चंडीगढ़, 20 अगस्त (भाषा) हरियाणा में ‘पीएम गतिशक्ति’ के तहत जीआईएस प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल से बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए स्थल की व्यवहार्यता जांच में लगने वाला समय 40-45 दिन से घटकर एक-दो दिन रह गया है। राज्य सरकार ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी।
भौगोलिक सूचना प्रणाली (जीआईएस) एक ऐसी प्रौद्योगिकी है, जो किसी स्थान से जुड़े विभिन्न आंकड़ों को नक्शे पर एक साथ प्रदर्शित और उनका विश्लेषण करने में मदद करती है। इससे किसी परियोजना के लिए जमीन, सड़क, रेल, बिजली, सिंचाई और अन्य बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता का एकीकृत आकलन किया जा सकता है।
आधिकारिक बयान के मुताबिक, हरियाणा में पीएम गतिशक्ति के तहत चिह्नित, नियोजित या पूरी की गई बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की संख्या भी अप्रैल के नौ से बढ़कर अगस्त में 34 हो गई है। इनमें औद्योगिक बुनियादी ढांचा, सिंचाई, स्वास्थ्य, परिवहन, बिजली और नगर नियोजन से जुड़ी परियोजनाएं शामिल हैं।
राज्य के मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई समीक्षा बैठक में यह जानकारी दी गई। हिसार में प्रस्तावित जिला अस्पताल और पानीपत के मतलौडा में प्रस्तावित बस अड्डे जैसी परियोजनाओं में जीआईएस उपकरणों से स्थल की व्यवहार्यता जांच का समय 40-45 दिन से घटकर एक-दो दिन हो गया है। वास्तुकला विभाग में भी स्थल जांच का समय 33-39 दिन से घटकर एक-दो दिन रह गया है।
सिंचाई विभाग ने हिसार-घग्गर नाले के किनारे विभिन्न विभागों की संपत्तियों पर अतिक्रमण की पहचान के लिए इस मंच का इस्तेमाल किया। इससे प्रक्रिया में लगने वाला समय करीब 45 दिन से घटकर एक-दो दिन रह गया और स्थल सत्यापन में आंकड़ों की करीब 95 प्रतिशत सटीकता पाई गई।
उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के आयुक्त एवं सचिव अमित कुमार अग्रवाल ने बैठक में बताया कि पीएम गतिशक्ति राज्य मास्टर प्लान पोर्टल तक अधिकारियों की पहुंच के मामले में हरियाणा राज्यों में पहले स्थान पर है। राज्य के 720 से अधिक अधिकारी इस पोर्टल से जुड़ चुके हैं।
उन्होंने बताया कि 82 चिह्नित बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में से 61 की पीएम गतिशक्ति मंच पर मैपिंग हो चुकी है, जबकि अप्रैल में यह संख्या 40 थी।
हरियाणा राज्य औद्योगिक एवं बुनियादी ढांचा विकास निगम ने राजस्व, सड़क, रेल, वन, सिंचाई, बिजली और संपर्क समेत विभिन्न क्षेत्रों की सूचनाओं को एकीकृत करने वाला जीआईएस आधारित उपकरण भी विकसित किया है। इसका इस्तेमाल कई औद्योगिक मॉडल टाउनशिप की योजना बनाने में किया जा रहा है।
पीएम गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान की शुरुआत अक्टूबर, 2021 में देश में बुनियादी ढांचा नियोजन और विकास को अधिक एकीकृत बनाने के उद्देश्य से की गई थी।
भाषा प्रेम प्रेम अजय
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