने के मामले में उर्वरक कंपनी को दोषमुक्त किया
Modified Date: June 11, 2026 / 06:27 pm IST
Published Date: June 11, 2026 6:27 pm IST

मुंबई, 11 जून (भाषा) महाराष्ट्र की एक उपभोक्ता अदालत ने जिला फोरम के उस आदेश को रद्द कर दिया है जिसमें एक उर्वरक कंपनी को प्याज की फसल खराब होने पर एक दर्जन से ज्यादा किसानों को मुआवजा देने के लिए कहा गया था। अदालत ने माना कि खराब पैदावार की वजह पर्यावरणीय कारण हो सकते हैं।

महाराष्ट्र राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने पिछले महीने जारी अपने आदेश में कहा कि उर्वरक कंपनी को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता क्योंकि एक राष्ट्रीय प्रयोगशाला ने इसकी गुणवत्ता को प्रमाणित किया था।

आयोग ने विनिर्माता ‘रामा कृषि रसायन’ और रिटेलर ‘पवार एग्रो सर्विसेज’ द्वारा नासिक जिला उपभोक्ता आयोग के वर्ष 2024 के फैसले के खिलाफ दायर अपील को मंजूरी दे दी।

नासिक जिले के कई किसानों ने अलग-अलग याचिकाएं दायर कर जिला उपभोक्ता आयोग का रुख किया था। उनका दावा था कि उन्होंने ‘पवार एग्रो सर्विसेज’ से खरीदा गया सुपर फॉस्फेट उर्वरक इस्तेमाल किया था, लेकिन इसके बावजूद उनकी प्याज की फसल खराब हो गई।

शिकायतों के बाद, तालुका स्तरीय शिकायत निवारण समिति ने 15 सितंबर, 2022 को एक सर्वे किया और 60-70 प्रतिशत फसल के नुकसान की रिपोर्ट दी।

जिला आयोग ने नासिक स्थित उर्वरक नियंत्रण प्रयोगशाला की शुरुआती रिपोर्ट के आधार पर, जिसमें नमूने को ‘मानक के अनुरूप नहीं’ बताया गया था, विनिर्माता और खुदरा विक्रेता को याचिकाकर्ताओं को मुआवजा देने का आदेश दिया था।

उर्वरक कंपनी ने राज्य आयोग में अपील दायर की और तर्क दिया कि किसानों ने ऐसा कोई सबूत पेश नहीं किया कि प्याज की खेती के लिए उसी कंपनी द्वारा बनाए गए उर्वरक का इस्तेमाल किया गया था।

कंपनी ने कहा कि तालुका शिकायत निवारण समिति की रिपोर्ट ‘बेबुनियाद’ थी और इसे कंपनी के प्रतिनिधियों की अनुपस्थिति में तैयार किया गया था क्योंकि उन्हें संयुक्त सर्वे के लिए नहीं बुलाया गया था।

राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग के समक्ष सुनवाई के दौरान, कंपनी ने नेशनल टेस्ट हाउस (ईआर), कोलकाता की एक रिपोर्ट पेश की, जिसमें पुष्टि की गई कि सुपर फॉस्फेट उर्वरक में गुणवत्ता संबंधी कोई समस्या नहीं थी।

राज्य आयोग ने गौर किया कि जिला आयोग उर्वरक कंपनी के तीसरे पक्ष द्वारा दोबारा जांच के लंबित अनुरोधों पर विचार करने में विफल रहा।

आयोग ने कहा कि अगर नेशनल टेस्ट हाउस की रिपोर्ट का इंतजार किया जाता, तो आदेश कुछ और होता।

इसके अलावा, आयोग ने गौर किया कि स्थानीय कृषि विभाग ने विनिर्माता को पहले से कोई सूचना दिए बिना ही शुरुआती जांच की थी।

भाषा राजेश राजेश अजय

अजय


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