ऊर्जा भंडारण प्रणाली क्षमता 2035-36 तक बढ़ाकर 888 गीगावाट-घंटा करने की जरूरतः रिपोर्ट

ऊर्जा भंडारण प्रणाली क्षमता 2035-36 तक बढ़ाकर 888 गीगावाट-घंटा करने की जरूरतः रिपोर्ट

ऊर्जा भंडारण प्रणाली क्षमता 2035-36 तक बढ़ाकर 888 गीगावाट-घंटा करने की जरूरतः रिपोर्ट
Modified Date: July 8, 2026 / 03:47 pm IST
Published Date: July 8, 2026 3:47 pm IST

नयी दिल्ली, आठ जुलाई (भाषा) भारत को वर्ष 2035-36 तक ऊर्जा भंडारण प्रणाली (ईएसएस) की क्षमता बढ़ाकर 888 गीगावाट-घंटा (जीडब्ल्यूएच) करनी होगी, जो फिलहाल करीब एक जीडब्ल्यूएच है। बुधवार को एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई।

इंडिया एनर्जी स्टोरेज अलायंस (आईईएसए) और कस्टमाइज्ड एनर्जी सॉल्यूशंस (सीईएस) की इस रिपोर्ट में कहा गया है कि ऊर्जा भंडारण अब ग्रिड की विश्वसनीयता मजबूत करने और नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्यों को हासिल करने का प्रमुख आधार बन चुका है। यह रिपोर्ट यहां आयोजित ‘इंडिया एनर्जी स्टोरेज वीक (आईईएसडब्ल्यू) 2026’ के दौरान जारी की गई।

आईईएसए के अध्यक्ष देबमाल्य सेन ने कहा कि वित्त वर्ष 2035-36 तक 888 जीडब्ल्यूएच क्षमता का लक्ष्य इस बात का संकेत है कि ऊर्जा भंडारण देश की ऊर्जा आकांक्षाओं के केंद्र में आ गया है। उन्होंने कहा कि आईईएसडब्ल्यू केवल उद्योग सम्मेलन न होकर भारत की स्वच्छ ऊर्जा यात्रा की प्रगति का प्रतीक है।

इस तीन-दिवसीय आयोजन में 15 देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए हैं और 200 से अधिक प्रदर्शक एवं 10,000 से अधिक उद्योग विशेषज्ञ शिरकत कर रहे हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, देश में बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली (बीईएसएस) की स्थापित क्षमता दिसंबर, 2025 के 0.78 जीडब्ल्यूएच से बढ़कर 2026 की पहली छमाही में 8.7 जीडब्ल्यूएच हो गई, जो छह महीने में 11 गुना वृद्धि दर्शाती है। वर्ष के अंत तक इसके 10 जीडब्ल्यूएच से अधिक हो जाने का अनुमान है।

पहली छमाही में 47 जीडब्ल्यूएच के ईएसएस निविदाएं जारी की गईं, जिससे कुल निविदा पाइपलाइन 260 जीडब्ल्यूएच तक पहुंच गई। अब तक 18 बीईएसएस परियोजनाएं चालू हो चुकी हैं और 2026 की पहली छमाही में क्षमता वृद्धि का 70 प्रतिशत हिस्सा मर्चेंट परियोजनाओं से आया है।

रेडिएंस रिन्यूएबल्स के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) नितिन भाटिया ने कहा कि सौर ऊर्जा के साथ बैटरी भंडारण भविष्य का रास्ता है।

ग्लोबल एनर्जी अलायंस फॉर पीपल एंड प्लेनेट की भारत प्रमुख तान्या सिंघल ने कहा कि मजबूत और लचीली ग्रिड के लिए उत्पादन से लेकर खपत तक हर स्तर पर ऊर्जा भंडारण का एकीकरण जरूरी है।

रिपोर्ट के मुताबिक, देश में लिथियम-आयन बैटरी सेल विनिर्माण क्षमता फिलहाल करीब दो जीडब्ल्यूएच है, जिसे वर्ष 2030 तक बढ़ाकर लगभग 110 जीडब्ल्यूएच करने की योजना है। पैक से कंटेनर क्षमता 180-200 जीडब्ल्यूएच तक पहुंचने की उम्मीद है।

इस अवसर पर पेस डीजिटेक के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक वेणुगोपाल राव मद्दिसेट्टी ने कहा कि ऊर्जा भंडारण अब अनिवार्य राष्ट्रीय अवसंरचना बन गया है, जो नवीकरणीय ऊर्जा को उपयोग के अनुरूप उपलब्ध कराने, ग्रिड स्थिरता बढ़ाने और प्रणाली की मजबूती सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभाता है।

भाषा प्रेम

प्रेम अजय

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