मुंबई, 20 अगस्त (भाषा) अस्थिर व्यापक आर्थिक माहौल के बीच 2026 की जनवरी-जून अवधि में निजी ऋण का उपयोग 61 प्रतिशत घटकर 3.5 अरब अमेरिकी डॉलर रह गया, जो एक साल पहले की समान अवधि में नौ अरब अमेरिकी डॉलर था। ईवाई की एक रिपोर्ट में बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी गई।
परामर्श कंपनी ईवाई की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले साल की पहली छमाही में 3.1 अरब अमेरिकी डॉलर के एक बड़े निवेश सौदे से कुल गतिविधियों को बढ़ावा मिला था। इसके बावजूद इस साल की पहली छमाही में निवेश गतिविधियां 2025 की दूसरी छमाही में दर्ज 3.4 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक रहीं।
रिपोर्ट में कहा गया कि करीब तीन-चौथाई निजी ऋण का इस्तेमाल घरेलू निजी ऋण कोषों ने किया। वहीं, कुल निवेश राशि में वैश्विक कोषों की हिस्सेदारी लगातार घट रही है।
विदेशी कोषों की हिस्सेदारी 2025 की दूसरी छमाही के 36 प्रतिशत से घटकर 26 प्रतिशत रह गई, जबकि 2025 की पहली छमाही में यह 68 प्रतिशत थी।
रिपोर्ट के अनुसार, क्षेत्र में जोखिम की धारणा के बावजूद 2026 की पहली छमाही में निजी ऋण कोषों के निवेश के लिए रियल एस्टेट पसंदीदा क्षेत्र बना रहा।
ईवाई की रिपोर्ट के मुताबिक, रियल एस्टेट की निजी ऋण में 35 प्रतिशत हिस्सेदारी रही। इसके बाद स्वास्थ्य सेवा की 13 प्रतिशत और खाद्य एवं पेय क्षेत्र की 12 प्रतिशत हिस्सेदारी रही।
इसमें कहा गया कि वित्तीय दबाव वाली स्थितियों, पूंजीगत व्यय की जरूरतों और अधिग्रहण के लिए निजी ऋण की मांग बनी रही।
निजी ऋण ऐसी विशेष परिस्थितियों में दिया जाने वाला कर्ज है, जहां बैंक और अन्य विनियमित वित्तीय संस्थान आमतौर पर कर्ज लेने वाले की जरूरत पूरी करने में सक्षम नहीं होते। इसमें सौदे की संरचना तय करने में काफी लचीलापन होता है और आमतौर पर कर्जदाताओं को अधिक रिटर्न मिलता है।
रिपोर्ट के अनुसार, साल की पहली छमाही में नियामकीय और बाहरी मोर्चे पर भी कई घटनाक्रम हुए, जो निजी ऋण की मात्रा को प्रभावित कर सकते हैं। इनमें बैंक ऋण वृद्धि में तेजी, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा बैंकों को अधिग्रहण के लिए वित्त उपलब्ध कराने की अनुमति और बाहरी वाणिज्यिक उधारी के लिए सीमित अवधि के प्रोत्साहन शामिल हैं।
भाषा योगेश अजय
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