‘गोबरधन’ योजना से गैस आयात बिल पांच अरब डॉलर घटाने में मदद मिलेगी : आईबीए

‘गोबरधन’ योजना से गैस आयात बिल पांच अरब डॉलर घटाने में मदद मिलेगी : आईबीए

‘गोबरधन’ योजना से गैस आयात बिल पांच अरब डॉलर घटाने में मदद मिलेगी : आईबीए
Modified Date: August 9, 2026 / 11:27 am IST
Published Date: August 9, 2026 11:27 am IST

नयी दिल्ली, नौ अगस्त (भाषा) भारतीय बायोगैस संघ (आईबीए) का मानना है कि सरकार की 23,731 करोड़ रुपये की ‘गोबरधन’ योजना आने वाले वर्षों में देश के प्राकृतिक गैस आयात बिल को करीब पांच अरब डॉलर तक कम करने में मदद कर सकती है।

यह योजना कृषि अवशेष, गोबर और अन्य जैविक कचरे को स्वच्छ ऊर्जा में बदलने पर केंद्रित है।

आईबीए के अनुसार, हाल में मंजूर की गई गोबरधन (गैल्वानाइजिंग ऑर्गेनिक बायो-एग्रो रिसोर्सेज धन) योजना को केवल सरकारी खर्च के रूप में नहीं, बल्कि एक रणनीतिक राष्ट्रीय निवेश के तौर पर देखा जाना चाहिए। इससे ऊर्जा क्षेत्र के अलावा ग्रामीण विकास, कृषि उत्पादकता, रोजगार और पर्यावरण के क्षेत्र में भी व्यापक लाभ मिलने की उम्मीद है।

संघ ने कहा कि इस योजना से सबसे बड़ा आर्थिक लाभ प्राकृतिक गैस के आयात में कमी के रूप में सामने आ सकता है। भारत अपनी प्राकृतिक गैस की जरूरत का करीब 50 प्रतिशत आयात करता है, जिससे अंतरराष्ट्रीय कीमतों में उतार-चढ़ाव और भू-राजनीतिक परिस्थितियों का असर अर्थव्यवस्था पर पड़ता है।

आईबीए के मुताबिक, वित्त वर्ष 2024-25 में एलएनजी का आयात बिल करीब 15.2 अरब डॉलर रहा था। संघ का अनुमान है कि आने वाले वर्षों में यदि करीब 1,500 कम्प्रेस्ड बायोगैस (सीबीजी) संयंत्र पूरी क्षमता के साथ संचालित होते हैं, तो प्राकृतिक गैस आयात से जुड़े व्यापार घाटे में करीब एक-तिहाई की कमी लाई जा सकती है। इससे लगभग पांच अरब डॉलर (लगभग 40 लाख करोड़ रुपये) की बचत संभव है।

आईबीए ने कहा कि योजना से उर्वरक आयात और सरकार पर सब्सिडी के बोझ को कम करने में भी मदद मिल सकती है।

वित्त वर्ष 2024-25 में उर्वरक आयात का बिल करीब 18 अरब डॉलर रहा था। आईबीए का अनुमान है कि 1,500 सीबीजी संयंत्रों के संचालन और बेहतर कृषि पद्धतियों को अपनाने से उर्वरक आयात में कम से कम पांच प्रतिशत की कमी लाई जा सकती है। इससे चालू खाते के घाटे में करीब एक अरब डॉलर की कमी आ सकती है।

संघ ने कहा कि गोबरधन योजना से खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। इससे कुशल और अर्द्ध-कुशल श्रमिकों के लिए रोजगार के अवसर पैदा होने के साथ-साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा मिलेगा।

भाषा अजय अजय

अजय


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