अब उर्वरक संयंत्रों को उनकी जरूरत की 90 प्रतिशत तक गैस आपूर्ति
अब उर्वरक संयंत्रों को उनकी जरूरत की 90 प्रतिशत तक गैस आपूर्ति
नयी दिल्ली, छह अप्रैल (भाषा) पेट्रोलियम कंपनियों के हाजिर बाजार से तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) की खरीद के बाद उर्वरक संयंत्रों को प्राकृतिक गैस की आपूर्ति उनकी आवश्यकता के लगभग 90 प्रतिशत तक बढ़ा दी गई है। होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही बाधित होने से उत्पन्न समस्याओं के बीच ईंधन की उपलब्धता को प्रबंधित करने के व्यापक उपायों के तहत यह कदम उठाया गया है। अधिकारियों ने सोमवार को यह जानकारी दी।
पश्चिम एशिया में युद्ध के कारण खाड़ी देशों से ऊर्जा आपूर्ति बाधित होने के बाद, सरकार ने शुरू में उर्वरक (यूरिया) संयंत्रों को गैस की आपूर्ति आवश्यकता के लगभग 60 प्रतिशत तक सीमित कर दी थी। बाद में वैकल्पिक व्यवस्था के माध्यम से इसे बढ़ाकर 75 से 80 प्रतिशत कर दिया गया था।
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने संवाददाता सम्मेलन में बताया कि हाजिर खरीद का उपयोग करके छह अप्रैल से गैस की आपूर्ति को छह महीने की औसत खपत के 90 प्रतिशत तक बढ़ा दिया गया है।
कतर से एलएनजी की आपूर्ति निलंबित है। ऐसे में भारतीय कंपनियां अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और रूस में वैकल्पिक आपूर्तिकर्ताओं से ईंधन की खरीद कर रही हैं।
उन्होंने कहा कि अतिरिक्त आपूर्ति के कारण विभिन्न क्षेत्रों के लिए कोटा में वृद्धि हुई है। सोमवार से शहरी गैस वितरण (सीजीडी) नेटवर्क सहित अन्य औद्योगिक और वाणिज्यिक क्षेत्रों को गैस की आपूर्ति में 10 प्रतिशत की अतिरिक्त वृद्धि की जाएगी।
प्राथमिकता वाले क्षेत्रों को पहले की तरह आपूर्ति मिलती रहेगी। इसमें पाइप के जरिये घरों में पहुंचने वाली रसोई गैस और परिवहन के लिए सीएनजी की 100 प्रतिशत आपूर्ति शामिल है।
शर्मा ने कहा कि खाड़ी देशों से रसोई गैस (एलपीजी) की आपूर्ति प्रभावित हो रही है, लेकिन खाना पकाने के लिए घरों में गैस आपूर्ति पूर्ण रूप से हो रही है।
उन्होंने कहा, ‘‘एलपीजी की आपूर्ति मौजूदा वैश्विक स्थिति से प्रभावित हो रही है, लेकिन एलपीजी वितरकों में किसी भी तरह की कमी की सूचना नहीं मिली है।’’
अधिकारी ने कहा, ‘‘घरेलू एलपीजी सिलेंडर का वितरण सामान्य बना हुआ है। एक मार्च, 2026 से अब तक 18 करोड़ से अधिक सिलेंडर घरों में वितरित किए जा चुके हैं।’’
उन्होंने कहा कि राज्यों को होटल और रेस्तरांओं द्वारा उपयोग की जाने वाली वाणिज्यिक एलपीजी का आवंटन संकट-पूर्व स्तर के लगभग 70 प्रतिशत तक बढ़ा दिया गया है।
चौदह मार्च से अब तक लगभग 79,909 टन वाणिज्यिक एलपीजी (42 लाख से अधिक 19-किलो सिलेंडरों के बराबर) बेची जा चुकी है।
सब्सिडी वाले 14.2-किलो घरेलू खाना पकाने के गैस सिलेंडर के विपरीत, पांच-किलो के फ्री ट्रेड एलपीजी (एफटीएल) सिलेंडर एलपीजी वितरकों के काउंटर पर बाजार मूल्य पर बेचे जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि ये सिलेंडर खरीदने के लिए केवल एक पहचान पत्र की आवश्यकता होती है।
शर्मा ने कहा कि 23 मार्च, 2026 से अब तक लगभग 6.75 लाख पांच किलो के एफटीएल सिलेंडर बेचे जा चुके हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘नागरिकों को सलाह दी जाती है के वे पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की घबराहट में खरीदारी से बचें और जानकारी के लिए केवल आधिकारिक स्रोतों पर भरोसा करें।’’
शर्मा ने कहा कि एलपीजी उपयोगकर्ताओं को डिजिटल बुकिंग का विकल्प चुनना चाहिए और वितरकों के पास जाने से बचना चाहिए।
सरकार ने कहा है कि अस्पतालों और शैक्षणिक संस्थानों सहित आवश्यक सेवाओं के लिए घरेलू एलपीजी और पीएनजी की आपूर्ति को प्राथमिकता दी जा रही है। रिफाइनरी उत्पादन बढ़ाया गया है और आपूर्ति को युक्तिसंगत बनाने के उपाय किए गए हैं।
इन उपायों में शहरी क्षेत्रों में एलपीजी भराने के लिए बुकिंग अंतराल को 25 दिन तक और ग्रामीण क्षेत्रों में 45 दिन तक बढ़ाने के साथ ही मांग के दबाव को कम करने के लिए केरोसिन, कोयला, पीएनजी और इलेक्ट्रिक चूल्हे जैसे वैकल्पिक ईंधनों को बढ़ावा देना शामिल है।
शर्मा ने बताया कि जमाखोरी और कालाबाजारी पर अंकुश लगाने के लिए कार्रवाई तेज कर दी गई है। इसके तहत 1,00,000 से अधिक छापे मारे गए हैं, 52,000 से अधिक सिलेंडर जब्त किए गए हैं और गड़बड़ी करने वालों को गिरफ्तार किया गया है।
उन्होंने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र की पेट्रोलियम विपणन कंपनियों ने निरीक्षण तेज कर दिए हैं। 1,500 से अधिक कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं। 118 एलपीजी वितरकों पर जुर्माना लगाया गया है और 41 को निलंबित किया गया है।
अधिकारी ने बताया कि सभी रिफाइनरियां पर्याप्त कच्चे तेल के भंडार के साथ उच्च क्षमता पर काम कर रही हैं और देशभर में पेट्रोल पंप चालू हैं।
भाषा रमण अजय
अजय

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