पणजी, तीन सितंबर (भाषा) गोवा विधानसभा ने स्टांप विक्रेताओं के धोखाधड़ी के अलावा किए गए उल्लंघनों के लिए जेल की सजा की जगह 10,000 रुपये तक का जुर्माना लगाने, औद्योगिक भूखंडों पर ‘फ्रीहोल्ड’ अधिकार देने और महिलाओं के कामकाज के समय में बदलाव के प्रावधान से जुड़ा विधेयक पारित किया है।
कारोबार के लिए नियामकीय अनुपालन आसान बनाने के उद्देश्य से लाया गया यह विधेयक विलंबित सार्वजनिक सेवाओं के लिए स्वचालित डिजिटल अपील की व्यवस्था भी शुरू करता है। इसका उद्देश्य नियामकीय प्रक्रियाओं को सरल बनाना और निवेश आधारित वृद्धि को बढ़ावा देना है।
मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने बुधवार को गोवा कारोबार सुगमता (विविध संशोधन) विधेयक, 2026 पेश किया। इसमें अदालत शुल्क, औद्योगिक विकास, समयबद्ध सार्वजनिक सेवाओं की आपूर्ति, दुकानों एवं प्रतिष्ठानों तथा नगर एवं ग्राम नियोजन से संबंधित पांच राज्य कानूनों में संशोधन किया गया है।
गोवा न्यायालय शुल्क अधिनियम, 2024 में संशोधन के तहत स्टांप विक्रेताओं द्वारा किए जाने वाले मामूली एवं धोखाधड़ी से इतर उल्लंघनों के लिए जेल की सजा हटा दी गई है और इसकी जगह 10,000 रुपये तक का प्रशासनिक जुर्माना लगाया गया है। हालांकि, स्टांप की धोखाधड़ी से बिक्री पर छह महीने तक की जेल की सजा जारी रहेगी।
गोवा दुकान एवं प्रतिष्ठान अधिनियम, 2025 में संशोधन के तहत अधिक प्रतिष्ठानों को इसके दायरे में लाया गया है और कामकाज के घंटों की वैधानिक अधिकतम सीमा हटा दी गई है। अब सरकार अधिसूचनाओं के जरिये कामकाज के घंटे तय करेगी।
संशोधन के तहत महिलाओं के काम करने का अनुमत समय भी पहले के सुबह सात बजे से शाम 7.30 बजे के मुकाबले सुबह छह बजे से शाम सात बजे तक किया गया है। इसके लिए निर्धारित सुरक्षा उपायों और महिलाओं की सहमति का पालन करना होगा।
वहीं 10 से कम कर्मचारियों वाले प्रतिष्ठानों को केवल एक साधारण ऑनलाइन सूचना देनी होगी।
विधेयक में गोवा औद्योगिक विकास निगम (जीआईडीसी) को औद्योगिक भूखंडों और परिसरों पर ‘फ्रीहोल्ड’ अधिकार देने की अनुमति भी दी दी गई है। ‘फ्रीहोल्ड प्रीमियम’ से प्राप्त राजस्व एक अलग कोष में जमा किया जाएगा और उसमें से केवल अर्जित ब्याज का इस्तेमाल खर्च के लिए किया जा सकेगा।
सरकार ऐसे बदलाव के कारण ग्राम पंचायतों और नगरपालिकाओं को होने वाले संपत्ति कर राजस्व के नुकसान की भरपाई कम से कम पांच साल तक करेगी।
उद्योगों के लिए एकल-खिड़की मंजूरी की सुविधा देने के लिए कारखाना एवं बॉयलर निरीक्षणालय, अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवाओं के निदेशालय और गोवा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों को जीआईडीसी की औद्योगिक नियोजन एवं विकास समिति में शामिल किया जाएगा।
इस व्यवस्था से समिति को मंजूरी जारी करने में मदद मिलेगी।
विधेयक में गोवा (नागरिकों को सार्वजनिक सेवाओं की समयबद्ध आपूर्ति का अधिकार) अधिनियम, 2013 का दायरा बढ़ाकर कारोबारी संस्थाओं को भी इसमें शामिल किया गया है।
विधेयक में गोवा नगर एवं ग्राम नियोजन अधिनियम, 1974 में भी संशोधन किया गया है। इसके तहत प्रतिपूरक वनीकरण के लिए वन विभाग को जमीन हस्तांतरित किए जाने पर नगर नियोजन की मंजूरी या अनापत्ति प्रमाणपत्र लेने की आवश्यकता खत्म कर दी गई है।
विधेयक के दस्तावेज के अनुसार, इन संशोधनों का राज्य के राजकोष पर कोई वित्तीय प्रभाव नहीं पड़ेगा। इनका उद्देश्य गोवा के नियामकीय ढांचे को विनियमन कम करने और कारोबार सुगमता से जुड़ी केंद्र की पहलों के अनुरूप बनाना है।
इस बीच गोवा विधानसभा ने एक संशोधन विधेयक पारित किया जिसके तहत तटीय विनियमन क्षेत्र (सीआरजेड) में निजी जमीन पर संचालित ‘शैक’ का राज्य पर्यटन विभाग में पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा।
गोवा पंजीकरण पर्यटक व्यापार (संशोधन) विधेयक, 2026 का उद्देश्य ऐसे अपंजीकृत ‘शैक’ को नियामक दायरे में लाना और निर्धारित सुरक्षा तथा अन्य आवश्यकताओं का पालन सुनिश्चित करना है।
गोवा पर्यटन मंत्री रोहन ए खाउंटे ने बुधवार को मानसून सत्र के अंतिम दिन विधानसभा में विधेयक पेश किया, जिसे ध्वनिमत से पारित कर दिया गया।
भाषा निहारिका मनीषा
मनीषा