एफपीआई ने सितंबर में अबतक भारतीय शेयर बाजार से 20,974 करोड़ रुपये निकाले

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एफपीआई ने सितंबर में अबतक भारतीय शेयर बाजार से 20,974 करोड़ रुपये निकाले

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  • Publish Date - September 20, 2026 / 11:39 AM IST,
    Updated On - September 20, 2026 / 11:39 AM IST

नयी दिल्ली, 20 सितंबर (भाषा) वैश्विक स्तर पर बढ़ती अनिश्चितता, अमेरिका में ऊंची ब्याज दरें और बढ़ता बॉण्ड प्रतिफल, महंगे कच्चे तेल तथा कमजोर होते रुपये के बीच विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) ने एक बार फिर भारतीय शेयर बाजार से दूरी बनानी शुरू कर दी हैं। एफपीआई ने सितंबर में अबतक भारतीय शेयरों से 20,974 करोड़ रुपये निकाले हैं।

सेंट्रल डिपॉजिटरी सर्विसेज लिमिटेड (सीडीएसएल) के आंकड़ों के अनुसार, सितंबर में हुई बिकवाली से पहले विदेशी निवेशकों ने जुलाई और अगस्त में भारतीय शेयरों में क्रमशः 20,200 करोड़ रुपये और 29,630 करोड़ रुपये का निवेश किया था।

सितंबर की बिकवाली के साथ ही 2026 में एफपीआई भारतीय शेयर बाजार से कुल 2.45 लाख करोड़ रुपये निकाल चुके हैं। यह आंकड़ा 2025 में पूरे साल के दौरान हुई 1.66 लाख करोड़ रुपये की निकासी से भी अधिक है।

हालांकि, इस दौरान प्राथमिक या आईपीओ बाजार के जरिये एफपीआई का निवेश जारी रहा। वहीं, विदेशी निवेशकों ने भारतीय ऋण या बॉण्ड बाजार में भी बिकवाली की। उन्होंने पूर्ण पहुंच मार्ग (एफएआर) के जरिये 10,296 करोड़ रुपये, स्वैच्छिक प्रतिधारण मार्ग (वीआरआर) के तहत 1,817 करोड़ रुपये और सामान्य मार्ग से 1,068 करोड़ रुपये की निकासी की।

चॉइस वेल्थ के मुख्य निवेश रणनीति अधिकारी धीरज गौड़ के मुताबिक, एफपीआई की हालिया बिकवाली के पीछे तीन प्रमुख कारण हैं। अमेरिका में ऊंची ब्याज दरें और ऊंचा बॉण्ड प्रतिफल, भू-राजनीतिक तनाव के बीच कच्चे तेल की ऊंची कीमतें तथा भारतीय रुपये में कमजोरी।

अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरें 3.75-4 प्रतिशत के स्तर पर हैं। इससे भारत और अमेरिका के बीच ब्याज दरों का अंतर कम हुआ है, जिससे विदेशी निवेशकों के लिए भारतीय परिसंपत्तियों का आकर्षण घटा है। दूसरी ओर, ब्रेंट कच्चा तेल 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बना हुआ है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव ने महंगे तेल को लेकर चिंता और बढ़ा दी है, जिसका असर भारत के आयात बिल और महंगाई पर पड़ सकता है।

रुपये पर भी दबाव बना हुआ है। पिछले सप्ताह रुपये में 1.1 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जो चार महीने में उसकी सबसे बड़ी साप्ताहिक गिरावट रही। रुपया 95.92-95.96 प्रति डॉलर के रिकॉर्ड निचले स्तर के आसपास कारोबार करता रहा और कारोबार के दौरान 96 रुपये प्रति डॉलर के स्तर को भी पार कर गया।

‘ट्रैक’ के सह-संस्थापक एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) वेदांत गुप्ते ने कहा कि सितंबर की एफपीआई बिकवाली को मुख्य रूप से कच्चे तेल और डॉलर की स्थिति से जोड़कर देखा जाना चाहिए। उनके अनुसार, तेल की कीमतों में तेजी और अमेरिकी बॉण्ड प्रतिफल में बढ़ोतरी का असर केवल भारत पर नहीं, बल्कि उभरते बाजारों पर व्यापक रूप से पड़ रहा है।

भाषा अजय अजय

अजय