भारत को नजरअंदाज़ करने वाली वैश्विक कॉरपोरेट रणनीतियां वृद्धि से चूक सकती है:राजन मित्तल

भारत को नजरअंदाज़ करने वाली वैश्विक कॉरपोरेट रणनीतियां वृद्धि से चूक सकती है:राजन मित्तल

भारत को नजरअंदाज़ करने वाली वैश्विक कॉरपोरेट रणनीतियां वृद्धि से चूक सकती है:राजन मित्तल
Modified Date: June 26, 2026 / 04:38 pm IST
Published Date: June 26, 2026 4:38 pm IST

नयी दिल्ली, 26 जून (भाषा) भारती एंटरप्राइजेज के वाइस चेयरमैन राजन भारती मित्तल ने कहा है कि भारत के 10 लाख करोड़ अमेरिकी डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने के अनुमान के साथ कोई भी वैश्विक कॉरपोरेट रणनीति अगर भारतीय बाजार की अनदेखी करती है, तो वह अगले दशक की बड़ी वृद्धि दर्ज करने से चूक सकती है।

मित्तल ने कहा कि भविष्य की आर्थिक वृद्धि का आधार सह-निर्माण और दीर्घकालिक साझेदारियां होंगी।

वह ब्रिटेन-भारत वीक 2026 में ‘भारत की वृद्धि गाथा : ब्रिटेन-भारत अवसरों से अगले दशक के निर्माण’ विषय पर आयोजित सत्र को संबोधित कर रहे थे।

मित्तल के अनुसार, भारत चार लाख करोड़ डॉलर की अर्थव्यवस्था से बढ़कर अनुमानित 10 लाख करोड़ डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की ओर अग्रसर है। ऐसे में भारतीय बाजार की अनदेखी करने वाली कोई भी वैश्विक कॉरपोरेट रणनीति अगले दशक की सबसे महत्वपूर्ण वृद्धि कहानी से वंचित रह जाएगी।

मित्तल का मानना है कि वैश्विक स्थिति में हो रहे बदलावों के बीच भारत वृद्धि और स्थिरता का एक खास केंद्र बनकर उभरा है।

मजबूत घरेलू खपत, युवा आबादी और विनिर्माण क्षेत्र की बढ़ती क्षमता से भारत वैश्विक अर्थव्यवस्था में केंद्रीय भूमिका निभा रहा है।

उन्होंने कहा कि विशेष रूप से ब्रिटेन-भारत आर्थिक गलियारे में अपार संभावनाएं हैं।

साझा लोकतांत्रिक मूल्यों और संस्थागत तालमेल के साथ, यह साझेदारी व्यापार से आगे बढ़कर एकीकृत मूल्य श्रृंखला तक जा सकती है। इसमें भारत को एक भरोसेमंद आधार के तौर पर इस्तेमाल करके अफ्रीका और उसके बाहर तेजी से बढ़ रहे बाजारों के लिए विनिर्माण, नवाचार और सेवाएं दी जा सकती हैं।

भाषा यासिर रमण

रमण


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