एफडीआई का प्रवाह तेज करने के लिए प्रक्रियाओं में सुधार पर जोर: गोयल
एफडीआई का प्रवाह तेज करने के लिए प्रक्रियाओं में सुधार पर जोर: गोयल
ओसाका, 27 अगस्त (भाषा) वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने बृहस्पतिवार को कहा कि प्रक्रियाओं एवं नियमों में सुधार, अधिक कारगर केवाईसी मानदंड और मंजूरी प्रक्रिया को सुगम बनाने से भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) का प्रवाह तेज होगा और निवेशकों को अधिक सुविधा मिलेगी।
गोयल ने यहां पीटीआई-भाषा के साथ बातचीत में कहा कि कुछ ही क्षेत्रों में एफडीआई प्रतिबंधित है और सरकार निवेश व्यवस्था में और सुधार के लिए उद्योग से सुझाव लेने को तैयार है।
उन्होंने विदेशी निवेशकों के लिए कारोबारी सुगमता बढ़ाने के सरकारी प्रयासों के बारे में पूछे जाने पर कहा, ‘‘हमारा ध्यान प्रक्रियाओं और नियमों पर है। एफडीआई का प्रवाह तेज करने और निवेशकों को अधिक सुविधा देने के लिए प्रक्रियाओं और नियमों में सुधार की काफी गुंजाइश है।’’
उन्होंने कहा कि निवेश के लिए उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) या सरकार की मंजूरी जरूरी होने पर प्रक्रियाओं को तेज किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि ‘अपने ग्राहक को जानो’ (केवाईसी) के अधिक तेज एवं प्रभावी मानदंड अपनाए जा सकते हैं तथा दूसरे देशों के नियामकों के साथ आपसी मान्यता समझौते (एमआरए) किए जा सकते हैं, जिसके तहत एक-दूसरे की मंजूरियों को मान्यता दी जाए।
भारत ज्यादातर क्षेत्रों में स्वत: मंजूर मार्ग के तहत 100 प्रतिशत एफडीआई की अनुमति देता है। हालांकि, कुछ संवेदनशील क्षेत्रों एवं गतिविधियों में अंकुश हैं या सरकारी मंजूरी लेना जरूरी है।
सरकार एफडीआई माहौल को बेहतर बनाने के लिए उन निवेश प्रस्तावों की सीमा बढ़ाने पर भी विचार कर रही है, जिनके लिए आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए) की मंजूरी जरूरी होती है। इस सीमा को मौजूदा के 5,000 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 15,000 करोड़ रुपये करने का प्रस्ताव है।
भारत में एफडीआई वित्त वर्ष 2025-26 में 17 प्रतिशत बढ़कर 94.5 अरब अमेरिकी डॉलर हो गया।
गोयल ने कहा कि जापान में उद्योग और अन्य हितधारकों के साथ बातचीत के दौरान निवेश व्यवस्था में सुधार के कई नए सुझाव सामने आए हैं और सरकार इस प्रक्रिया को आगे भी जारी रखेगी।
भारत को व्यापक एवं प्रगतिशील ट्रांस-पैसिफिक साझेदारी समझौते (सीपीटीपीपी) का हिस्सा बनने के जापान के सुझाव पर गोयल ने कहा कि कई लोग इस पर विचार करने को कह रहे हैं, लेकिन सरकार ने अभी इस प्रस्ताव पर कुछ तय नहीं किया है।
उन्होंने कहा कि भारत का ध्यान फिलहाल द्विपक्षीय व्यापार समझौतों पर है। भारत इजराइल, चिली, पेरू, कनाडा, खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी), रूस की अगुवाई वाले यूरेशियाई आर्थिक संघ (ईएईयू) और दक्षिणी अफ्रीकी सीमा-शुल्क संघ (सैकू) समेत कई देशों एवं समूहों के साथ व्यापार समझौतों पर बातचीत कर रहा है।
विनिर्माण को बढ़ावा देने के बारे में गोयल ने कहा कि सरकार का प्रयास कच्चे माल से लेकर तैयार उत्पाद तक समूची मूल्य शृंखला में घरेलू उत्पादन बढ़ाने का है। उन्होंने कहा कि सेमीकंडक्टर क्षेत्र में केवल डिजाइन और परीक्षण पर ही नहीं, बल्कि पूरी मूल्य शृंखला भारत में लाने पर ध्यान दिया जा रहा है।
गोयल ने कहा कि ‘उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन’ (पीएलआई) योजनाओं का विस्तार नए क्षेत्रों में करने पर भी विचार जारी है। जिन क्षेत्रों में भारत को अन्य देशों की तुलना में लागत संबंधी नुकसान है और उसे उचित तरीके से दूर करने की जरूरत है, वहां सरकार पीएलआई देने पर विचार करेगी।
भाषा प्रेम
प्रेम अजय
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