नियामकीय परिसंपत्तियों के मुद्दे पर दिल्ली सरकार ने बिजली वितरण कंपनियों के कैग ऑडिट के दिए आदेश

नियामकीय परिसंपत्तियों के मुद्दे पर दिल्ली सरकार ने बिजली वितरण कंपनियों के कैग ऑडिट के दिए आदेश

नियामकीय परिसंपत्तियों के मुद्दे पर दिल्ली सरकार ने बिजली वितरण कंपनियों के कैग ऑडिट के दिए आदेश
Modified Date: July 2, 2026 / 02:08 pm IST
Published Date: July 2, 2026 2:08 pm IST

नयी दिल्ली, दो जुलाई (भाषा) दिल्ली सरकार ने नियामकीय परिसंपत्तियों (आरए) के रूप में वर्षों से 38,500 करोड़ रुपये बकाया होने के मुद्दे पर तीन बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) का कैग से ऑडिट कराने का आदेश दिया है।

दिल्ली सरकार के बिजली विभाग द्वारा बुधवार को जारी आदेश के अनुसार, बीएसईएस राजधानी पावर लिमिटेड (बीआरपीएल), बीएसईएस यमुना पावर लिमिटेड (बीवाईपीएल) और टाटा पावर दिल्ली डिस्ट्रीब्यूशन लिमिटेड (टीपीडीडीएल) द्वारा वर्षों से नियामकीय परिसंपत्तियों की वसूली नहीं किए जाने के कारणों का कैग ‘‘ व्यापक एवं विस्तृत’’ ऑडिट करेगा।

आदेश में कहा गया कि ऑडिट का दायरा तथा जटिलता देखते हुए यदि कैग आवश्यक समझे तो अवधि बढ़ाई जा सकती है, लेकिन प्राथमिकता के आधार पर ऑडिट आदेश जारी होने की तारीख से तीन महीने के भीतर पूरा किया जाना चाहिए।

बिजली मंत्री आशीष सूद ने बृहस्पतिवार को कहा कि बिजली वितरण कंपनियों के कैग ऑडिट का औपचारिक आदेश दिल्ली के बिजली क्षेत्र में ‘‘पारदर्शिता, जवाबदेही एवं कामकाज सुधारों’’ की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है।

उन्होंने कहा कि यह दिल्ली के प्रत्येक बिजली उपभोक्ता और प्रत्येक ईमानदार करदाता की जीत है।

बीआरपीएल, बीवाईपीएल और टीपीडीडीएल को देय 38,500 करोड़ रुपये की राशि उपभोक्ताओं के बिजली बिल में शामिल नियामकीय परिसंपत्ति अधिभार के माध्यम से वसूली जानी है।

सूद ने कहा, ‘‘दिल्ली के लोगों को यह जानने का पूरा अधिकार है कि लगभग 38,500 करोड़ रुपये की नियामकीय परिसंपत्तियां लगातार कैसे बढ़ती गईं। इसका लाभ किसे मिला, जबकि इसका बोझ उपभोक्ताओं पर बना रहा। यह कैग ऑडिट इन सभी तथ्यों को सामने लाएगा।’’

उन्होंने कहा कि दिल्ली के किसी भी ईमानदार करदाता को किसी के ‘‘ निहित स्वार्थ, विशेष कृपा या गलत फैसलों’’ की कीमत नहीं चुकानी पड़ेगी और सार्वजनिक धन के प्रत्येक रुपये की रक्षा की जाएगी।

बिजली विभाग द्वारा जारी इस आदेश को दिल्ली के उपराज्यपाल की मंजूरी मिल चुकी है।

भाषा निहारिका वैभव

वैभव


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