वित्तीय क्षेत्र केवल अगले साल की वृद्धि नहीं, अगली पीढ़ी के उद्यमों के लिए पूंजी जुटाए: पी के मिश्रा
वित्तीय क्षेत्र केवल अगले साल की वृद्धि नहीं, अगली पीढ़ी के उद्यमों के लिए पूंजी जुटाए: पी के मिश्रा
मुंबई, 23 सितंबर (भाषा) प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव पी के मिश्रा ने बुधवार को कहा कि वित्तीय क्षेत्र को निकट अवधि की आर्थिक वृद्धि के लिए वित्त उपलब्ध कराने से आगे बढ़कर अगली पीढ़ी के भारतीय उद्यमों के लिए पूंजी जुटाने पर ध्यान देना चाहिए।
उन्होंने यहां 13वें एसबीआई बैंकिंग एवं अर्थशास्त्र सम्मेलन 2026 में कहा, ‘‘वित्तीय क्षेत्र के सामने काम अगले साल की वृद्धि के वित्तपोषण से कहीं बड़ा है। उसे भारतीय उद्यमों की अगली पीढ़ी के लिए वित्त उपलब्ध कराना है।’’
मिश्रा ने कहा कि भारत के अग्रणी वैश्विक अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में बढ़ने के साथ वित्तीय व्यवस्था को केवल आर्थिक वृद्धि को सहारा देने से आगे बढ़कर उसे सक्षम बनाने की दिशा में काम करना होगा।
उन्होंने कहा कि बहुत बड़ी और जटिल अर्थव्यवस्था की वित्तीय जरूरतें केवल बैंकों के जरिये पूरी नहीं की जा सकतीं। इसके लिए कॉरपोरेट बॉण्ड और शेयर बाजारों को अधिक मजबूत बनाने, बड़े संस्थागत निवेशकों और बुनियादी ढांचा कोषों की जरूरत होगी।
मिश्रा ने कर्ज का आकलन करने के तरीके में भी बदलाव की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि कर्ज आकलन में गिरवी रखने की व्यवस्था के बजाय नकदी प्रवाह को अधिक महत्व दिया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा, ‘‘वित्तीय क्षेत्र को अब एक और बदलाव अपनाने की जरूरत है। यह बदलाव गिरवी व्यवस्था के बजाय नकदी प्रवाह को आधार बनाने को लेकर है।’’
मिश्रा ने कर्ज की पहुंच बढ़ाने के लिए नई प्रौद्योगिकियों के उपयोग पर जोर देते हुए कहा कि प्रौद्योगिकी कर्जदाताओं को माल एवं सेवा कर (जीएसटी) रिटर्न, बैंक विवरण, भुगतान प्रवाह और डिजिटल ऋण ढांचे के जरिये कारोबार का आकलन करने में मदद कर सकती है।
उन्होंने कहा, ‘‘यह कर्ज आकलन के मानकों को कम करने की बात नहीं है। यह बेहतर जानकारी और बेहतर कर्ज आकलन की बात है।’’
मिश्रा ने कहा कि कर्जदाताओं को कारोबार का आकलन मुख्य रूप से प्रवर्तकों के पास पहले से मौजूद संपत्तियों के बजाय उनकी कमाई और भविष्य की क्षमता के आधार पर करना चाहिए।
उन्होंने कहा, ‘‘यदि भारत को विनिर्माण से डिजाइन और नवोन्मेष की ओर बढ़ना है तो हमारे पूंजी बाजार, उद्यम पूंजी व्यवस्था और बैंकों को केवल कारखानों के बजाय विचारों के लिए भी वित्त उपलब्ध कराने को समान रूप से तैयार रहना होगा।’’
प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव ने कहा कि भारत की वित्तीय व्यवस्था को बुनियादी ढांचे, विनिर्माण, शहरीकरण, ऊर्जा बदलाव और नवोन्मेष के लिए बड़ी मात्रा में पूंजी जुटानी होगी। अलग-अलग जरूरतों के लिए अलग-अलग तरह की पूंजी की आवश्यकता होगी।
उन्होंने कहा, ‘‘लंबे समय में तैयार होने वाली परियोजनाओं के लिए लंबी अवधि की पूंजी की जरूरत होती है। नवोन्मेष के लिए जोखिम पूंजी, तेजी से बढ़ने वाले उद्यमों के लिए इक्विटी पूंजी, बुनियादी ढांचे के लिए दीर्घकालिक पूंजी और शहरों के लिए नई वित्तीय व्यवस्थाओं की आवश्यकता होगी।’’
मिश्रा ने कहा कि भारत को घरेलू विनिर्माण मजबूत करने और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में आने वाली समस्या से उत्पन्न कमजोरियों को कम करने की जरूरत है।
उन्होंने कहा, ‘‘हम अनुकूल परिस्थितियों पर निर्भर नहीं रह सकते। भारत को देश में ही प्रतिस्पर्धी तरीके से चीजों का विनिर्माण करना होगा।’’
मिश्रा ने कहा कि वित्तीय क्षेत्र को वैश्विक बाजारों में विस्तार कर रही भारतीय कंपनियों को भी सहयोग देना होगा और भारत को अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवाओं के प्रदाता के रूप में उभरने में मदद करनी होगी।
उन्होंने कहा, ‘‘यात्रा ‘मेक इन इंडिया’ से ‘डिजाइन इन इंडिया’, ‘इनोवेट इन इंडिया’ और अंततः ‘लीड फ्रॉम इंडिया’ की ओर होनी चाहिए।’’
मिश्रा ने कहा कि 2047 का भारत केवल अधिक सकल घरेलू उत्पाद वाली मौजूदा अर्थव्यवस्था नहीं हो सकता। उसे अधिक उत्पादक, अधिक नवोन्मेषी, प्रौद्योगिकी रूप से सक्षम, अधिक विकसित वित्तीय व्यवस्था वाली और वैश्विक स्तर पर अधिक प्रतिस्पर्धी अर्थव्यवस्था बनना होगा।
भाषा रमण अजय
अजय

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