छठी कक्षा से ही रोजगार दिलाने में मददगार कौशल पर हो ध्यान: नीति रिपोर्ट

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छठी कक्षा से ही रोजगार दिलाने में मददगार कौशल पर हो ध्यान: नीति रिपोर्ट

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  • Publish Date - August 20, 2026 / 06:59 PM IST,
    Updated On - August 20, 2026 / 06:59 PM IST

नयी दिल्ली, 20 अगस्त (भाषा) नीति आयोग ने रोजगार की काबिलियत बढ़ाने के लिए छठी कक्षा से ही रोजगार और उद्यमिता कौशल प्रशिक्षण और नौवीं कक्षा से छात्रों की रुचि और रोजगार की जरूरतों के अनुसार हुनरमंद बनाने के लिए व्यापक स्तर पर कार्यक्रम शुरू करने की वकालत की है। आयोग ने कहा है कि कौशल विकास का काम शुरुआती स्तर से होना चाहिए और इसे स्कूल प्रणाली का अभिन्न हिस्सा बनाया जाना चाहिए।

नीति आयोग ने अपनी रिपोर्ट ‘2047 तक विकसित भारत के लिए कौशल विकास की नई परिकल्पना’ में कक्षा 11 और 12 के सभी विद्यार्थियों के लिए सामान्य रोजगार काबिलियत एवं उद्यमिता कौशल (जीईईएस) को एक अलग विषय के रूप में जारी रखने का सुझाव दिया है।

रिपोर्ट में सुझाव दिया गया, ‘‘कक्षा 10 और 12 के बोर्ड विषय रूपरेखा में बदलाव कर व्यावसायिक विषयों को समान महत्व दिया जाना चाहिए। साथ ही सभी राज्यों के बोर्ड को कक्षा 10 के बोर्ड प्रमाणन के लिए इस संशोधित रूपरेखा को अपनाना चाहिए।’’

आयोग ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 और राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (एनसीएफ) में छठी कक्षा से व्यावसायिक शिक्षा और रोजगार कौशल को शामिल करने का मार्गदर्शन दिया गया है, लेकिन इसका क्रियान्वयन अभी सीमित है।

रिपोर्ट में कहा गया, ‘‘कौशल विकास की शुरुआत जल्दी होनी चाहिए और इसे स्कूल प्रणाली में शामिल किया जाना चाहिए, ताकि भविष्य में रोजगार क्षमता, विकल्पों और आगे बढ़ने के अवसरों को बेहतर बनाया जा सके।’’

नीति आयोग ने सुझाव दिया कि छठी से 12वीं कक्षा तक सभी विद्यार्थियों के लिए सामान्य रोजगार काबिलियत एवं उद्यमिता कौशल को अनिवार्य रूप से शुरू किया जा सकता है। इसके साथ ही नौवीं कक्षा से व्यवस्थित कौशल (संरचनात्मक व्यावसायिक पाठ्यक्रम) प्रशिक्षण शुरू किए जाएं, जिससे छात्र स्थानीय और राष्ट्रीय स्तर की कौशल मांग के अनुसार विशेषज्ञता हासिल कर सकें।

आयोग ने कहा कि भारत की उच्च शिक्षा प्रणाली में भी बदलाव की जरूरत है ताकि शिक्षा को श्रम बाजार की जरूरतों से जोड़ा जा सके।

रिपोट के अनुसार, ‘‘कई पाठ्यक्रम पुराने हैं और सामान्य डिग्रियों में अधिक नामांकन के कारण रोजगार के परिणाम कमजोर बने हुए हैं। इन कमियों को दूर करने के लिए सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल और प्रशिक्षण आधारित डिग्री एवं डिप्लोमा कार्यक्रमों के माध्यम से उद्योगों की भागीदारी बढ़ानी होगी। इससे पाठ्यक्रमों को आधुनिक बनाने, रोजगार आधारित शिक्षा को बढ़ावा देने और शिक्षा को प्रासंगिक बनाने में मदद मिलेगी।’’

रिपोर्ट में सामान्य डिग्री के स्थान पर उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप व्यावहारिक विशेषज्ञता वाले पाठ्यक्रमों को बढ़ावा देने, काम आधारित प्रशिक्षण से जुड़े डिग्री कार्यक्रमों के विस्तार तथा कमाई के साथ सीखने वाले कार्यक्रमों को बढ़ाने का सुझाव दिया गया है।

नीति आयोग ने कहा कि भविष्य में कौशल विकास का ध्यान हरित उद्योग, इलेक्ट्रिक वाहन और बदलती नौकरियों के लिए दोबारा कौशल प्रशिक्षण जैसे तेजी से बढ़ने वाले क्षेत्रों पर होना चाहिए।

प्रशिक्षण को प्रमाणित परिणामों से जोड़ना, मौजूदा सार्वजनिक ढांचे का बेहतर इस्तेमाल और परिणाम आधारित वित्तीय मॉडल रोजगार के अवसरों और भागीदारी को बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण हैं।

रिपोर्ट में एप्रेन्टिसशिप कार्यक्रमों को शिक्षा और रोजगार के बीच की दूरी कम करने के लिए एक भरोसेमंद और मुख्यधारा के विकल्प के रूप में विकसित करने पर भी जोर दिया गया है।

आयोग ने कहा कि राष्ट्रीय अप्रेंटिसशिप प्रोत्साहन योजना (एनएपीएस), राष्ट्रीय अप्रेंटिसशिप प्रशिक्षण योजना (एनएटीएस) और राज्यों की योजनाओं से अवसर बढ़े हैं, लेकिन भागीदारी अब भी असमान है। जागरूकता की कमी है और अवसर कई अलग-अलग मंचों पर बंटे हुए हैं।

रिपोर्ट में कहा गया कि अप्रेंटिसशिप को प्रभावी बनाने के लिए सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों (एमएसएमई) को प्रोत्साहन देकर अवसर बढ़ाने, एकीकृत राज्य-स्तरीय मंच के जरिये पहुंच आसान बनाने और प्रशिक्षण को विद्यार्थियों एवं उद्योगों की मांग से जोड़ने की जरूरत है।

नीति आयोग ने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए नागरिकों को लगातार सीखने, कमाने और आगे बढ़ने के अवसर देने होंगे। इसमें कौशल विकास की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है।

रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2014-15 से अब तक 7.67 करोड़ से अधिक लोगों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। इस गति को बनाए रखने के लिए वित्त वर्ष 2025-26 के केंद्रीय बजट में विभिन्न मंत्रालयों के माध्यम से कौशल विकास से जुड़े खर्च के लिए 34,000 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। हालांकि, आयोग ने कहा कि इसके परिणाम अब भी असमान हैं।

भाषा रमण अजय

अजय