Contract Employees Permanent Order Notification: सभी संविदाकर्मियों को दिवाली की सौगात, एक साथ मिली जिंदगी भर की खुशियां, त्योहार से पहले जारी होगा नियमितीकरण का आदेश

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Contract Employees Permanent Order Notification: सभी संविदाकर्मियों को दिवाली की सौगात, एक साथ मिली जिंदगी भर की खुशियां, त्योहार से पहले जारी होगा नियमितीकर का आदेश

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  • Publish Date - September 20, 2026 / 10:53 AM IST,
    Updated On - September 20, 2026 / 11:01 AM IST

Contract Employees Permanent Order Notification: सभी संविदाकर्मियों को दिवाली की सौगात, एक साथ मिली जिंदगी भर की खुशियां, त्योहार से पहले जारी होगा नियमितीकर का आदेश / Image: AI Generated

HIGHLIGHTS
  • लगातार सेवा देने वाले संविदा कर्मचारियों की नियमितीकरण की प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश
  • कर्मचारियों की सेवा समाप्त करने के आदेश को कोर्ट ने रद्द कर दिया
  • 15 वर्षों से कार्यरत 29 चालकों को नियमित करने और संबंधित लाभ देने का आदेश दिया

रांची: Contract Employees Permanent Order Notificationदिवाली से पहले सरकारी कर्मचारियों को महंगाई भत्ते में बढ़ोतरी और बोनस का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। तो वहीं दूसरी ओर संविदा कर्मचारियों को उम्मीद है कि सरकार दिवाली पर नियमितीकरण की सौगात दे सकती है। हालांकि अभी महंगाई भत्ते और बोनस को लेकर सरकार ने कोई अधिकारिक फैसला नहीं लिया है। लेकिन लंबे समय से नियमितीकरण का इंतजार कर रहे संविदा कर्मचारियों को दिवाली से पहले उम्र भर की खुशियांं एक साथ मिल गई है। जारी आदेश के अनुसार दिवाली से पहले ही संविदा कर्मचारियों के नियमितीकरण का आदेश जारी हो सकता है।

दिवाली से पहले होगा संविदा कर्मचारियों का नियमितीकरण

Contract Employees Permanent Order Notification मिली जानकारी के अनुसार झारखंड हाईकोर्ट ने संविदा कर्मचारियों की याचिका पर सुनवाई करते हुए सभी कर्मचारियों को नियमित किए जाने का आदेश दिया है। इसक साथ ही हाईकोर्ट ने स्वास्थ्य विभाग के इंजीनियरिंग सेल की ओर से कर्मचारियों की सेवा समाप्त किए जाने के आदेश को रद्द कर दिया है।

सेवा समाप्ति का आदेश भी हाईकोर्ट ने किया रद्द

संविदा कर्मचारियों की याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने माना कि याचिकाकर्ताओं ने 10 वर्ष से अधिक समय बिना ब्रेक के सेवाएं दीं। ऐसे में केवल संविदा कर्मी होने के आधार पर उन्हें हटाना अनुचित है। हाईकोर्ट ने विभाग को आदेश की प्रति मिलने के छह हफ्ते के भीतर सभी नौ याचिकाकर्ताओं को सेवा में बहाल कर औपचारिक नियमितीकरण पूरी करने का निर्देश दिया। मामले में अमृतांश वत्स ने पक्ष रखा। याचिकाकर्ता धरो उरांव, अरुण कुमार साहू, गौतम प्रसाद सिंह, आशीष रंजन, प्रदीप बड़ा, विष्णु देव शाह, अरविंद कुमार सिंह, अजय रजक व संतोष कुमार राम की नियुक्ति 2004 से 2008 के बीच टाइपिस्ट, ऑफिस असिस्टेंट, क्लर्क, ड्राइवर व पंप ऑपरेटर के पदों पर हुई थी। जनवरी 2017 तक मानदेय भुगतान के बाद बिना किसी औपचारिक आदेश के उन्हें काम से रोक दिया गया। विभागीय गुहार निष्फल होने पर कर्मचारियों ने हाईकोर्ट की शरण ली थी।

संविदा वाहन चालकों को भी बड़ी राहत

वहीं, दूसरी ओर झारखंड ऊर्जा विकास निगम लिमिटेड (जेयूवीएनएल) में लंबे समय से संविदा पर कार्यरत चालकों को झारखंड हाईकोर्ट ने बड़ी राहत दी है। जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने करीब 15 वर्षों से लगातार सेवा दे रहे चालकों को नियमित करने और संबंधित लाभ देने का आदेश दिया। कोर्ट ने कहा कि पद स्वीकृत न होने का आधार नहीं चलेगा, क्योंकि यह मामला अधिक से अधिक अनियमित का हो सकता है, अवैध नियुक्ति का नहीं। वर्ष 2008 में चयन प्रक्रिया के बाद इंद्रदेव सिंह समेत 29 चालक लगातार सेवा दे रहे हैं।

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झारखंड संविदा कर्मचारियों के नियमितीकरण पर हाईकोर्ट ने क्या आदेश दिया?

हाईकोर्ट ने संबंधित मामले में 9 याचिकाकर्ताओं को सेवा में बहाल करने और औपचारिक नियमितीकरण की प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया है। विभाग को आदेश की प्रति मिलने के छह सप्ताह के भीतर कार्रवाई करने को कहा गया है।

झारखंड में संविदा कर्मचारियों को नियमित करने का आदेश क्यों दिया गया?

कोर्ट के सामने बताया गया कि याचिकाकर्ताओं ने 10 वर्ष से अधिक समय तक बिना ब्रेक के सेवा दी थी। कोर्ट ने केवल संविदा कर्मचारी होने के आधार पर उनकी सेवा समाप्त करने को उचित नहीं माना।

किन पदों पर काम करने वाले कर्मचारियों को हाईकोर्ट से राहत मिली है?

मामले के 9 याचिकाकर्ताओं की नियुक्ति वर्ष 2004 से 2008 के बीच टाइपिस्ट, ऑफिस असिस्टेंट, क्लर्क, ड्राइवर और पंप ऑपरेटर जैसे पदों पर हुई थी।

क्या झारखंड के सभी संविदा कर्मचारियों का नियमितीकरण हो गया है?

नहीं। दिए गए मामले में हाईकोर्ट का आदेश संबंधित याचिकाकर्ताओं के संबंध में है। इसे झारखंड के सभी संविदा कर्मचारियों के लिए सामान्य नियमितीकरण आदेश नहीं माना जा सकता।

झारखंड ऊर्जा विकास निगम के संविदा चालकों को क्या राहत मिली?

झारखंड ऊर्जा विकास निगम लिमिटेड में वर्ष 2008 की चयन प्रक्रिया के बाद लगातार सेवा दे रहे इंद्रदेव सिंह समेत 29 चालकों के मामले में हाईकोर्ट ने नियमितीकरण और संबंधित लाभ देने का आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा कि स्वीकृत पद का अभाव नियुक्ति को अपने-आप अवैध नहीं बनाता; मामले की प्रकृति अनियमित नियुक्ति की हो सकती है।