Contract Employees Permanent Order Notification: सभी संविदाकर्मियों को दिवाली की सौगात, एक साथ मिली जिंदगी भर की खुशियां, त्योहार से पहले जारी होगा नियमितीकर का आदेश / Image: AI Generated
रांची: Contract Employees Permanent Order Notification: दिवाली से पहले सरकारी कर्मचारियों को महंगाई भत्ते में बढ़ोतरी और बोनस का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। तो वहीं दूसरी ओर संविदा कर्मचारियों को उम्मीद है कि सरकार दिवाली पर नियमितीकरण की सौगात दे सकती है। हालांकि अभी महंगाई भत्ते और बोनस को लेकर सरकार ने कोई अधिकारिक फैसला नहीं लिया है। लेकिन लंबे समय से नियमितीकरण का इंतजार कर रहे संविदा कर्मचारियों को दिवाली से पहले उम्र भर की खुशियांं एक साथ मिल गई है। जारी आदेश के अनुसार दिवाली से पहले ही संविदा कर्मचारियों के नियमितीकरण का आदेश जारी हो सकता है।
Contract Employees Permanent Order Notification मिली जानकारी के अनुसार झारखंड हाईकोर्ट ने संविदा कर्मचारियों की याचिका पर सुनवाई करते हुए सभी कर्मचारियों को नियमित किए जाने का आदेश दिया है। इसक साथ ही हाईकोर्ट ने स्वास्थ्य विभाग के इंजीनियरिंग सेल की ओर से कर्मचारियों की सेवा समाप्त किए जाने के आदेश को रद्द कर दिया है।
संविदा कर्मचारियों की याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने माना कि याचिकाकर्ताओं ने 10 वर्ष से अधिक समय बिना ब्रेक के सेवाएं दीं। ऐसे में केवल संविदा कर्मी होने के आधार पर उन्हें हटाना अनुचित है। हाईकोर्ट ने विभाग को आदेश की प्रति मिलने के छह हफ्ते के भीतर सभी नौ याचिकाकर्ताओं को सेवा में बहाल कर औपचारिक नियमितीकरण पूरी करने का निर्देश दिया। मामले में अमृतांश वत्स ने पक्ष रखा। याचिकाकर्ता धरो उरांव, अरुण कुमार साहू, गौतम प्रसाद सिंह, आशीष रंजन, प्रदीप बड़ा, विष्णु देव शाह, अरविंद कुमार सिंह, अजय रजक व संतोष कुमार राम की नियुक्ति 2004 से 2008 के बीच टाइपिस्ट, ऑफिस असिस्टेंट, क्लर्क, ड्राइवर व पंप ऑपरेटर के पदों पर हुई थी। जनवरी 2017 तक मानदेय भुगतान के बाद बिना किसी औपचारिक आदेश के उन्हें काम से रोक दिया गया। विभागीय गुहार निष्फल होने पर कर्मचारियों ने हाईकोर्ट की शरण ली थी।
वहीं, दूसरी ओर झारखंड ऊर्जा विकास निगम लिमिटेड (जेयूवीएनएल) में लंबे समय से संविदा पर कार्यरत चालकों को झारखंड हाईकोर्ट ने बड़ी राहत दी है। जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने करीब 15 वर्षों से लगातार सेवा दे रहे चालकों को नियमित करने और संबंधित लाभ देने का आदेश दिया। कोर्ट ने कहा कि पद स्वीकृत न होने का आधार नहीं चलेगा, क्योंकि यह मामला अधिक से अधिक अनियमित का हो सकता है, अवैध नियुक्ति का नहीं। वर्ष 2008 में चयन प्रक्रिया के बाद इंद्रदेव सिंह समेत 29 चालक लगातार सेवा दे रहे हैं।