Odisha Anganwadi News : दलित थी रसोइया, तो पूरे गांव ने कर दिया बहिष्कार, 3 महीने तक आंगनवाड़ी में लटका रहा ताला, अचानक सांसद ने पहुंच कर दिया यह काम

ओडिशा के केंद्रपाड़ा जिले में दलित महिला को आंगनवाड़ी केंद्र में काम करने से रोकने वाले विवाद के बीच भाजपा सांसद बैजयंत पांडा ने स्वयं वहां जाकर महिला के हाथों का खाना खाया और समाज को भेदभाव के खिलाफ सशक्त संदेश दिया।

Odisha Anganwadi News : दलित थी रसोइया, तो पूरे गांव ने कर दिया बहिष्कार, 3 महीने तक आंगनवाड़ी में लटका रहा ताला, अचानक सांसद ने पहुंच कर दिया यह काम

Odisha Anganwadi News / Image Source : AI GENERATED

Modified Date: February 16, 2026 / 07:51 pm IST
Published Date: February 16, 2026 7:38 pm IST
HIGHLIGHTS
  • केंद्रपाड़ा के आंगनवाड़ी केंद्र में दलित महिला के काम करने पर विरोध।
  • विवाद के कारण सेंटर तीन महीनों तक बंद रहा।
  • भाजपा सांसद बैजयंत पांडा ने महिला के हाथों का भोजन खाकर भेदभाव के खिलाफ संदेश दिया।

केंद्रपाड़ाOdisha Anganwadi News  ओडिशा के केंद्रपाड़ा जिले से एक ऐसी घटना सामने आई जिसने सबको हैरान कर दिया। यहाँ के एक आंगनवाड़ी केंद्र में एक दलित महिला को खाना बनाने के लिए रखा गया था, लेकिन गांव के कुछ लोगों ने इसका विरोध शुरू कर दिया। यह विरोध इतना ज्यादा बढ़ गया कि माता-पिताओं ने अपने बच्चों को आंगनवाड़ी भेजना ही बंद कर दिया, जिसकी वजह से यह सेंटर पिछले तीन महीनों से बंद पड़ा था। इस मामले को शांत करने के लिए भाजपा सांसद बैजयंत पांडा खुद उस आंगनवाड़ी केंद्र पहुंच गए और वहां उसी दलित महिला के हाथों से बना भोजन खाया।

क्या है पूरा मामला ?

पूरा मामला राजनगर ब्लॉक के नुआगांव सेंटर का है। करीब चार महीने पहले, 24 नवंबर 2025 को एक ग्रेजुएट दलित महिला सरमिस्ता सेठी को यहाँ हेल्पर के तौर पर नियुक्त किया गया था। सरमिस्ता के काम संभालते ही गांव की एक कमेटी ने आपत्ति जताई और ऊंची जाति के लोगों ने बच्चों को सेंटर आने से रोक दिया। सरमिस्ता ने बताया कि उन्हें धमकियां भी दी गईं कि वे बच्चों के लिए खाना न बनाएं। Viral News  जब सरकारी अधिकारी इस विवाद को नहीं सुलझा पाए, तब भाजपा सांसद बैजयंत पांडा खुद उस आंगनवाड़ी केंद्र पहुंच गए और वहां उसी दलित महिला के हाथों से बना भोजन खाया।

सांसद ने दिया बड़ा संदेश

सांसद बैजयंत पांडा की इस पहल ने समाज को एक बहुत बड़ा संदेश दिया है कि छुआछूत और भेदभाव के लिए आधुनिक भारत में कोई जगह नहीं है। उनके इस कदम ने न केवल तीन महीने से चल रहे विवाद को खत्म करने की कोशिश की, बल्कि सरमिस्ता जैसी महिलाओं को सम्मान से काम करने का हौसला भी दिया।

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लेखक के बारे में

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