निकट भविष्य में बाहरी झटकों से वृद्धि पर नकारात्मक प्रभाव पड़ने का जोखिम: वित्त मंत्रालय

निकट भविष्य में बाहरी झटकों से वृद्धि पर नकारात्मक प्रभाव पड़ने का जोखिम: वित्त मंत्रालय

निकट भविष्य में बाहरी झटकों से वृद्धि पर नकारात्मक प्रभाव पड़ने का जोखिम: वित्त मंत्रालय
Modified Date: March 28, 2026 / 09:07 pm IST
Published Date: March 28, 2026 9:07 pm IST

नयी दिल्ली, 28 मार्च (भाषा) देश में निकट भविष्य का परिदृश्य अनिश्चित बना हुआ है। बाहरी झटके विशेष रूप से पश्चिम एशिया संकट, कच्चे माल की उच्च लागत और संभावित आपूर्ति बाधाएं वृद्धि के लिए जोखिम पैदा कर रही हैं। वित्त मंत्रालय ने शनिवार को एक रिपोर्ट में यह कहा।

हालांकि रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि मजबूत वृहद आर्थिक बुनियाद और ठोस घरेलू मांग प्रभाव को कम करने में मदद कर सकते हैं।

वित्त मंत्रालय के आर्थिक मामलों के विभाग द्वारा जारी मार्च माह की मासिक आर्थिक समीक्षा के अनुसार वैश्विक घटनाओं ने भारत के लिए जटिल और बहुस्तरीय जोखिम पैदा कर दिए हैं। इसका कारण देश एक प्रमुख ऊर्जा आयातक होने के साथ-साथ पश्चिम एशिया क्षेत्र के साथ मजबूत व्यापार, निवेश और धन प्रेषण का जुड़ाव है।

इसमें कहा गया , ‘हालांकि भारत के अपेक्षाकृत मजबूत वृहद आर्थिक बुनियाद और निरंतर नीतिगत प्रयास मजबूती प्रदान करते हैं, लेकिन बदलती स्थिति के लिए गहन निगरानी और सुविचारित नीतिगत प्रतिक्रियाओं की आवश्यकता है।’

रिपोर्ट के अनुसार ऊर्जा विविधीकरण, कृषि क्षेत्र में तैयारी, मुद्रास्फीति की स्थिति, बाह्य क्षेत्र की मजबूती और नीतिगत उपायों के जरिये सरकार के हस्तक्षेप आर्थिक प्रणाली की क्षमता को मजबूत करता है ताकि वैश्विक घटनाओं से उत्पन्न होने वाले अल्पकालिक व्यवधानों को सहन किया जा सके। इसके साथ ही, बदलती परिस्थितियों को देखते हुए सतत निगरानी और समायोजित प्रतिक्रिया बनाए रखना भी महत्वपूर्ण है।

इसमें कहा गया कि इन उपायों और मौजूदा आर्थिक सुरक्षा पहल के साथ कुछ सहारा मिलने के बावजूद, जोखिमों का संतुलन नकारात्मक दिशा में बना हुआ है। ऐसे हालात में, लगातार सतर्कता बनाए रखना और सक्रिय नीतिगत कदम उठाना आवश्यक होगा ताकि बदलती वैश्विक अनिश्चितताओं के प्रभाव को कम किया जा सके।

हाल में तेल की कीमतों में उछाल मध्यम अवधि में महंगाई के लिए जोखिम पैदा करता है, क्योंकि ऊंची ऊर्जा लागत विशेष रूप से ईंधन-निर्भर क्षेत्रों में धीरे-धीरे घरेलू कीमतों में तेजी के रूप में बदलती है।

रिपोर्ट में कहा गया कि अगर तेल और गैस की कीमतें लगातार बढ़ती रही, तो इससे विभिन्न क्षेत्रों में लागत बढ़ने के और प्रभाव पड़ सकते हैं। इसके बावजूद, सरकार सतर्क है और घरेलू ऊर्जा की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने तथा संभावित महंगाई दबाव को कम करने के लिए उपाय कर रही है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि वैश्विक कच्चे तेल की ऊंची कीमतें भी वस्तु व्यापार संतुलन के लिए जोखिम पैदा करती हैं, जबकि बाहर से भेजे जाने वाले पैसे (धन प्रेषण) को लेकर दृष्टिकोण भी संवेदनशील बना हुआ है क्योंकि खाड़ी सहयोग परिषद की अर्थव्यवस्थाओं का वित्त वर्ष 2023-24 में भारत के कुल धन प्रेषण में लगभग 38 प्रतिशत हिस्सा था।

इसमें कहा गया कि तेजी से अनिश्चित होते वैश्विक परिवेश में, भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती ठोस घरेलू बुनियाद पर निर्भर करेगा।

रिपोर्ट में कहा गया कि आर्थिक वृद्धि को मजबूत बनाए रखने के लिए लगातार संरचनात्मक सुधारों पर ध्यान देना जरूरी होगा, ताकि प्रतिस्पर्धा बढ़े, कार्यकुशलता बढ़े और निवेश को बढ़ावा मिले। साथ ही, बदलती वैश्विक परिस्थितियों से निपटने और विकास को बनाए रखने के लिए तैयारी, नीति समन्वय और घरेलू क्षमता बढ़ाने पर भी जोर देना महत्वपूर्ण है।

भाषा योगेश रमण

रमण

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