सोने पर शुल्क वृद्धि से आभूषण व्यापार को नुकसान होगा, तस्करी का खतरा बढ़ेगा: निर्यातक
सोने पर शुल्क वृद्धि से आभूषण व्यापार को नुकसान होगा, तस्करी का खतरा बढ़ेगा: निर्यातक
मुंबई, 13 मई (भाषा) सोने पर आयात शुल्क बढ़ाकर 15 प्रतिशत किए जाने के बाद रत्न एवं आभूषण उद्योग को आने वाले समय में चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। इससे अवैध बाजार और तस्करी को बढ़ावा मिलने की भी आशंका है।
निर्यातकों के अनुसार, आयात शुल्क में वृद्धि से आमतौर पर कीमतें बढ़ जाती हैं। हाल के समय में, सोने की कीमतें दोगुनी होने के बावजूद आयात में उसके अनुरूप कमी नहीं आई है। उनका मानना है कि ऐसे उपाय अकसर तस्करी को बढ़ावा देते हैं और निर्यात लागत को बढ़ाते हैं।
इसका सबसे गंभीर असर सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यम (एमएसएमई) विनिर्माताओं पर पड़ेगा जो ‘‘गंभीर नकदी संकट’’ का सामना कर रहे हैं।
अखिल भारतीय रत्न एवं आभूषण परिषद (जीजेसी) के चेयरमैन राजेश रोकड़े ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘ प्रधानमंत्री (नरेन्द्र मोदी) के मितव्ययिता उपायों और सर्राफा आयात शुल्क बढ़ने से कारोबार अब कठिन होने वाला है। उद्योग को आशंका है कि इससे अवैध बाजार और तस्करी को बढ़ावा मिलेगा…।’’
शुल्क बढ़ोतरी को समझाते हुए रोकड़े ने कहा कि अब सीमा शुल्क, माल एवं सेवा कर (जीएसटी) और कृषि उपकर को मिलाकर आयात शुल्क के कारण सोना पहले के 13,500 रुपये प्रति 10 ग्राम से बढ़कर लगभग 27,000 रुपये प्रति 10 ग्राम महंगा हो सकता है।
उन्होंने कहा कि जीजेसी ने हाल के नीतिगत निर्णयों पर विचार करने और आगे की रणनीति तय करने के लिए बुधवार को मुंबई में उद्योग की सभी संस्थाओं की बैठक बुलाई है।
जीजेसी के वाइस चेयरमैन अविनाश गुप्ता ने भी इसी तरह का विचार व्यक्त करते हुए कहा कि सोना और आभूषण भारत की अर्थव्यवस्था, परंपराओं और बचत संस्कृति से गहराई से जुड़े हुए हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘ इस समय व्यापार जगत के लिए यह महत्वपूर्ण है कि वे घबराहट से बचें और आत्मविश्वास एवं जिम्मेदारी के साथ अपना कारोबार जारी रखें। हम राष्ट्र की व्यापक आर्थिक प्राथमिकताओं का पूर्ण समर्थन करते हैं। कारीगरों, व्यापारियों तथा उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करते हुए इस क्षेत्र के दीर्घकालिक विकास एवं स्थिरता को सुनिश्चित करने के लिए हम नीति निर्माताओं के साथ रचनात्मक बातचीत के लिए प्रतिबद्ध हैं।’’
रत्न एवं आभूषण निर्यात संवर्धन परिषद (जीजेईपीसी) ने सरकार द्वारा सोने पर आयात शुल्क बढ़ाने के फैसले को स्वीकार करते हुए कहा कि एक उद्योग के रूप में, जीजेईपीसी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ‘‘राष्ट्र पहले’’ की भावना को लेकर प्रतिबद्ध है।
परिषद ने हालांकि स्थायी समाधान के लिए सरकार से उद्योग के हितधारकों के साथ बातचीत करने की अपील की है।
जीजेईपीसी के चेयरमैन किरीट भंसाली ने कहा, ‘‘ हमने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर सोने के आयात को कम करने और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के लिए अपने सदस्यों द्वारा उठाए गए सक्रिय कदमों की रूपरेखा प्रस्तुत की है। इनमें कम कैरेट के आभूषणों को बढ़ावा देना और उपभोक्ताओं को पुराने आभूषणों के बदले नए आभूषण लेने के लिए प्रोत्साहित करना शामिल है। हम स्वर्ण मुद्रीकरण योजना (जीएमएस) को बहाल करने पर एक विस्तृत दस्तावेज अलग से सरकार को सौंप रहे हैं।’’
जीजेईपीसी ने साथ ही कहा कि सोने पर आयात शुल्क बढ़ाने से आयात पर अंकुश नहीं लगता बल्कि कीमतें बढ़ती हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘ निर्यातकों को अब नामित एजेंसियों से प्रति किलोग्राम शुल्क-मुक्त सोने पर 28-30 लाख रुपये की बैंक गारंटी का सामना करना पड़ रहा है, जिससे कार्यशील पूंजी बुरी तरह अवरुद्ध हो रही है एवं निर्यात बाधित हो रहा है।’’
भंसाली ने कहा कि यह प्रतिगामी कदम एक महत्वपूर्ण समय में हमारे उद्योग की प्रतिस्पर्धात्मकता को कमजोर करने का जोखिम पैदा करता है।
उन्होंने कहा कि जीजेईपीसी ने सरकार से राजकोषीय लक्ष्यों को निर्यात वृद्धि के साथ संतुलित करने वाले स्थायी समाधानों पर बातचीत करने की अपील की है।
सरकार ने सोने और चांदी पर आयात शुल्क छह प्रतिशत से बढ़ाकर बुधवार को 15 प्रतिशत कर दिया। प्लैटिनम पर कर 6.4 प्रतिशत से बढ़ाकर 15.4 प्रतिशत कर दिया गया है। इसके परिणामस्वरूप सोने/चांदी के डोरे, सिक्के, अन्य वस्तुएं आदि पर भी कर में बदलाव किए गए हैं।
वित्त मंत्रालय की अधिसूचना के अनुसार, 13 मई से सामाजिक कल्याण अधिभार (एसडब्ल्यूएस) और कृषि अवसंरचना एवं विकास उपकर (एआईडीसी) में वृद्धि की गई है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के पश्चिम एशिया संकट के मद्देनजर विदेशी मुद्रा बचाने के लिए ईंधन के विवेकपूर्ण उपयोग, सोने की खरीद एवं विदेश यात्रा को स्थगित करने जैसे उपायों के आह्वान के बाद यह अधिसूचना जारी हुई है।
भाषा निहारिका मनीषा
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