एआई, नवीकरणीय ऊर्जा के समन्वय से बिजली लागत में आनी चाहिए गिरावटः अधिकारी
एआई, नवीकरणीय ऊर्जा के समन्वय से बिजली लागत में आनी चाहिए गिरावटः अधिकारी
नयी दिल्ली, 16 फरवरी (भाषा) नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय में संयुक्त सचिव जे वी एन सुब्रमण्यम ने सोमवार को कहा कि कृत्रिम मेधा (एआई) और नवीकरणीय ऊर्जा के समन्वय की वास्तविक सफलता तभी होगी जब उपभोक्ताओं के लिए बिजली की कुल लागत में कमी आए और औद्योगिक प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़े।
सुब्रमण्यम ने यहां आयोजित ‘एआई इम्पैक्ट शिखर सम्मेलन’ के एक सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि अगले दो-तीन वर्षों में एआई और नवीकरणीय ऊर्जा के इस एकीकरण का प्रभाव बिजली लागत और उपभोक्ता सशक्तीकरण पर नजर आना चाहिए।
उन्होंने कहा, “इसकी सफलता का पैमाना यही होगा कि लागत कम हो, उद्योग अधिक प्रतिस्पर्धी बने और उपभोक्ता ‘प्रोज्यूमर’ (यानी उत्पादन करने वाला उपभोक्ता) में बदल जाए।”
भारत ने नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की है और इसकी कुल स्थापित बिजली क्षमता लगभग 520 गीगावाट हो चुकी है। इसके अलावा, करीब 35 गीगावाट की वितरित नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता भी स्थापित की जा चुकी है।
सुब्रमण्यम ने कहा कि एआई खासकर वितरित नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र की तस्वीर बदलने वाला साबित हो सकता है।
हालांकि, उन्होंने कहा कि चुनौती वितरण प्रणालियों के प्रबंधन और देशभर में विकसित परिसंपत्तियों के रखरखाव में है।
इस अवसर पर विश्व बैंक में भारत, भूटान, बांग्लादेश और श्रीलंका के लिए वरिष्ठ सलाहकार हेमांग जानी ने कहा कि एआई को केवल प्रौद्योगिकी नहीं, बल्कि विकास की एक अवसंरचना के रूप में देखा जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि एआई की वजह से सीधे राजकोषीय अनुशासन या सुशासन नहीं आ सकता, लेकिन यह उन्हें सक्षम बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
भाषा प्रेम
प्रेम अजय
अजय

Facebook


