बाजार की उम्मीद से कम रह सकती है एफसीएनआर जमा, रुपये में बनी रहेगी गिरावटः बार्कलेज
बाजार की उम्मीद से कम रह सकती है एफसीएनआर जमा, रुपये में बनी रहेगी गिरावटः बार्कलेज
मुंबई, 16 जुलाई (भाषा) विदेशी मुद्रा अनिवासी (एफसीएनआर) जमा में आमद आने वाले हफ्तों में रफ्तार पकड़ने के बावजूद बाजार की ऊंची अपेक्षाओं से कम रह सकती है। बार्कलेज रिसर्च ने बृहस्पतिवार को एक रिपोर्ट में यह बात कही।
वैश्विक ब्रोकरेज कंपनी की इस रिपोर्ट के मुताबिक, कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और आयातकों की डॉलर मांग मजबूत रहने के बीच रुपये में क्रमिक रूप से गिरावट आने की आशंका है।
बार्कलेज ने कहा, ‘‘भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने हाल में वाणिज्यिक बैंकों के साथ बैठक की और एफसीएनआर जमा योजना की प्रगति की समीक्षा की। अब तक जमा में आमद उम्मीद से कम रही है। बैंकों का कहना है कि आगे इसमें तेजी आएगी लेकिन हमारा मानना है कि कई कारणों से कुल आमद बाजार की ऊंची उम्मीदों से कम रह सकती है।’’
आरबीआई और सरकार ने जून की शुरुआत में देश में पूंजी प्रवाह बढ़ाने के लिए कई उपायों की घोषणा की थी। इनमें एफसीएनआर (बी) से जुड़े उपाय भी शामिल थे जिसके तहत अनिवासी भारतीय, भारतीय बैंकों में विदेशी मुद्रा में सावधि जमा खोल सकते हैं।
इन उपायों की घोषणा के बाद एफसीएनआर जमा के जरिये कम-से-कम 50 अरब डॉलर की आमद की उम्मीद जताई गई। कुछ विश्लेषकों ने इसके 70 अरब डॉलर तक रहने का अनुमान भी लगाया। उस समय तेज गिरावट का सामना कर रहा रुपया भी इस घोषणा से मजबूत हुआ था।
बार्कलेज ने कहा कि कच्चे तेल की कीमतों के दोबारा चढ़ने और आयातकों की ओर से डॉलर की बढ़ी खरीद के कारण रुपये पर फिर से दबाव बना है। उसका मानना है कि आगे भी रुपये में धीरे-धीरे कमजोरी आएगी।
हालांकि रिपोर्ट कहती है कि आरबीआई के हालिया उपायों से रुपये पर अत्यधिक दबाव का जोखिम कम हुआ है और इससे भारत का भुगतान संतुलन अधिशेष में रहने में मदद मिलेगी। हालांकि, एफसीएनआर जमा में अब तक अपेक्षा से कम आमद हुई है और रुपये के लिए सबसे बड़ा जोखिम कच्चे तेल की कीमतों से जुड़ा हुआ है।
बार्कलेज ने कहा कि एफसीएनआर योजना की लगभग ढाई महीने की बची हुई अवधि में जमा में तेज बढ़ोतरी संभव है, लेकिन सितंबर अंत में योजना की समयसीमा समाप्त होने तक बाजार की अपेक्षाओं के करीब पहुंचने के लिए काफी ऊंची रफ्तार से आमद की जरूरत होगी।
ब्रोकरेज कंपनी ने कहा कि वर्ष 2013 की एफसीएनआर योजना से मौजूदा योजना की तुलना भ्रामक हो सकती है क्योंकि अमेरिका में ऊंची ब्याज दरों के कारण ऐसे जमा को लेकर आकर्षण पहले की तुलना में कम हुआ है।
पूंजी प्रवाह के बारे में बार्कलेज ने कहा कि पोर्टफोलियो निवेश में उत्साहजनक संकेत मिले हैं। भारतीय सरकारी बॉन्ड को ‘एफटीएसई वर्ल्ड गवर्नमेंट बॉन्ड इंडेक्स’ और ‘ब्लूमबर्ग ग्लोबल एग्रीगेट इंडेक्स’ में शामिल किए जाने की उम्मीद से समय के साथ विदेशी निवेशकों का बॉन्ड आवंटन स्थायी रूप से बढ़ सकता है।
हालांकि रिपोर्ट में आगाह किया गया है कि आयातकों की डॉलर मांग अब भी इन पूंजी प्रवाह से अधिक बनी हुई है जिससे रुपये पर दबाव कायम है।
भाषा निहारिका प्रेम
प्रेम

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