डीआरडीओ ने हल्के ‘बुलेटप्रूफ’ कांच के लिए सीजीसीआरआई से मिलाया हाथ

डीआरडीओ ने हल्के ‘बुलेटप्रूफ’ कांच के लिए सीजीसीआरआई से मिलाया हाथ

डीआरडीओ ने हल्के ‘बुलेटप्रूफ’ कांच के लिए सीजीसीआरआई से मिलाया हाथ
Modified Date: September 28, 2026 / 11:17 am IST
Published Date: September 28, 2026 11:17 am IST

कोलकाता, 28 सितंबर (भाषा) रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने बख्तरबंद वाहनों के लिए स्वदेशी उन्नत हल्का बुलेटप्रूफ कांच विकसित करने की 50 करोड़ रुपये की परियोजना के लिए प्रौद्योगिकी साझेदार के रूप में सीएसआईआर-केंद्रीय कांच एवं सिरेमिक अनुसंधान संस्थान (सीएसआईआर-सीजीसीआरआई) से हाथ मिलाया है।

इस चार साल की परियोजना को महाराष्ट्र स्थित नौसेना सामग्री अनुसंधान प्रयोगशाला (एनएमआरएल) और चंडीगढ़ स्थित टीबीआरएल समेत डीआरडीओ की प्रयोगशालाओं के साथ मिलकर आगे बढ़ाया जा रहा है। यह परियोजना उन्नत चरण में है और इसका उद्देश्य डीआरडीओ द्वारा चुने जाने वाले किसी उद्योग साझेदार के जरिये प्रौद्योगिकी को प्रयोगशाला स्तर के विकास से बड़े पैमाने पर विनिर्माण तक ले जाना है।

इस प्रौद्योगिकी का उद्देश्य आयातित पारदर्शी कवच का विकल्प तैयार करना और इसके वजन तथा मोटाई को 50 प्रतिशत तक कम करना है।

सीएसआईआर-सीजीसीआरआई के निदेशक बिक्रमजीत बसु ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘50 करोड़ रुपये की इस परियोजना का उद्देश्य रक्षा क्षेत्र में उपयोग के लिए उन्नत स्वदेशी बुलेटप्रूफ कांच प्रौद्योगिकी विकसित करना है। यह हमारी अनुसंधान एवं विकास क्षमताओं को सीधे देश की रणनीतिक जरूरतों से जोड़ती है।’’

कोलकाता स्थित सरकारी अनुसंधान संस्थान के अधिकारियों ने बताया कि परियोजना का लक्ष्य ऐसे उन्नत पारदर्शी ग्लास-सिरेमिक विकसित करना है, जो बख्तरबंद वाहनों में इस्तेमाल होने वाले पारंपरिक पारदर्शी कवच की तुलना में काफी हल्के एवं पतले होने के साथ कई गोलियों से सुरक्षा प्रदान कर सकें।

भाषा निहारिका

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