(EPF Withdrawal Rules/ Image Credit: AI-generated)
नई दिल्ली: EPF Withdrawal Rules: कर्मचारियों के लिए पीएम से जुड़ी प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए ईपीएफओ (EPF Withdrawal Rules) ने कई बदलाव किए हैं। अब नौकरी छूटने, इस्तीफा देने या जरूरत पड़ने पर पीएफ से पैसा निकालना पहले के मुकाबले आसान होगा। EPFO 3.0 के तहत आंशिक निकासी के लिए पहले मौजूद 13 अलग-अलग शर्तों और कैटेगरी को घटाकर तीन प्रमुख श्रेणियों में बांटा गया है। इसका मकसद कर्मचारियों को जरूरत के समय बिना ज्यादा परेशानी के अपने पीएफ का इस्तेमाल करने की सुविधा देना है।
नई व्यवस्था में पीएफ निकासी (EPF Withdrawal Rules) को तीन प्रमुख कैटेगरी में रखा गया है। पहली कैटेगरी इमरजेंसी है, जिसमें परिवार के किसी सदस्य की गंभीर बीमारी का इलाज, बच्चों की उच्च शिक्षा और परिवार में शादी जैसे जरूरी खर्च शामिल हैं। दूसरी कैटेगरी घर की जरूरतों से जुड़ी है। इसके तहत घर खरीदने, मकान बनाने या उसकी मरम्मत कराने और होम लोन चुकाने के लिए पीएफ से पैसा निकाला जा सकता है। तीसरी कैटेगरी विशेष परिस्थितियां है। इसके तहत सदस्य बिना कोई खास कारण बताए अपने पीएफ बैलेंस का 75 फीसदी तक हिस्सा निकाल सकेंगे।
अगर किसी कर्मचारी की नौकरी चली जाती है या वह खुद इस्तीफा दे देता है तो अब बेरोजगारी की स्थिति में कुल पीएफ बैलेंस (EPF Withdrawal Rules) का 75 फीसदी हिस्सा तुरंत निकाला जा सकेगा। बची हुई 25 फीसदी राशि 12 महीने तक लगातार बेरोजगार रहने के बाद निकाली जा सकेगी। पहले नियम के मुताबिक दो महीने तक बेरोजगार रहने के बाद कर्मचारी पूरा 100 फीसदी पीएफ निकाल सकता था। नए बदलाव का उद्देश्य कर्मचारियों के भविष्य की आर्थिक सुरक्षा को भी बनाए रखना है।
पीएफ निकालने के लिए सबसे पहले EPFO Member Portal पर UAN और पासवर्ड की मदद से लॉगिन करें। इसके बाद यह जांच लें कि नौकरी छोड़ने की तारीख पोर्टल पर अपडेट है। फिर Online Services में जाकर Claim (Form-31, 19, 10C) विकल्प चुनें। बैंक खाते के आखिरी चार अंक वेरिफाई करने के बाद जरूरत के अनुसार फॉर्म चुनें। पूर्ण निकासी के लिए Form 19 और पेंशन से जुड़ी निकासी के लिए Form 10C का विकल्प दिया जाता है। इसके बाद आधार से जुड़े मोबाइल नंबर पर आए OTP को दर्ज करके क्लेम सबमिट करें। जानकारी सही होने पर पैसा निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने के बाद बैंक खाते में पहुंच जाता है।