देश में आयात शुल्क बढ़ने से 2026 में सोने की मांग में आ सकती है 50-60 टन की कमी

देश में आयात शुल्क बढ़ने से 2026 में सोने की मांग में आ सकती है 50-60 टन की कमी

देश में आयात शुल्क बढ़ने से 2026 में सोने की मांग में आ सकती है 50-60 टन की कमी
Modified Date: May 22, 2026 / 08:02 pm IST
Published Date: May 22, 2026 8:02 pm IST

मुंबई, 22 मई (भाषा) आयात शुल्क बढ़ाए जाने के बाद देश में वर्ष 2026 के दौरान सोने की मांग 50-60 टन घट सकती है, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 10 प्रतिशत कम होगी। विश्व स्वर्ण परिषद (डब्ल्यूजीसी) ने यह बात कही है।

डब्ल्यूजीसी ने भारत के स्वर्ण बाजार पर अपनी ताजा रिपोर्ट में कहा, “पूरे वर्ष 2026 को देखें तो आभूषण, सोने की छड़ और सिक्कों की संयुक्त मांग में लगभग 50-60 टन की कमी आ सकती है, जो पिछले वर्ष के मुकाबले करीब 10 प्रतिशत कम होगी। इसका मुख्य कारण आयात शुल्क में बढ़ोतरी है।”

सोने पर आयात शुल्क को छह प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया गया है। यह अब तक की सबसे बड़ी बढ़ोतरी मानी जा रही है और इससे जुलाई 2024 में की गई शुल्क कटौती पूरी तरह समाप्त हो गई है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी लोगों से एक वर्ष तक सोना खरीदने से बचने की अपील की है।

रिपोर्ट में कहा गया कि सोने की कीमत, आय स्तर में बदलाव, मुद्रास्फीति और मानसून जैसे अन्य कारक भी सालाना मांग को प्रभावित करेंगे।

डब्ल्यूजीसी ने कहा, “हमारे आर्थिक मॉडल बताते हैं कि आयात शुल्क में बदलाव का असर अल्पकाल और दीर्घकाल दोनों में सोने की मांग पर पड़ता है। हालांकि, इसका प्रभाव आभूषण और निवेश उत्पादों जैसे सोने की छड़ तथा सिक्कों पर अलग-अलग होता है। निवेश मांग शुल्क बदलाव के प्रति अधिक संवेदनशील होती है, जबकि आभूषण मांग अपेक्षाकृत अधिक स्थिर रहती है।”

डब्ल्यूजीसी के अनुसार, आभूषणों की मांग पर कीमतों और मुद्रास्फीति का अधिक असर पड़ता है, जबकि आयात शुल्क का प्रभाव अपेक्षाकृत कम होता है। इसका कारण यह है कि विवाह और सामाजिक आयोजनों के लिए आभूषणों की खरीद अक्सर आवश्यक मानी जाती है।

वहीं, निवेश मांग आय स्तर और आयात शुल्क से जुड़ी होती है। अधिक शुल्क और पाबंदियां आमतौर पर मांग को प्रभावित करती हैं।

परिषद ने कहा कि अल्पकाल में मुद्रास्फीति और मानसून जैसे कारक भी निवेश मांग को प्रभावित करते हैं।

डब्ल्यूजीसी ने कहा कि आयात आंकड़े यह दर्शाते हैं कि आयात शुल्क में वृद्धि और अनधिकृत या तस्करी के जरिये आने वाले सोने के प्रवाह के बीच सीधा संबंध रहा है।

वर्ष 2013 से 2026 के बीच आयात शुल्क में बढ़ोतरी के बाद ज्यादातर मामलों में तस्करी वाला सोना बढ़ा, जबकि शुल्क में कमी आने पर इसमें तेज गिरावट दर्ज की गई।

वर्ष 2013 में आयात शुल्क में चार प्रतिशत वृद्धि के बाद अनधिकृत सोने का आयात पहली तिमाही में लगभग 10 टन से बढ़कर 2014 की समान अवधि तक 70 टन हो गया था।

डब्ल्यूजीसी ने कहा कि वर्ष 2013 की दूसरी छमाही से 2019 की दूसरी तिमाही तक शुल्क 10 प्रतिशत पर स्थिर रहने के बावजूद अनधिकृत आयात ऊंचे स्तर पर बना रहा और औसतन 34 टन प्रति तिमाही रहा। इससे संकेत मिलता है कि एक बार तस्करी नेटवर्क स्थापित हो जाए तो उसे खत्म करना कठिन होता है।

इसी तरह का रुख जुलाई, 2022 में शुल्क 10.75 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत किए जाने के बाद भी देखने को मिला। अनधिकृत आयात 2022 की दूसरी तिमाही में 17 टन से बढ़कर उसी वर्ष के अंत तक लगभग 50 टन हो गया और 2023 के अधिकांश समय तक ऊंचे स्तर पर बना रहा।

भाषा योगेश रमण

रमण


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