मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के दखल के बाद एफसीआई दिल्ली में गेहूं खरीदेगा
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के दखल के बाद एफसीआई दिल्ली में गेहूं खरीदेगा
नयी दिल्ली, 21 अप्रैल (भाषा) दिल्ली सरकार ने मंगलवार को कहा कि मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के दखल के बाद, भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) द्वारा दिल्ली में गेहूं की खरीद पांच साल के अंतराल के बाद फिर से शुरू होगी।
मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) द्वारा बयान में कहा गया है कि गेहूं की स्थानीय खरीद 24 अप्रैल से नरेला और नफ़जगढ़ मंडियों में शुरू होगी जिससे शहर में सार्वजनिक वितरण प्रणाली मज़बूत होगी।
बयान के अनुसार, गुप्ता ने इस मामले में दखल देते हुए केंद्र सरकार से एफसीआई के ज़रिए गेहूं खरीदने का आग्रह किया था, जिसे वर्ष 2021 में रोक दिया गया था। केंद्र सरकार ने इस अनुरोध को मान लिया है।
बयान के अनुसार, दिल्ली में वित्तवर्ष 2021-22 के बाद एफसीआई द्वारा न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर गेहूं की खरीद फिर से शुरू की जा रही है।
राजधानी में लगभग 29,000 हेक्टेयर ज़मीन पर खेती होती है और यहां हर साल लगभग 80,000 टन गेहूं का उत्पादन होता है, जो स्थानीय खपत से ज़्यादा है और बाज़ार में बेचने के लिए अतिरिक्त गेहूं बच जाता है।
इस पहल से दिल्ली के लगभग 21,000 किसानों को सीधे तौर पर फ़ायदा होने की उम्मीद है। किसानों को खरीद केंद्रों पर अपनी फ़सल बेचने के लिए अपना आधार कार्ड, ज़मीन के कागज़ात और बैंक पासबुक साथ लाना होगा।
बयान में कहा गया है कि सरकार जल्द ही गांव-वार खरीद का कार्यक्रम घोषित करेगी।
मुख्यमंत्री ने इस कदम के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केंद्र सरकार का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह किसानों के कल्याण और उनकी आय की सुरक्षा के प्रति मज़बूत प्रतिबद्धता को दर्शाता है और किसानों के हितों को प्राथमिकता देने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम है।
उन्होंने कहा, ‘‘केंद्र और दिल्ली सरकार के बीच तालमेल से किए गए प्रयासों से, राजधानी के किसान अपनी उपज का उचित मूल्य पा सकेंगे और आर्थिक रूप से और अधिक सशक्त बन सकेंगे।’’
हाल में केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्री प्रह्लाद जोशी को लिखे एक पत्र में, गुप्ता ने चल रहे रबी विपणन सत्र के दौरान दिल्ली में गेहूं की खरीद तत्काल फिर से शुरू करने का आग्रह किया था।
अपने पत्र में, गुप्ता ने इस बात की ओर ध्यान दिलाया कि स्थानीय स्तर पर खरीद न होने के कारण किसानों को अपनी उपज न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से कम कीमत पर बेचने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है, जिसका उनकी आय पर बुरा असर पड़ रहा है।
गुप्ता ने कहा कि स्थानीय स्तर पर खरीदे गए गेहूं को सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) में आसानी से शामिल किया जा सकता है, जिससे खाद्य सुरक्षा ढांचा और मजबूत होगा। साथ ही, अनाज के अनावश्यक बाहरी परिवहन पर रोक लगाने से स्थानीय बाजारों में संतुलन बनाए रखने और आपूर्ति श्रृंखला की कार्यक्षमता को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।
भाषा राजेश राजेश नोमान
नोमान

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