Delhi State Electric Tariff Hike Order: राज्य में फिर महंगी होने वाली है बिजली.. भाजपा सरकार ने दी कंपनियों को बढ़ोतरी की इजाजत, जानें कितने फ़ीसदी होगा इजाफा
Delhi State Electric Tariff Hike Order: दिल्ली में बिजली होगी महंगी; डीईआरसी ने ईंधन, बिजली अधिभार में अतिरिक्त वृद्धि की दी अनुमति
Delhi State Electric Tariff Hike Order || Image- AI Generated File
- दिल्ली में बिजली बिल फिर बढ़ने की तैयारी
- डीईआरसी ने अतिरिक्त ईंधन अधिभार मंजूर किया
- बीएसईएस और टाटा पावर उपभोक्ताओं पर असर
नई दिल्ली: दिल्ली के लोगों को लगातार दूसरे महीने भी बिजली का ज्यादा बिल देना पड़ सकता है। (Delhi State Electric Tariff Hike Order) दिल्ली विद्युत विनियामक आयोग (डीईआरसी) ने बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) को बिजली बिल में अतिरिक्त ईंधन और बिजली खरीद समायोजन अधिभार (एफपीपीएएस) वसूलने की मंजूरी दे दी है। अधिकारियों ने सोमवार को इसकी जानकारी दी।
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इन कंपनियों के ग्राहकों पर पड़ेगा असर
डीईआरसी के आदेश के अनुसार, बीएसईएस राजधानी पावर लिमिटेड (बीआरपीएल) के ग्राहकों से 7.94 प्रतिशत, बीएसईएस यमुना पावर लिमिटेड (बीवाईपीएल) के ग्राहकों से 7.43 प्रतिशत और टाटा पावर दिल्ली डिस्ट्रीब्यूशन लिमिटेड (टीपीडीडीएल) के ग्राहकों से 2.21 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क लिया जाएगा।
बिजली कंपनियों का कहना था कि मई महीने में बिजली खरीदने की लागत काफी बढ़ गई थी। इसलिए उन्होंने डीईआरसी से अतिरिक्त राशि वसूलने की अनुमति मांगी थी।
क्यों बढ़ा अतिरिक्त शुल्क?
डीईआरसी के नियमों के अनुसार, सामान्य तौर पर एक बिल में एफपीपीएएस अधिकतम 10 प्रतिशत तक ही लिया जा सकता है। लेकिन इस बार आयोग ने बिजली कंपनियों को तय सीमा से अधिक अतिरिक्त शुल्क वसूलने की भी अनुमति दी है, ताकि बिजली खरीद पर बढ़े खर्च की भरपाई की जा सके।
आयोग के अनुसार, मई महीने के लिए एफपीपीएएस की गणना बीआरपीएल के लिए 25 प्रतिशत, बीवाईपीएल के लिए 19.91 प्रतिशत और टीपीडीडीएल के लिए 12.21 प्रतिशत तक पहुंची थी। (Delhi State Electric Tariff Hike Order) हालांकि, उपभोक्ताओं पर एक साथ अधिक बोझ न पड़े, इसलिए अतिरिक्त शुल्क अलग से लगाने की अनुमति दी गई है।
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अब कुल कितना अतिरिक्त शुल्क देना होगा?
डीईआरसी के आदेश के अनुसार, मई 2026 के लिए कुल एफपीपीएएस बीआरपीएल के ग्राहकों के लिए 17.94 प्रतिशत, बीवाईपीएल के लिए 17.43 प्रतिशत और टीपीडीडीएल के लिए 12.21 प्रतिशत होगा। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह व्यवस्था अगले आदेश तक हर महीने लागू रहेगी। यानी आने वाले महीनों में भी बिजली खरीद की लागत के आधार पर अतिरिक्त शुल्क तय किया जा सकता है, जिससे उपभोक्ताओं के बिजली बिल पर असर पड़ सकता है।
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