मुंबई, छह अगस्त (भाषा) भारतीय कॉरपोरेट बॉन्ड बाजार के जरिये जुटाया गया धन वित्त वर्ष 2025-26 में 8.4 प्रतिशत घटकर 9.1 लाख करोड़ रुपये रह गया। यह 2021-22 के बाद आई पहली गिरावट है। बाजार नियामक सेबी की वार्षिक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है।
रिपोर्ट के मुताबिक, कॉरपोरेट बॉन्ड के जरिये जुटाए गए कुल धन में गिरावट के बावजूद 2025-26 में बाजार सक्रिय रहा और कॉरपोरेट बॉन्ड निर्गमों की संख्या बढ़कर 1,967 हो गई।
हालांकि, बाजार अब भी निजी नियोजन पर अत्यधिक निर्भर है, जिसकी जुटाए गए कुल धन में 98.8 प्रतिशत हिस्सेदारी रही। सार्वजनिक निर्गमों के जरिये संसाधन जुटाने का आंकड़ा 39.2 प्रतिशत बढ़कर 11,343 करोड़ रुपये हो गया।
बॉन्ड बाजार में कुल 43 सार्वजनिक निर्गम हुए, जिनमें 40 वित्तीय क्षेत्र और तीन गैर-वित्तीय क्षेत्र की कंपनियों के थे।
आकार के लिहाज से 100 करोड़ से 500 करोड़ रुपये के निर्गमों के जरिये 50.1 प्रतिशत धन जुटाया गया, जबकि 500 करोड़ रुपये से अधिक के निर्गमों का हिस्सा 41.6 प्रतिशत रहा।
द्वितीयक बाजार में गतिविधि मजबूत रही। समाशोधन निगमों के जरिये कॉरपोरेट बॉन्ड कारोबार का मूल्य 27.9 प्रतिशत बढ़कर 21.2 लाख करोड़ रुपये हो गया। सूचीबद्ध बॉन्ड का कुल कारोबार में 89.5 प्रतिशत हिस्सा रहा।
बॉन्ड निवेशकों में म्यूचुअल फंड का दबदबा बढ़ा और उनकी हिस्सेदारी 32.1 प्रतिशत हो गई, जबकि बैंकों और कंपनियों की हिस्सेदारी घटकर क्रमशः 18.7 प्रतिशत और 9.4 प्रतिशत रह गई।
नगरपालिका बॉन्ड के जरिये भी 2025-26 में 1,756 करोड़ रुपये जुटाए गए, जो पिछले वर्षों की तुलना में काफी अधिक है। इसके अलावा, वाणिज्यिक पत्रों का मूल्य 7.8 प्रतिशत बढ़कर 16.68 लाख करोड़ रुपये हो गया।
भाषा प्रेम प्रेम अजय
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