पश्चिम एशिया तनाव, तेल कीमतें और मुद्रास्फीति आंकड़े पर निर्भर होंगी सोने की कीमतें: विश्लेषक

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पश्चिम एशिया तनाव, तेल कीमतें और मुद्रास्फीति आंकड़े पर निर्भर होंगी सोने की कीमतें: विश्लेषक

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  • Publish Date - June 7, 2026 / 04:41 PM IST,
    Updated On - June 7, 2026 / 04:41 PM IST

नयी दिल्ली, सात जून (भाषा) इस सप्ताह सोने की कीमतें पश्चिम एशिया में जारी तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और प्रमुख वैश्विक आर्थिक आंकड़ों पर निर्भर रहेंगी। विश्लेषकों ने यह संभावना जताई है।

निवेशक चीन और अमेरिका के व्यापार एवं मुद्रास्फीति के आंकड़ों, मध्य माह में आने वाले अमेरिका के उपभोक्ता धारणा (कंज्यूमर सेंटिमेंट) के आंकड़ों तथा भारतीय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति (सीपीआई) पर नजर रखेंगे।

विश्लेषकों के अनुसार, इसके साथ ही यूरोपीय केंद्रीय बैंक के मौद्रिक नीति निर्णय पर भी बाजार की नजर रहेगी, क्योंकि इससे सर्राफा और अन्य जिंस बाजारों पर असर पड़ सकता है।

जेएम फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड के ईबीजी-जिंस एवं मुद्रा शोध के उपाध्यक्ष प्रणव मेर ने कहा, ‘‘सोने और चांदी जैसी कीमती धातुओं के लिए गति अब भी सुधारात्मक प्रतीत होती हैं।’’

घरेलू जिंस बाजार में सप्ताह का अंत गिरावट के साथ हुआ, जिसमें अगस्त माह में आपूर्ति के लिए मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर सोने का वायदा भाव 5,317 रुपये या 3.3 प्रतिशत टूटकर 1.55 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया।

जुलाई आपूर्ति वाली चांदी 18,461 रुपये यानी सात प्रतिशत गिरकर 2.48 लाख रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गई।

एलकेपी सिक्योरिटीज के उपाध्यक्ष शोध विश्लेषक जिंस एवं मुद्रा जतिन त्रिवेदी ने कहा, ‘‘तेल की कीमतों में बढ़ोतरी के चलते निवेशकों का ध्यान सुरक्षित निवेश विकल्पों से हट गया, जिससे पिछले सप्ताह सोने का प्रदर्शन कमजोर रहा।’’

उन्होंने कहा कि रुपये में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले मजबूती ने भी कीमती धातुओं पर अतिरिक्त दबाव डाला, जिससे घरेलू बाजार अंतरराष्ट्रीय बाजार की तुलना में कमजोर रहा।

वैश्विक बाजारों में सोने का वायदा भाव 227.7 डॉलर या पांच प्रतिशत गिरकर 4,365 डॉलर प्रति औंस पर बंद हुआ, जबकि चांदी 6.77 डॉलर यानी करीब नौ प्रतिशत टूटकर 69.10 डॉलर प्रति औंस पर आ गई।

मेर ने कहा कि विदेशी व्यापार में सोने की कीमतों पर दबाव पड़ा और सप्ताह के अंत में इसमें लगभग पांच प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जबकि औद्योगिक धातुओं में तेजी से आई गिरावट के कारण चांदी की कीमतों में भी भारी कमी आई।

विश्लेषकों के अनुसार, रूस-यूक्रेन संघर्ष में संभावित समाधान के संकेतों ने भी सर्राफा की मांग को कम किया है।

त्रिवेदी ने कहा कि अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें 4,400–4,500 डॉलर प्रति औंस के स्तर से नीचे बनी रहती हैं, तो कीमती धातुएं दबाव में रह सकती हैं। साथ ही मजबूत रुपया, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और सतर्क निवेश धारणा किसी भी तेज सुधार को सीमित कर सकते हैं।

भाषा यासिर अजय

अजय