अदालत ने धन शोधन मामले में रिलायंस पावर के पूर्व सीएफओ को जमानत देने से किया इनकार

अदालत ने धन शोधन मामले में रिलायंस पावर के पूर्व सीएफओ को जमानत देने से किया इनकार

अदालत ने धन शोधन मामले में रिलायंस पावर के पूर्व सीएफओ को जमानत देने से किया इनकार
Modified Date: June 11, 2026 / 01:54 pm IST
Published Date: June 11, 2026 1:54 pm IST

नयी दिल्ली, 11 जून (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने 68 करोड़ रुपये की कथित फर्जी बैंक गारंटी जारी करने से जुड़े धन शोधन के मामले में रिलायंस पावर लिमिटेड के पूर्व मुख्य वित्तीय अधिकारी (सीएफओ) को नियमित जमानत देने से इनकार कर दिया है।

न्यायमूर्ति मधु जैन ने बुधवार को अशोक कुमार पाल की जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत जांच किए जा रहे इस मामले में उन्हें राहत देने का कोई आधार नहीं बनता है।

अदालत ने आरोपों एवं उपलब्ध सामग्री पर विचार करते हुए कहा कि वह इस निष्कर्ष पर नहीं पहुंच सकती कि पाल के धन शोधन मामले में दोषी नहीं होने से जुड़े उचित आधार हैं।

यह मामला 68.2 करोड़ रुपये की बैंक गारंटी से जुड़ा है, जो रिलायंस पावर की अनुषंगी कंपनी रिलायंस एनयू बीईएसएस लिमिटेड की ओर से सोलर एनर्जी कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेकी) को दी गई थी जिसे ‘‘फर्जी’’ पाया गया।

न्यायमूर्ति जैन ने कहा कि पूर्व सीएफओ का यह दावा कि उन्हें कथित जालसाजी की जानकारी नहीं थी और उन्होंने केवल अपने आधिकारिक कर्तव्यों का पालन किया..इस पर मुकदमे के दौरान साक्ष्यों के आधार पर विचार किया जाएगा।

पाल ने यह भी तर्क दिया कि उनकी शिकायत के आधार पर ही मूल अपराध से संबंधित प्राथमिकी दर्ज हुई थी और उन्हें अपराध से कोई आय प्राप्त नहीं हुई।

अदालत ने कहा, ‘‘ आरोपों की प्रकृति और प्रवर्तन निदेशालय द्वारा प्रस्तुत सामग्री, जिसमें पीएमएलए की धारा 50 के तहत दर्ज बयान, दस्तावेजी साक्ष्य और जांच के दौरान एकत्रित इलेक्ट्रॉनिक संचार शामिल हैं.. उन्हें देखते हुए अदालत इस बात से आश्वस्त नहीं है कि यह मानने के लिए उचित आधार हैं कि आवेदक आरोपित अपराध का दोषी नहीं है।’’

उच्च न्यायालय ने कहा, ‘‘ इसलिए, पीएमएलए की धारा 45 के तहत जमानत के लिए निर्धारित दोहरी शर्तें इस चरण पर पूरी नहीं होती हैं। इसके मद्देनजर आवेदक नियमित जमानत का हकदार नहीं है।’’

पाल को ईडी ने 10 अक्टूबर, 2025 को गिरफ्तार किया था।

भाषा निहारिका

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