सिगरेट पर उत्पाद शुल्क बढ़ोतरी से स्वास्थ्य प्रभाव के अनुरूप कर बोझ होगा सुनिश्चित
सिगरेट पर उत्पाद शुल्क बढ़ोतरी से स्वास्थ्य प्रभाव के अनुरूप कर बोझ होगा सुनिश्चित
नयी दिल्ली, एक जनवरी (भाषा) सिगरेट पर एक फरवरी से उत्पाद शुल्क में वृद्धि यह सुनिश्चित करेगी कि ऐसे हानिकारक उत्पादों पर उनके गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रभाव के अनुरूप कर बोझ पड़े और तंबाकू कराधान वैश्विक मानकों के अनुरूप हो। सूत्रों ने यह जानकारी दी।
वित्त मंत्रालय ने एक फरवरी से सिगरेट की लंबाई के आधार पर प्रति 1,000 ‘स्टिक’ पर 2,050 रुपये से 8,500 रुपये तक का उत्पाद शुल्क लागू होने की जानकारी दी है। यह शुल्क अधिकतम 40 प्रतिशत माल एवं सेवा कर (जीएसटी) के अतिरिक्त होगा।
सिगरेट पर वर्तमान में 28 प्रतिशत जीएसटी और अलग-अलग दरों पर क्षतिपूर्ति उपकर लगता है। जुलाई 2017 में जीएसटी लागू होने के बाद से पिछले सात वर्ष में सिगरेट पर कर का स्तर स्थिर रहा है।
यह वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं व सार्वजनिक स्वास्थ्य दिशानिर्देशों के विपरीत है जो सिगरेट की कीमतों को आय से अधिक तेजी से बढ़ाने के लिए वार्षिक रूप से शुल्क बढ़ाने पर जोर देते हैं।
वैश्विक स्तर पर 80 से अधिक देश हर साल तंबाकू करों में संशोधन करते हैं। इनमें से कई इस संशोधन के लिए महंगाई के प्रभाव का आकलन करते हैं या बहु-वर्षीय उत्पाद शुल्क अनुसूचियों का उपयोग करते हैं। जीएसटी लागू होने से पहले, भारत में भी सिगरेट पर उत्पाद शुल्क में वार्षिक वृद्धि की जाती थी।
सूत्रों ने बताया कि वैश्विक संदर्भ में बुनियादी उत्पाद शुल्क और उपकर दरों में संशोधन न करने का भारत का सात साल का विराम एक अपवाद है।
उन्होंने कहा कि नियमित समायोजन के बिना, तंबाकू कर का सार्वजनिक स्वास्थ्य पर प्रभाव तेजी से कम हो जाता है।
सूत्रों ने कहा कि सिगरेट पर उत्पाद शुल्क में संशोधन यह सुनिश्चित करेगा कि सिगरेट पर कर का भार उनके गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रभावों के अनुपात में बना रहे। साथ ही राजकोषीय स्थिरता को बनाए रखे।
उन्होंने कहा कि देश में सिगरेट पर मौजूदा कर का बोझ न तो अत्यधिक है और न ही वैश्विक सार्वजनिक स्वास्थ्य मानकों के अनुरूप है।
विश्व बैंक के अनुमानों के अनुसार, भारत में सिगरेट पर कुल कर खुदरा मूल्य का करीब 53 प्रतिशत है जो तंबाकू की खपत में सार्थक कमी लाने के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा अनुशंसित 75 प्रतिशत या उससे अधिक के मानक से काफी कम है।
सूत्रों ने कहा कि इसकी तुलना में भारत की मौजूदा दर अब भी अपेक्षाकृत कम है जिससे वैश्विक मानकों से हटे बिना चरणबद्ध बढ़ोतरी के लिए पर्याप्त राजकोषीय और सार्वजनिक स्वास्थ्य संबंधी गुंजाइश बनी हुई है।
उन्होंने कहा कि उच्च शुल्क सिगरेट को अधिक किफायती होने से रोकेंगे। वह भी ऐसे समय में जब तंबाकू से संबंधित बीमारियों का आर्थिक बोझ सालाना 24 लाख करोड़ रुपये से अधिक होने का अनुमान है।
भाषा निहारिका रमण
रमण

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