दिल्ली उपभोक्ता आयोग का मलेशिया एयरलाइंस को रिफंड, मेकमायट्रिप पर जुर्माना लगाने का आदेश

दिल्ली उपभोक्ता आयोग का मलेशिया एयरलाइंस को रिफंड, मेकमायट्रिप पर जुर्माना लगाने का आदेश

दिल्ली उपभोक्ता आयोग का मलेशिया एयरलाइंस को रिफंड, मेकमायट्रिप पर जुर्माना लगाने का आदेश
Modified Date: March 3, 2026 / 04:45 pm IST
Published Date: March 3, 2026 4:45 pm IST

नयी दिल्ली, तीन मार्च (भाषा) दिल्ली के एक उपभोक्ता मंच ने मलेशिया एयरलाइंस को शहर के एक निवासी को ब्याज सहित 65,802 रुपये वापस करने का निर्देश दिया है, जिनके रिश्तेदारों की यात्रा योजनाएं कोविड महामारी के दौरान टिकट रद्द होने के कारण बाधित हो गई थीं।

दिल्ली जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने सेवा में कमी और रिफंड एवं टिकट के पुनर्निर्धारण के संबंध में झूठे आश्वासन देने के लिए ‘मेकमायट्रिप’ पर भी जुर्माना लगाया है।

अध्यक्ष मोनिका ए श्रीवास्तव और सदस्य किरण कौशल की पीठ करण प्रदीप द्वारा दायर एक शिकायत पर सुनवाई कर रही थी। मामला मार्च, 2020 में दिल्ली से कुआलालंपुर और मनीला की यात्रा के लिए अक्टूबर, 2019 में बुक किए गए टिकटों के रद्द होने से संबंधित था। प्रदीप ने ये टिकट अपने भाई और भाभी को शादी के उपहार के रूप में दिए थे।

शिकायत के अनुसार मलेशिया एयरलाइंस की उदार नीति के बावजूद मेकमायट्रिप ने शुरुआत में टिकट पुनर्निर्धारित करने से इनकार कर दिया। बाद में 90 दिन में पूर्ण रिफंड का आश्वासन मिलने पर बुकिंग रद्द की गई, लेकिन 19 मार्च, 2020 को रिफंड प्रक्रिया शुरू होने के ईमेल के बावजूद राशि प्राप्त नहीं हुई।

प्रदीप ने आरोप लगाया कि रिफंड के लिए उन्हें एयरलाइन और बुकिंग मंच दोनों के चक्कर लगाने पड़े।

मेकमायट्रिप ने तर्क दिया कि टिकट रिफंड के लिए पात्र नहीं थे और शिकायत दर्ज करने की समयसीमा समाप्त हो चुकी थी। हालांकि, आयोग ने उच्चतम न्यायालय द्वारा महामारी के दौरान दी गई छूट का हवाला देते हुए इस आपत्ति को खारिज कर दिया।

आयोग ने कहा कि हालांकि महामारी एयरलाइन के नियंत्रण में नहीं थी लेकिन यात्रियों की गलती न होने पर वह राशि अपने पास नहीं रख सकती। आयोग ने मेकमायट्रिप के ‘मध्यस्थ’ होने के तर्क को भी खारिज किया।

आयोग ने दो फरवरी, 2026 के अपने आदेश में मलेशिया एयरलाइंस को मार्च, 2020 से छह प्रतिशत ब्याज के साथ 65,802 रुपये लौटाने को कहा। साथ ही, मेकमायट्रिप को सेवा में कमी के लिए 25,000 रुपये और दोनों संस्थाओं को मानसिक प्रताड़ना के मुआवजे के रूप में संयुक्त रूप से 30,000 रुपये का भुगतान करने का निर्देश दिया।

भाषा अजय सुमित

अजय


लेखक के बारे में