फिनटेक क्षेत्र अब यूपीआई का वैश्विक विस्तार करने, पैसा भेजने की लागत घटाने पर करे काम: मोदी
फिनटेक क्षेत्र अब यूपीआई का वैश्विक विस्तार करने, पैसा भेजने की लागत घटाने पर करे काम: मोदी
मुंबई, आठ सितंबर (भाषा) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को फिनटेक क्षेत्र से एकीकृत भुगतान इंटरफेस (यूपीआई) की वैश्विक पहुंच बढ़ाने, इसे अन्य देशों की स्थानीय भुगतान प्रणालियों से जोड़ने और प्रवासी भारतीयों के लिए पैसा भेजने की लागत कम करने में मदद करने का आह्वान किया।
मोदी ने यहां वैश्विक फिनटेक सम्मेलन के सातवें संस्करण के उद्घाटन के बाद अपने संबोधन में कहा कि यूपीआई मंच अब 11 देशों में काम कर रहा है और इसे सिंगापुर की स्थानीय भुगतान प्रणाली से भी जोड़ा गया है।
प्रधानमंत्री ने फिनटेक (वित्तीय प्रौद्योगिकी) क्षेत्र से पिछले एक दशक की उपलब्धियों पर संतुष्ट होकर रुकने के बजाय यूपीआई की पहुंच को और व्यापक बनाने का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ने को कहा।
पिछले एक दशक में यूपीआई देशभर में वास्तविक समय में भुगतान का व्यापक रूप से इस्तेमाल होने वाला मंच बन गया है।
उन्होंने कहा कि ध्यान उन देशों पर होना चाहिए जहां बड़ी संख्या में प्रवासी भारतीय रहते हैं, भारत के साथ व्यापार की मात्रा अधिक है या जो भुगतान प्रणालियों को जोड़ने में भारत के साथ साझेदारी करने के इच्छुक हैं।
मोदी ने कहा, ‘‘यह जरूरी है क्योंकि बड़ी संख्या में भारतीय विदेशों में काम करते हैं। वे सबसे अधिक पैसा भेजने वाले लोग हैं। जो पैसा भेजा जाता है, उसका एक हिस्सा लेनदेन लागत में चला जाता है। यूपीआई इस लागत को बचाने में मदद कर सकता है और पैसा परिवारों तक तेजी से भी पहुंच सकता है।’’
उन्होंने कहा कि वैश्विक कार्ड भुगतान फिलहाल अन्य देशों में विकसित प्रणालियों पर चलते हैं, लेकिन भारत के पास अब इसका विकल्प मौजूद है।
मोदी ने कहा, “हम अपने नियम और मानक खुद तय कर सकते हैं और उन्हें दुनिया से जोड़ सकते हैं।”
प्रधानमंत्री ने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के शब्दों को दोहराते हुए कहा कि यूपीआई केवल प्रौद्योगिकी की कहानी नहीं है, बल्कि यह सभ्यता से भी जुड़ी है।
उन्होंने कहा कि पिछले कई वर्षों में भुगतान के क्षेत्र में मिली बड़ी सफलताओं के बाद भारतीय फिनटेक उद्योग को अब गैर-भुगतान आधारित वित्तीय सेवाओं पर ध्यान देना चाहिए।
प्रधानमंत्री ने फिनटेक समुदाय से अत्याधुनिक साइबर सुरक्षा समाधान विकसित करने का भी आग्रह किया। उन्होंने निजी जानकारी संरक्षण मानकों की जरूरत पर जोर देते हुए कहा कि एक मजबूत फिनटेक नियामकीय परिवेश और फिनटेक उपभोक्ता संरक्षण सूचकांक विकसित किया जाना चाहिए, जिससे पारदर्शिता के आधार पर हर कंपनी का आकलन किया जा सके।
भाषा रमण अजय
अजय

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